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Articles by authors
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तोलोंग सिकि तोड़पाब (वर्णमाला) पर कुँड़ुख़ बाल कविता
तोलोंग सिकि तोड़पाब (वर्णमाला) पर श्री बिमल टोप्पो की कुँड़ुख़ बाल कविता का देवनागरी एवं तोलोंग सिकि में लिप्यान्तरण तोलोंग सिकि तोड़पाब (वर्णमाला) पर श्री बिमल टोप्पो की कुँड़ुख़ बाल कविता का देवनागरी एवं तोलोंग सिकि में लिप्यान्तरण तोलोंग सिकि तोड़पाब (वर्णमाला) पर श्री बिमल टोप्पो की कुँड़ुख़ बाल कविता का देवनागरी एवं तोलोंग सिकि…
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ए:न ओन्टा मड़ा (मैं एक लाश) कुँड़ुख़ कविता तोलोंग सिकि में

नेड्डा 28/5/21 उल्लाA मंग्गeर गे “जनजाति दर्पण” पत्रिका (कोलकाता) तरती वेबिनार ही सराजमा नंज्जतका नु कुँड़ुख़ कविता पाठ मंज्जा. अइय्या प्रतिभागी मनर सय बिमल टोप्पोणस ही कुँड़ुख़ कत्थ(डण्डीट (कविता) बँचतारा, आद बिमल भईयोस ही गछरना दरा आइनका ती‚ बचउर गे तोलोंग सिकि नु सिकिजुमा (लिप्युन्तआरण) ननर चिपतारकी बि’ई। ए:न ओन्टा मड़ा—————————- ए:न ओन्टा मड़ा हिकदन, मूँध…
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भाषा और लिपि, मानव विकास के लिए अनमोल रत्न

भाषा और लिपि, मानव विकास के लिए अनमोल रत्न से भी ज्यादा कीमती है। लिपि, भाषा की प्राण होती है। समाज, मानव समूह का सुरक्षा कवक्ष होता है। इन तीन चीजों के बाद विकास की संभावनाओं पर तथा समाज के विकास की सफलता और विफलता पर चर्चा किया जा सकता है। ईसा से हजारों सालों…
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नई शिक्षा नीति 2020 का मातृभाषा शिक्षा पर कुँड़ुख़ समाज की तैयारी

ज्ञात हो कि केन्द्रा सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति 2020 लागू कर दिया गया है। इसके अन्त र्गत भाषा विषयों में से मातृभाषा को प्राथमिक स्तयर पर विशेष महत्वक दिया गया है। झारखण्डो सरकार द्वारा, एकीकृत बिहार का वर्ष 1976 की नियमावली (शिक्षा का माध्योम विषयक नियमावली) को कड़ाई से लागू करने का बात कहा…
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डॉ मिंज का निधन कुड़ुंख समाज के लिए अपूरणीय क्षति है : जिता उरांव

कुड़ुंख भाषा साहित्य के पुरोधा एवं आधार स्तम्भ डॉ निर्मल मिंज 5 मई 2021 को हमारे बीच से सदा लिये जुदा हो गए। इस तरह अचानक उनका जाना हम कुड़ुख समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है। वे एक कुशल समाज सुधारक, धर्म अगुआ एवं पिछड़े तथा शोषित वर्ग के अग्रगण्य पथ प्रदर्शक थे। विशेषकर…
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झारखंडी शिक्षाविद् डॉ निर्मल मिंज जिन्होंने आदिवासी भाषाओं को पढ़ने पढ़ाने का मौका दिया

यह सत्तर के बाद का समय था, जब डॉ. निर्मल मिंजअक्सर संत जेवियर कॉलेज आते-जाते दिखाई पड़ते थे. उनके बारे जानकारी मिलती थी-अनुशासनप्रियके साथ-साथ झारखंड के भाषा संस्कृति के विकास के लिए उत्सुक हैं.यही कारण था कि झारखंड में नौ झारखंडी भाषाओं की पढ़ाई अपने कॉलेज में शुरू करने का साहस एवं दूरदरर्शी निर्णय उन्होंने…
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आदिवासी त्यौहार मनते रहें … ताकि धरती की उर्वरता, निर्मलता बची रहे !

आज संपूर्ण विश्व में आदिवासियों के जीवन-व्यवहार, पर्व-त्यौहार, इतिहास, भोजन, रहन-सहन और भाषा, संस्कृति का अध्ययन किया जा रहा है. ऐसा नहीं है कि पहले इनका अध्ययन नहीं किया जा रहा था. यूरोपीय मानव-विज्ञानइन्हें कभी सब-ह्यूमन कह रहा था और लोग इनके नरभक्षी होने, इनकी निर्वस्त्रता, निरक्षरता, गरीबी, विचित्रता को कौतुहलवश देख रहे थे, उन्हें…
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अनेक बाधाओं के बावजूद कीर्तिमान की मुख्य धारा में गोते लगा रहे हैं आदिवासी

