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आदिवासी राष्ट्रपति और आदिवासी गांव-समाज -सालखन मुर्मू

देश ने एक आदिवासी संताल महिला द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाकर एक नया इतिहास बनाया है। दुनिया के सर्वाधिक बड़ी गणतंत्र भारत ने मिसाल कायम किया है। जो 200 वर्षों में भी अमेरिका नहीं कर पाया है। देश के लिए गर्व और सम्मान की बेला है। परंतु आदिवासी समाज के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक समृद्धि का
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आदिवासी मौसम पुर्वानुमान पर जैव प्रौद्योगिकी विज्ञान आधारित शोध की आवश्यकता पर विचार हो

वातावरण हर समय बदल रहा हैं। वैश्विक मौसम पैटर्न को देखकर मौसम विज्ञानी ध्रुवीय परिक्रमा करने वाले उपग्रह की मदद से भविष्य की सात दिनों का 80 प्रतिशत तक सटीक मौसम पूर्वानुमान करते हैं। पर दस दिन या उससे अधिक समय का पूर्वानुमान केवल आधे समय के लिए ही सही होता है। किन्तु मौसम की
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गांव-समाज में सुधार, एकता और एजेंडा से आदिवासी बच सकते हैं – सालखन मुर्मू

संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित 1994 से आदिवासी अस्तित्व, पहचान, हिस्सेदारी आदि को समझने, सहयोग करने और संवर्धन करने हेतु दुनिया भर में विभिन्न देश और आदिवासी 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाते हैं। संयुक्त राष्ट्र ने 13 सितंबर 2007 को विश्व आदिवासी अधिकार घोषणा- पत्र भी जारी किया है। संयुक्त राष्ट्र ने 2022 से
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पिता की संपत्ति पर बेटी का अधिकार : एक उराँव आदिवासी महिला की कलम से

देश की आजादी के बाद भारत में नया संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ और कई पुराने छोटे-बड़े रियासत एक झण्डे के नीचे आ गये। इस नव निर्माण में लोगों के बीच, संविधान बनने के पूर्व से चले आ रहे हिन्दु पर्सनल लॉ, मुस्लिम पर्सनल लॉ, ईसाई विवाह कानुन इत्यादि सामाजिक एवं सम्प्रदायिक कानून
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प्रकृति और कुंडुख भाषा विकास

भारतीय भूमि की यह विशिष्टता है कि यहाँ की भूमि में पानी और वाणी की विविधता है। भारतीय उपमहाद्वीप में कुड़ुख भाषी आदिवासी समूह निवास करते हैं। इस समूह की खास बात है कि यह प्रकृति द्वारा अनुशासित है। कुड़ुख भाषी जनजीवन में प्रकृति और मानव के मध्य का मधुर अंतर्सम्बंध स्पष्ट दिखलाई पड़ता है।
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नयी शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं का स्थान

सार: किसी भी भाषा के लुप्त होने या उसके संकटग्रस्त श्रेणी में आ जाने के परिणाम बहुत दूरगामी होते हैं। भाषा का एक-एक शब्द महत्त्वपूर्ण होता है। प्रत्येक शब्द अपने पीछे संस्कृति की एक लंबी परंपरा को लेकर चलता है। इसलिए भाषा लुप्त होते ही संस्कृति पर खतरा मंडराने लगता है। संस्कृति और उस भाषा
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं मातृभाषा शिक्षा

भारतीय संविधान के चौथे भाग उल्लिखित नीति निदेशक तत्वों में कहा गया है कि प्राथमिक स्तर पर सभी बच्चों को अनिवार्य एवं निःशुल्क शिक्षण की व्यवस्था की जाए। सामान्य परिचय :- जब देश 15 अगस्त 1947 ई० को स्वतंत्र हुआ, तभी से ही भारत में शिक्षा नीति पर जोर दिया जा रहा है। सन् 1948 ई० में
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धुमकुड़िया कोरना अरा पूरना उल्ला (धुमकुड़िया प्रवेश तथा पूर्णता दिवस)

