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परम्परागत आदिवासी समाज और डिलिस्टिंग विषयक राजनीति

श्री गजेन्द्र उरांव उर्फ नाना जी उम्र 70 वर्ष थाना सिसई जिला गुमला के रहनेवाले एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। स्कूली शिक्षा में बे 9वीं पास हैं। उनका कहना है कि बचपन में उनके माता पिता स्कूल न भेजकर, बैल-बकरी चराने के लिए भेजते थे। इस कार्य में उनका दिल नहीं लगता था। तब वे बड़े
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धुमकुडि़या : आदिवासी समाज की आरंभिक सामाजिक पाठशाला (भाग 2/3)
इस विशेष अंक का भाग -2 नीचे ऑनलाइन पढ़ें नि: शुल्क.. आप इसे डाउनलोड कर सकते हैं.. धुमकुडि़या भाग-3 https://www.kurukhtimes.com/node/381 धुमकुडि़या भाग-1 https://www.kurukhtimes.com/node/379
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धुमकुडि़या : आदिवासी समाज की आरंभिक सामाजिक पाठशाला (भाग1/3)

इस विशेष अंक का भाग एक नीचे ऑनलाइन पढ़ें नि: शुल्क.. आप इसे डाउनलोड कर सकते हैं.. धुमकुडि़या भाग-2 https://www.kurukhtimes.com/node/380 धुमकुडि़या भाग-3 https://www.kurukhtimes.com/node/381
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इंटरमीडियट काउंसिल, रांची विवि एवं कुंड़ुंंख समाज का अन्तर्द्वन्द्व : नीतू साक्षी टोप्पो

शोधार्थी नीतू साक्षी टोप्पो का पठनीय आलेख जिसमें कुंड़ुंख भाषा एवं लिपि को लेकर झारखंड अधिविद्य परिषद, रांची विश्वविद्यालय के कुंड़ुंख भाषा विभाग और कुड़ुंख भाषा-भाषी उरांव समाज के अंतर्द्वन्द्व को विस्तार से बताया गया है। पूरा आलख पढ़ें नीचे पीडीएफ में..
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मणिपुर हिंसा : आदिवासियों को खत्म करने की साजिश! | ‘सरना धर्मकोड नहीं, तो 2024 मोदी को भारी पड़ेगा’
तभी शांत होगा मणिपुर – पूरे देश में जनजाति सूची में नई जातियों के शामिल करने पर 30 वर्षों के लिये रोक लगायी जाए और इसकी घोषणा तुरंत की जाए : सालखन मुर्मू। पूर्व सांसद व सेंगेल नेता सालखन मुर्मू से बातचीत। जेएमएम ने आदिवासियों को बेचा है: सालखन। सालखन की घोषणा: 2024 आम चुनाव
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कुँडुख़ भाषा एवं तोलोंग सिकि, लिपि के प्रचार-प्रसार की उलझने और चुनौतियाँ

विदित है कि कुँडुख़़ भाषा की लिपि, तोलोंग सिकि के विकास में देश का आदिवासी आन्दोलन तथा झारखण्ड अलग प्रांत आन्दोलन का छात्र आन्दोलन की भूमिका उल्लेखनीय रही है। इसके वाबजूद कुँडुख़ तोलोंग सिकि के प्रचार-प्रसार में काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ा। वैसे पेशे से चिकित्सक डा० नारायण उराव के लगन एवं सूझबूझ से
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मन्दर बिरो- झारखंड राज्य की पारंपरिक चिकित्सा

झारखंड प्रदेश खनिज व वन संपदाओं और जैव विविधता से परिपूर्ण है। उपलब्ध डेटा के अनुसार भारत के भौगोलिक क्षेत्र में प्रदेश का कुल वन क्षेत्र 29.61 प्रतिशत है। यहां के छोटानागपुर में शुष्क पर्णपाती वन औषधीय पौधों की खेती के लिए वातावरण सबसे उपयुक्त है। जंगलों में ऐसे मूल्यवान औषधीय पौधों को लगाने एवं
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प्रकृति का पारिस्थितिकी तंत्र कैसे काम करता है, बताया भेडि़यों ने..

