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सकलराम तिरकी को बंगाल कैसे मिला 1500 एकड़ का खतियानी जमींदारी?

वर्तमान लोहरदगा जिला‚ कुड़ू थाना क्षेत्र के जिंगरी जोंजरो गांव के रहने वाला सकलराम तिरकी‚ एक उरांव परिवार में जन्मा् एवं पला–बढ़ा तथा एक मजदूर किसान का बेटा को जब अपने गांव–परिवार की गरीबी में अपने गांव से दूर जाने के लिए विवस होना पड़ा तो वह रास्ता ढूँढ़ते हुए बंगाल के पहाड़ी क्षेत्र अर्थात
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राजी पड़हा‚ भारत और कुँड़ुख़ तोलोंग सिकि (लिपि)

वर्ष – 1997 में 3‚ 4 एवं 5 जनवरी को राजी पड़हा देवान श्री भिखराम भगत के नेतृत्व में राजी पड़हा‚ भारत का वार्षिक सम्मेलन‚ ब्रहमनडिहा‚ लोहरदगा (बिहार/झारखण्ड) में सम्पन्न हुआ। इस सम्मेलन में उपस्थित पड़हा प्रतिनिधि एवं जनसभा द्वारा कुँड़ुख़ भाषा की लिपि के रूप में तोलोंग सिकि (लिपि) को स्वीकार किया गया‚ परन्तु
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साहित्य अकादमी सम्मान (कुँड़ुख भाषा) से सम्मानित डॉ निर्मल मिंज का कुँड़ुख भाषा हेतु नई लिपि के विकास की आवश्यक्ता पर 1997 में विचार

:: बिशप डॉ. निर्मल मिंज :: रांची दिनांक – 04॰04॰1997: अधिकांश आदिवासी अपनी सांस्कृतिक पहचान से दो तरह से वंचित हैं। वे अपनी स्कूली शिक्षा एक अलग परिवेश वाले समाज की भाषा एवं लिपि में शुरू करते हैं। इस प्रकार उन्होंने अपने व्यक्तिगत और सामुदायिक जीवन से दो सीढ़ी नीचे कदम रखा है। पहले उनकी मातृभाषा
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‘नई लिपि तोलोंग सिकि सामाजिक सह सांस्कृतिक आधारवाला तथा तकनीकी संगत वाला हो’

आदिवासी भाषाओं के विकास के लिए नई लिपि का आवश्यकता के संबंध में संयुक्त बिहार के आदिवासी बुद्धिजीवि एक साथ मिलकर, केन्द्रीय भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर (भारत सरकार) के प्रोफेसर एवं निदेषक डॉ॰ फ्रांसिस एक्का के साथ होटल महारजा, राँची में बैठक किये। यह बैठक 24 जनवरी 1998 को हुआ। डॉ॰ फ्रांसिस एक्का, बिहार जनजातीय
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कुँड़ुख़ तोलोंग सिकि के विकास की दिशा में सामाजिक-सह-भाषा वैज्ञानिक दृष्टिकोण: पद्मश्री स्व. डॉ रामदयाल मुण्डा

नई लिपि कुँड़ुख़ तोलोंग सिकि के विकास की दिशा में सामाजिक सह भाषा वैज्ञानिक दृष्टिकोण‚ पद्मश्री स्व डॉ रामदयाल मुण्डा द्वारा डॉ नारायण उराँव द्वारा तोलोंग सिकि लिपि के तकनीकि पहलुओं को आसानी से समझने के लिये 1997 में एक पुस्तक की रचना की गई‚ जिसका नाम – Graphics of Tolong Siki रखा गया और
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साहित्य अकादेमी भाषा सम्मान (कुँड़ुख़) 2016‚ सम्मान समारोह में स्व. डॉ निर्मल मिंज का वक्तब्य

21 फरवरी 2017 को डॉ॰ निर्मल मिंज द्वारा दिया गया वक्तव्य : परम आदरणीय डॉ॰ विश्व्नाथ प्रसाद तिवारी, अध्यक्ष, साहित्य अकादेमी, डॉ॰ के॰श्रीनिवासराव, सचिव, साहित्य अकादेमी। मेरी मातृभाषा कुँड़ुख़ की छोटी सेवा के लिए इतना बड़ा भाषा सम्मान देकर, आपने मुझे और कुँड़ुख़ (उराँव) समाज को सम्मानित किया है, इसके लिए मैं आप लोंगों के
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कुँड़ुख भाषा तोलोंग सिकि के विकास की कहानी – डॉ निर्मल मिंज

साहित्य अकादमी सम्मान (कुँड़ुख भाषा) से सम्मानित डॉ निर्मल मिंज का कुँड़ुख भाषा एवं तोलोंग सिकि के विकास पर वर्ष 2019 में वक्तब्य : कुँड़ुख भाषा तोलोंग सिकि के विकास की कहानी kuEzux lipi qoloX siki gahi xi:ri kuEzux kaqQA gahi xi:ri gA wiGam raHi. barA nA:m gunain nanoq. kaqQA kaCnaKarnA arA awin e:rA ge si:bA xA:rnA gahi
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कुँड़ुख भाषा एवं तोलोंग सिकि पर वर्ष 2016 में डॉ॰ निर्मल मिंज ने कहा था..