जब हम आदिवासी युवाओं की ओर देखते हैं तो लगता है उनके सामने बाधाओं की गहरी खाई और कंटीली राह खड़ी कर दी गई है। पढ़ने-लिखने, छात्रवृत्ति, नौकरी, आरक्षण से लेकर भाषा, संस्कृति, धर्म, जीवन-शैली, खान-पान, रहन-सहन, वेश-भूषा आदि को लेकर इनके सामने इतने प्रश्न और समस्याएं खड़ी कर दी जाती हैं बेचारे का माथा…
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कुँड़ुख पेंटिंग को नवजीवन देती – कलाकार सुमन्ती उराँव

यूँ कलाकार और कला की कोई सीमा नहीं। लेकिन जब कोई कलाकार लगभग लुप्त हो गई किसी कला को पुनर्जीवित कर देता कलाकार समाज और कला जगत के लिए विशिष्ट हो जाता है। ऐसी ही एक कलाकार है सुमन्ती देव भगत, जो भोपाल में रहती हैं। सुमन्ती ने अपनी वेश-भूषा तक को उराँव संस्कृति के…
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कुँडुख भाषा की लिपि : तोलोंग सिकि

कुँडुख भाषा की लिपि : तोलोंग सिकि तोलोंग सिकि एक लिपि है। यह लिपि, भारतीय आदिवासी आंदोलन तथा झारखण्ड का छात्र आंदोलन की देन है। इस लिपि को आदिवासी कुंडुख (उराँव) समाज ने अपनी भाषा की लिपि के रूप में स्वीकार किया और पठन-पाठन में शामिल कर लिया है। इस लिपि के प्रारूपण में मध्य…
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- वर्षा अच्छी होगी इस साल : गजेन्द्र उरांवयह विडियो आदिवासी समाज से अर्जित ज्ञान के तरीके से मौसम भविष्यवाणी कर्ता श्री गजेन्द्र उरांव, उम्र 64 वर्ष, ग्राम सैन्दा, थाना सिसई जिला गुमला द्वारा दिनांक 24.05.2026 को शूट किया गया साक्षात्कार है। इस प्रकार का मौसम भविष्यवाणी, बाबा गजेन्द्र उरांव द्वारा विगत 12 वर्षों से किया जा रहा है। बाबा गजेन्द्र उरांव धान… Read more: वर्षा अच्छी होगी इस साल : गजेन्द्र उरांव
- उरांव लोकजीवन, लोककथाथा, लोकसाहित्य एवं उरांव इतिहासयह फोटो लातेहार जिले के महुआ टांड़ प्रखंड के अन्तर्गत बुढ़ा नदी ऊर्फ पचगी ख़ाड़ नदी, बोहटा नदी एवं ओरंगा नदी, सुगाबांध स्थान पर मिलकर सोन एवं गंगा में जाकर मिलती है। इसी तरह ओड़ंगा अंड़िया, कांस, परास, बंकी नदी दक्षिणी कोयल नदी के रूप में कारो एवं शंख नदी एक साथ बहते हुए राउरकेला… Read more: उरांव लोकजीवन, लोककथाथा, लोकसाहित्य एवं उरांव इतिहास
- KURUX PHONETIC READER कुड़ुख़ भाषा एवं व्याकरण को समझने के लिएयह पुस्तक KURUX PHONETIC READER के नाम से मई 1985 में CIIL MYSORE द्वारा प्रकाशित हुआ है। इसका प्रथम संस्करण का समय, 40 वर्ष एवं 10 महीने से अधिक है। आदिवासी भाषा में शोध कर रहे शोधकर्ताओं द्वारा इस पुस्तक की मांग को देखते हुए कुड़ुख़ भाषा विज्ञान की इस आधार स्तंभ पुस्तक को सामान्य… Read more: KURUX PHONETIC READER कुड़ुख़ भाषा एवं व्याकरण को समझने के लिए
- जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच का स्थापना दिवस संपन्नदिनांक 01.04.2026, दिन बुधवार को जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच का स्थापना दिवस फादर कामिल बुल्के पथ रांची में स्थित सत्यभारती के सभागार में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर नए अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चयन किया गया। समारोह में रांची विश्वविद्यालय के नागपुरी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. वीरेंद्र महतो को मंच का अध्यक्ष… Read more: जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच का स्थापना दिवस संपन्न
- कुड़ुख़ टाइम्स का 17वां अंक प्रकाशित हुआकुड़ुख़ टाइम्स का 17वां अंक आप पाठकों के सामने है। यह अंक अपने नये स्वरूप में आप पाठकों के लिए रोचक होगा। कुड़ुख़ संस्कृति एवं नेगचार को असम के डिब्रूगढ़ क्षेत्र में रहने वाले उरांव लोगों को जानिए। साथ ही तमिल-भाषी डॉ स्टीफन जी द्वारा इतिहास के पन्नों पर शोध परक लेख देखने को मिलेगा।… Read more: कुड़ुख़ टाइम्स का 17वां अंक प्रकाशित हुआ