अगर आपको ये समझना है कि एको सिस्टम यानि हमारी प्रकृति का पारिस्थितिकी तंत्र कैसे काम करता है तो आपको अमेरिका के येलोस्टोन नेशनल पार्क के उदाहरण से इसे समझना चाहिए.. चूँकि हमारा एको सिस्टम एक जटिल कार्यप्रणाली है जिसे आप अपनी आखों से देखकर कभी समझ नहीं सकते हैं.. आप ये कभी नहीं समझ पायेंगे कि
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मन्दर बिरो- झारखंड राज्य की पारंपरिक चिकित्सा

‘मन्दर बिरो’ कुड़ुख शब्द है, जिसका अर्थ है – औषधि द्वारा उपचार करना। पारंपरिक चिकित्सा शैली जिसमें वैद्य ( मन्दर-अख़ ‘उस ) द्वारा बीमारी को दूर करने या कम करने के लिए रोगी ( मन्दा ) को जड़ी-बूटी, चूरन या दवा के रूप में औषधि ( मन्दर ) दी जाती है। उपयोग में लाए गए
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कुड़ुख़ लिपि दर्शन

भूमिका : कुड़ुख़ लिपि को तोलोंग सिकि के नाम से जाना जाता है, क्योंकि यह लिपि कुड़ुख़ बोलने वालों की तोलोंग (परम्परागत वस्त्र) पहनने की कला तथा उनके घुमने-फिरने व काम करने के तरीकों के अनुसार बनायी गयी है। कहने का तात्पर्य यह कि तोलोंग-लिपि, कुड़ुख़ संस्कृति की विशेषताओं को उजागर करते हुए गढ़ी गयी है।
Latest Posts
- KURUX PHONETIC READER कुड़ुख़ भाषा एवं व्याकरण को समझने के लिएयह पुस्तक KURUX PHONETIC READER के नाम से मई 1985 में CIIL MYSORE द्वारा प्रकाशित हुआ है। इसका प्रथम संस्करण का समय, 40 वर्ष एवं 10 महीने से अधिक है। आदिवासी भाषा में शोध कर रहे शोधकर्ताओं द्वारा इस पुस्तक की मांग को देखते हुए कुड़ुख़ भाषा विज्ञान की इस आधार स्तंभ पुस्तक को सामान्य… Read more: KURUX PHONETIC READER कुड़ुख़ भाषा एवं व्याकरण को समझने के लिए
- जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच का स्थापना दिवस संपन्नदिनांक 01.04.2026, दिन बुधवार को जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच का स्थापना दिवस फादर कामिल बुल्के पथ रांची में स्थित सत्यभारती के सभागार में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर नए अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चयन किया गया। समारोह में रांची विश्वविद्यालय के नागपुरी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. वीरेंद्र महतो को मंच का अध्यक्ष… Read more: जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच का स्थापना दिवस संपन्न
- कुड़ुख़ टाइम्स का 17वां अंक प्रकाशित हुआकुड़ुख़ टाइम्स का 17वां अंक आप पाठकों के सामने है। यह अंक अपने नये स्वरूप में आप पाठकों के लिए रोचक होगा। कुड़ुख़ संस्कृति एवं नेगचार को असम के डिब्रूगढ़ क्षेत्र में रहने वाले उरांव लोगों को जानिए। साथ ही तमिल-भाषी डॉ स्टीफन जी द्वारा इतिहास के पन्नों पर शोध परक लेख देखने को मिलेगा।… Read more: कुड़ुख़ टाइम्स का 17वां अंक प्रकाशित हुआ
- कुडुख़ भाषा की लिपि “तोलोड सिकि” में कुडुख़ प्रवेशिका पुस्तक “अयंग कोंयछा” प्रकाशितकुडुख़ भाषा की लिपि “तोलोड सिकि” में कुडुख़ प्रवेशिका पुस्तक “अयंग कोंयछा” केतृतीय संस्करण के प्रकाशन पर मुझे एक विशिष्ट उर्जा की अनुभूति हो रही है। मैं अपने छात्र जीवनके समय में वर्ष 1989 में कुडुख़ समाज की स्थिति के बारे विचार करते हुए कुडुख़ भाषा एवं संस्कृतिके संरक्षण तथा संवर्द्धन हेतु कार्य करने का… Read more: कुडुख़ भाषा की लिपि “तोलोड सिकि” में कुडुख़ प्रवेशिका पुस्तक “अयंग कोंयछा” प्रकाशित
- Kurukh Times की डिजिटल पत्रिका अंक 16 प्रकाशित हुआपूर्व के अंकों की तरह पत्रिका का 16वां अंक प्रकाशित हो गया है। इसमें तोलोंग सिकि लिपि में रोचक सामग्री शामिल किये गय हैं। आशा है अन्य अंकों की तरह इस अंक को भी आपका भरपूर प्यार मिलेगा। इसे आप इस पन्ने पर देख सकते हैं। आप चाहें तो इसे अपने पीसी या मोबाइल में… Read more: Kurukh Times की डिजिटल पत्रिका अंक 16 प्रकाशित हुआ