साहित्य अकादमी सम्मान (कुँड़ुख भाषा) से सम्मानित डॉ॰ निर्मल मिंज का कुँड़ुख भाषा एवं तोलोंग सिकि के विकास पर वर्ष 2016 में वकतव्य साहित्य अकादमी सम्मान (कुँड़ुख भाषा) से सम्मानित डॉ॰ निर्मल मिंज का कुँड़ुख भाषा एवं तोलोंग सिकि के विकास पर वर्ष 2016 में वकतव्यसाहित्य अकादमी सम्मान (कुँड़ुख भाषा) से सम्मानित डॉ॰ निर्मल मिंज
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बिरसा शहीद दिवस, दिखावा या दिल से ? – सालखन मुर्मू

आज 9 जून भगवान बिरसा मुंडा का शहीद दिवस है। बिरसा मुंडा रांची जेल में मर गए या मारे गए एक रहस्य है। मगर बिरसा मुंडा हमारे बीच आज भी जीवित हैं। उनका सपना- “अबुआ दिशुम- अबुआ राज” आज भी झकझोरता है, याद दिलाता है। उनके अदम्य साहस और “जंगल गोरिल्ला वारफेर” की रणनीति से
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तोलोंग सिकि तोड़पाब (वर्णमाला) पर कुँड़ुख़ बाल कविता
तोलोंग सिकि तोड़पाब (वर्णमाला) पर श्री बिमल टोप्पो की कुँड़ुख़ बाल कविता का देवनागरी एवं तोलोंग सिकि में लिप्यान्तरण तोलोंग सिकि तोड़पाब (वर्णमाला) पर श्री बिमल टोप्पो की कुँड़ुख़ बाल कविता का देवनागरी एवं तोलोंग सिकि में लिप्यान्तरण तोलोंग सिकि तोड़पाब (वर्णमाला) पर श्री बिमल टोप्पो की कुँड़ुख़ बाल कविता का देवनागरी एवं तोलोंग सिकि
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- ओर- करम करम करले बहीन..आईज तारीख 08 मार्च 2026 दिन एतवार के कुड़ुख़ टाइम्स डॉट कॉम कर पुनह परकाशन कर बेरा में टी आर एल ब्लॉग ले उरांव अखरा से तीन गो गावल गीत के नागपुरी भखा में बताल हय। इके धेयान देवब और गुनगुनाब अपने मन सउब – 1 ओर छोट-मोटे तेतईर गे आयो,भिंजल छांहईर गे आयो ।2।घुराल… Read more: ओर- करम करम करले बहीन..
- झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?राँची के कोर्नेलियस मिंज को लोग करन कहते हैं. उनका परिवार सरना आदिवासी था लेकिन बाद में ईसाई बन गया. हालाँकि कोर्नेलियस के घर में अब भी कई लोग सरना हैं. यह परिवार साथ में सरहुल भी मनाता है और क्रिसमस भी. आपस में शादियाँ भी होती हैं. करन कहते हैं कि जब सरना और… Read more: झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?
- झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानितरांची: आज दिनांक 21.02.2026 दिन शनिवार को प्रेस क्लब रांची में अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर अखिल झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार सम्मान 2026 झारखंड के 9 साहित्यकारों के रचनाकारों के साथ ओल चिकि लिपि के रचयिता श्रद्धेय पं रघुनाथ मुर्मू तथा वरांग चिति के रचयिता श्रद्धेय कोल लाको बोदरा को मरणोपरांत उनके वंशजों को… Read more: झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानित
- औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?आजादी के पचहत्तर साल बाद भी भारत अंग्रेज और अंग्रेजियत (औपनिवेशिक गुलामी) से मुक्त नहीं हुआ है”—इस उक्ति को यदि गहराई से समझें, तो यह किसी भौतिक गुलामी की नहीं बल्कि मानसिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक और वैचारिक गुलामी की ओर संकेत करती है। भारत ने 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता तो प्राप्त की, परंतु औपनिवेशिक सत्ता द्वारा… Read more: औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?
- हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते यह जानकर बहुत प्रेरणा मिलती है कि गुमला, रांची, लातेहार और लोहरदगा के युवा गणित (Maths) जैसे कठिन विषय को भी कुँड़ुख में ढाल रहे हैं। प्रसिद्ध अफ्रीकी लेखक चिंतक न्गुगी वा थ्योंगो ने हमेशा यही कहा कि – “भाषा केवल साहित्य के लिए नहीं, बल्कि विज्ञान और तर्क के लिए भी होनी चाहिए” ।… Read more: हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते