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प्रकृति की थाली: आदिवासी खान-पान की सेहतमंद और स्वादिष्ट परंपरा

बढ़ती आबादी और समय के साथ रहन-सहन, संस्कारों तथा खान-पान में आये बदलावों के बावजूद आदिवासी समाज ने अपनी जीवनशैली को प्रकृति के साथ संतुलित रखने की परंपरा को हमेशा संजोकर रखा है। प्रकृति के अनुरूप ढली इस जीवनशैली में उनके भोजन का विशेष स्थान है। आदिवासी खान-पान केवल पेट भरने का माध्यम नहीं है,…
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औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?

आजादी के पचहत्तर साल बाद भी भारत अंग्रेज और अंग्रेजियत (औपनिवेशिक गुलामी) से मुक्त नहीं हुआ है”—इस उक्ति को यदि गहराई से समझें, तो यह किसी भौतिक गुलामी की नहीं बल्कि मानसिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक और वैचारिक गुलामी की ओर संकेत करती है। भारत ने 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता तो प्राप्त की, परंतु औपनिवेशिक सत्ता द्वारा…
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हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते

यह जानकर बहुत प्रेरणा मिलती है कि गुमला, रांची, लातेहार और लोहरदगा के युवा गणित (Maths) जैसे कठिन विषय को भी कुँड़ुख में ढाल रहे हैं। प्रसिद्ध अफ्रीकी लेखक चिंतक न्गुगी वा थ्योंगो ने हमेशा यही कहा कि – “भाषा केवल साहित्य के लिए नहीं, बल्कि विज्ञान और तर्क के लिए भी होनी चाहिए” ।…
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कुडुख तोलोंग सिकि का विकास और झारखण्ड अधिविद्य परिषद, रांची का मार्ग दर्शन

वर्ष 2008 में झारखण्ड अधिविद्य परिषद, रांची के कार्यालय में एक आवेदन समर्पित हुआ। उस आवेदन में मांग किया गया था कि – हमारे स्कूल के विद्यार्थी कुड़ख़ भाषा विषय की पढ़ाई कुडुख़ की लिपि, तोलोंग सिकि में किये हैं, इसलिए इन्हें अपनी भाषा की लिपि में परीक्षा लिखने की अनुमति प्रदान की जाए। वह…
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धार्मिक उपनिवेषवाद और उरांव समाज के विकास की धारा

उपनिवेषवाद का अर्थ है – ‘‘किसी समृद्ध एवं शक्तिशाली राष्ट्र द्वारा अपने विभिन्न हितों को साधने के लिए किसी निर्बल किन्तु प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण राष्ट्र के विभिन्न संसाधनों का, शक्ति के बल पर उपभोग करना।’’ यहाँ धार्मिक उपनिवेषवाद का अर्थ है – कमजोर और असंगठित समाज को अपने धार्मिक जाल में उलझा कर उसके…
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The Historical Significance of Rohtasgarh and Oraons

Rohtasgarh is a historical place of significant value for the Oraon tribe. The Oraon, or Kurukh, are one of the largest tribal groups in Eastern India. There is some geographical situation in this mountain towards Son River where several descending roots descend down from up. These roots called as Ruih in Kurukh/Oraon language. So the mountain become famous as…
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क्या राज्य सरकार को पंचायत अधिनियम या पेसा पर कानून बनाने का अधिकार है?

पेसा कानून की नियमावली, पेसा कानून,1996 के मूल प्रावधानों के ही आलोक में बनाना है पर लोगो में कुछ भरम की स्थिति है । एक छोटा सा प्रयास है इसको दूर करने का ।जैसे, अस्पष्टता और भ्रम के निम्न बिंदु हैं। 1. पी पेसा या पेसा? पी-पेसा या पेसा कहने से पेसा कानून,1996 की मूल…
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दव ख़ंजपा जिनगी घी : कुंड़ुख कविता

यह कुंड़ुख़ कविता, झारखंड पुलिस सेवा में कार्यरत एक उरांव व्यक्ति की है। उन्होंने अपने समाज के लोगों के दिल को छू लेने वाली कविता लिखी है। यह देवनागरी एवं तोलोंग सिकि, दो लिपि में पठनीय है। आइये आगे देखें और पढ़ें – दव ख़ंजपा जिनगी घी 1. जोंख़ मंजकन बेंज्जा मंज्जा, धर्मेस घी दया ती,एंगदा बगर मंज्जर,…
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भाषाई विरासत का अनावरण: मराठी, गुजराती, मारवाड़ी और सिंधी पर द्रविड़ प्रभाव

हड़प्पा सभ्यता के पतन के बाद, आक्रमणकारी आर्यों ने 16 आर्य राज्यों की स्थापना की, जैसा कि दूसरी छवि में दर्शाया गया है। किंवदंती है कि राम के सौतेले भाई भरत ने तक्षशिला शहर की स्थापना करके गांधार साम्राज्य तक अपना प्रभाव बढ़ाया। यह क्षेत्र, गांधार, भरत की माता कैकेयी के पैतृक क्षेत्र केकेय साम्राज्य…
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आज के समय में इंसान इंटरनेट में कैद है और प्राकृति से दूर है

लेकिन अगर आपको समय मिले तो phytoncides प्रोसेस के बारे में गूगल करिएगा। आपको पता चलेगा कि जंगलों की ओर जाने से और वहां सांस लेने से आप अपना इम्यून सिस्टम बेहतर कर सकते हैं। पूरा जंगल एक दूसरे की मदद करता रहता है। इस पूरे कांसेप्ट को Ubuntu कहते हैं। हम खुद को समझदार…
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- Kurukh Times Web Magazine Issue 05कुंड़ुख टाइम्स का वेब मैगजिन अंक 05 प्रकाशित हो गया है। नीचे पीडीएफ में पढ़े और डाउनलोड करें।
- Kurukh Times Web Magazine Issue 03कुंड़ुखटाइम्स का वेब मैगजिन अंक 03 प्रकाशित हो गया है। इसे नीचे पीडीएफ में पढ़ सकते हैं चाहें तो डाउनलोड भी कर सकते हैं।
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- Kurukh Times Web Magazine Issue 1कुंड़ुख टाइम्स त्रैमासिक वेब पत्रिका का पहला अंक प्रकाशित हो गया है। नीचे पूरा अंक पढ़ सकते हैं और चाहें तो डाउनलोड भी कर सकते हैं।
- पाड़हा समन्वय परिषद ने रांची विश्वविद्यालय के कुलपति से मिलकर मांगपत्र सौंपाआज दिनांक 23.06.2026को पड़हा समन्वय परिषद, भारत के पदाधिकारीगण, राँची विश्वविद्यालय, रांची के कुलपति प्रो (डॉ) सरोज शर्मा से मुलाकात कर कुडुख तोलोड़ सिकी लिपि के माध्यम से भी पढ़ाई चालू रखने, छापड़हा समन्वय परिषद, भारत के पदाधिकारीगण, राँची विश्वविद्यालय, रांची के कुलपति प्रो (डॉ) सरोज शर्मा से मुलाकात कर कुडुख तोलोड़ सिकी लिपि के… Read more: पाड़हा समन्वय परिषद ने रांची विश्वविद्यालय के कुलपति से मिलकर मांगपत्र सौंपा