बअ़नर माघ चन्ददो नु ख़द्दारिन धुमकुड़िया मंक्खा लगियर अरा ख़द्दर माघ चन्द्दो नु धुमकुड़िया कोरआ लगियर। एन्नेम माघ पुनई गेम जोंख़ रअ़उर गही माघ पूरआ लगिया दरा पुना अड्डा नु मलता पुना चान नु माघ पुनई ख़ोःख़ा ती जोंख़ रअ़ना ओरे मना लगिया। 1. धुमकुड़िया एन्दरा तली ? (धुमकुड़िया क्या है ?) उत्तर –
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साम्राज्यवादी धर्मों का आक्रमण और बिखरों को समेटते प्राकृतिक आदिवासी

पहले, प्रथम आदिवासी और प्रकृति दोनों एक ही बात थी. कोई भी एक को दूसरे की बिना कल्पना नहीं कर सकते थे. आज के समय में थोड़ा बदलाव आया भी है तो आदिवासी और प्रकृति को आप अन्योन्याश्रिता के तौर पर देख सकते हैं, जो की अंधाधुंध औद्योगीकरण और शहरीकरण के प्रभाव में थोड़ा कमजोर
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- KURUX PHONETIC READER कुड़ुख़ भाषा एवं व्याकरण को समझने के लिएयह पुस्तक KURUX PHONETIC READER के नाम से मई 1985 में CIIL MYSORE द्वारा प्रकाशित हुआ है। इसका प्रथम संस्करण का समय, 40 वर्ष एवं 10 महीने से अधिक है। आदिवासी भाषा में शोध कर रहे शोधकर्ताओं द्वारा इस पुस्तक की मांग को देखते हुए कुड़ुख़ भाषा विज्ञान की इस आधार स्तंभ पुस्तक को सामान्य… Read more: KURUX PHONETIC READER कुड़ुख़ भाषा एवं व्याकरण को समझने के लिए
- जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच का स्थापना दिवस संपन्नदिनांक 01.04.2026, दिन बुधवार को जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच का स्थापना दिवस फादर कामिल बुल्के पथ रांची में स्थित सत्यभारती के सभागार में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर नए अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चयन किया गया। समारोह में रांची विश्वविद्यालय के नागपुरी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. वीरेंद्र महतो को मंच का अध्यक्ष… Read more: जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच का स्थापना दिवस संपन्न
- कुड़ुख़ टाइम्स का 17वां अंक प्रकाशित हुआकुड़ुख़ टाइम्स का 17वां अंक आप पाठकों के सामने है। यह अंक अपने नये स्वरूप में आप पाठकों के लिए रोचक होगा। कुड़ुख़ संस्कृति एवं नेगचार को असम के डिब्रूगढ़ क्षेत्र में रहने वाले उरांव लोगों को जानिए। साथ ही तमिल-भाषी डॉ स्टीफन जी द्वारा इतिहास के पन्नों पर शोध परक लेख देखने को मिलेगा।… Read more: कुड़ुख़ टाइम्स का 17वां अंक प्रकाशित हुआ
- कुडुख़ भाषा की लिपि “तोलोड सिकि” में कुडुख़ प्रवेशिका पुस्तक “अयंग कोंयछा” प्रकाशितकुडुख़ भाषा की लिपि “तोलोड सिकि” में कुडुख़ प्रवेशिका पुस्तक “अयंग कोंयछा” केतृतीय संस्करण के प्रकाशन पर मुझे एक विशिष्ट उर्जा की अनुभूति हो रही है। मैं अपने छात्र जीवनके समय में वर्ष 1989 में कुडुख़ समाज की स्थिति के बारे विचार करते हुए कुडुख़ भाषा एवं संस्कृतिके संरक्षण तथा संवर्द्धन हेतु कार्य करने का… Read more: कुडुख़ भाषा की लिपि “तोलोड सिकि” में कुडुख़ प्रवेशिका पुस्तक “अयंग कोंयछा” प्रकाशित
- Kurukh Times की डिजिटल पत्रिका अंक 16 प्रकाशित हुआपूर्व के अंकों की तरह पत्रिका का 16वां अंक प्रकाशित हो गया है। इसमें तोलोंग सिकि लिपि में रोचक सामग्री शामिल किये गय हैं। आशा है अन्य अंकों की तरह इस अंक को भी आपका भरपूर प्यार मिलेगा। इसे आप इस पन्ने पर देख सकते हैं। आप चाहें तो इसे अपने पीसी या मोबाइल में… Read more: Kurukh Times की डिजिटल पत्रिका अंक 16 प्रकाशित हुआ
