Write Ups

Articles by authors

  • कुँड़ख़र ही कुड़ा-मोःख़ा सिखिरना अरा सिखाबअ़ना

    कुँड़ख़र ही कुड़ा-मोःख़ा सिखिरना अरा सिखाबअ़ना

    कुँड़ख़र ही कुड़ा-मोःख़ा सिखिरना अरा सिखाबअ़नाबअ़नर – हुल्लो परिया नु कुँड़ुख़ पुरखर टोड़ंग-परता अरा नाल-झरिया अबड़ा गने रअ़नुम नमन बछाबाःचर। आ बेड़ा नु कन्दा-ख़ंजपा गुट्ठिन बेगर बीःतकम मोःख़ा लगियर। अहड़न हूँ ख़ेःनम मोःख़ा लगियर। कूल गे कीःड़ा लग्गो दिम अरा जिया गे अम्म ओनका लग्गो दिम। अवंगे कूल-कीःड़ा अरा अम्म ओनकन मेटाबआ गे टोड़ंग परता

    Read More

  • कुंड़ुख़ भाषा में पहेलियों का प्रयोग

    कुंड़ुख़ भाषा में पहेलियों का प्रयोग

    कुंड़ुख़ भाषा में पहेलियों का प्रयोग बखुबी होता है। बच्चों के लिए यह बौदि्धक एवं भाषा विकास का एक अनोखा तरीका है जिसे समाज में बच्चों को सिखलाया जाता है। आइये इसे जाने :–कुँड़ुख़ कत्थाu बुझवईल (उराँव भाषा में पहेलियाँ)1. एन्देर अमख़ी नानी, अम्म सिम्बी  नत्ती,  एन्दरा हिके ?  –  इंज्जो अमख़ी। 2. अतख़ा खसखस, ख़ंजपा

    Read More

  • महिलाओं को बैशाखी नहीं समाज का स्तंम्भ समझें

    महिलाओं को बैशाखी नहीं समाज का स्तंम्भ समझें

    आदिवासी मातृशक्ति अपने बच्चे को अपना ‘दूध’ नहीं बल्कि अपना  ‘रक्त’ का स्तन पान करवाती है ताकि खून में उबाल रहे यही उबाल समाज के प्रति जुनून पैदा कर बिरसा बनाती हैं। झारखंड की मातृशक्ति का कोख इतनी शक्तिशाली है कि हर सदी में एक जननायक पैदा की हैं। आज मेरे मातृशक्ति को ये अह्वान

    Read More

  • संस्कृति को बचाने के लिए ज़रूरी है भाषा को बचाना – जसिंता केरकेट्टा

    संस्कृति को बचाने के लिए ज़रूरी है भाषा को बचाना – जसिंता केरकेट्टा

    किसी भी समाज की संस्कृति के बचे रहने के लिए उसकी अपनी भाषा का बचा होना ज़रूरी है। भाषा के बिना कैसे अपनी संस्कृति को बचाने की बात हो सकती है? भाषा अपनी संस्कृति को अभिव्यक्त करने का माध्यम तो होती ही है, वह एक शक्तिशाली सांस्कृतिक हथियार भी होती है। किसी समाज को ख़त्म

    Read More

  • नयी शिक्षा नीति और मातृभाषाएं

    नयी शिक्षा नीति और मातृभाषाएं

    महात्मा गांधी ने 20 अक्टूबर, 1917 को गुजरात के भड़ौच में एक शिक्षा सम्मेलन में कहा था – “विदेशी भाषा द्वारा शिक्षा पाने में दिमाग पर जो बोझ पड़ता है, वह असह्य है। यह बोझ हमारे बच्चे उठा तो सकते हैं, लेकिन उसकी कीमत हमें चुकानी पड़ती है, वे दूसरा बोझ उठाने लायक नहीं रह

    Read More

  • गुमला,  घाघरा के पुटो तिलसीरी में तैयार है कुड़ुख-अंग्रेजी स्कूल

    गुमला,  घाघरा के पुटो तिलसीरी में तैयार है कुड़ुख-अंग्रेजी स्कूल

    गुमला जिला (झारखंड) के घाघरा प्रखंड के पुटो स्थिति तिलसिरी ग्राम में तैयार हो गया है कुड़ुख-अंग्रेजी स्कूल। स्कूल का निर्माण लिटीवीर फाउण्डेशन फॉर एज्युकेशन, एग्रीकल्चर, तिलसीरी, घाघरा द्वारा किया गया है। तिलसीरी गाँव में स्थिति इस स्कूल के लिए स्व. जहाँजिया ऊराँव, तिलसीरी के परिवार ने करीबन 8 एकड़ जमीन दान में दिया है।

    Read More

  • नई सोच के साथ विश्व आदिवासी दिवस: 9 अगस्त 2021 का अनुपालन

    नई सोच के साथ विश्व आदिवासी दिवस: 9 अगस्त 2021 का अनुपालन

    ” झारखंड बचेगा तो बृहद झारखंड और भारत के आदिवासी बचेंगे। अतः अब बृहद झारखंड बनाने की सोच से ज्यादा जरूरी है बृहद झारखंड अर्थात बंगाल, बिहार, उड़ीसा, आसाम, छत्तीसगढ़ और झारखंड आदि के आदिवासियों को मिलकर झारखंड को बचाने और समृद्ध करने का संकल्प और कार्य योजना बनाकर मैदान में उतर जाने का। चूँकि

    Read More

  • सय बिमल टोप्पो की चाय बगान पर कुँड़ुख़ कविता तोलोंग सिकि एवं देवनागरी लिपि में

    सय बिमल टोप्पो की चाय बगान पर कुँड़ुख़ कविता तोलोंग सिकि एवं देवनागरी लिपि में

    जुलूस ही मुंधवारे केरकन ख़इक्खकन गा डण्डा. नीःदी कूल चिचयारकन इन्कलाब ही डण्डी किर्र बरच एःरदन एड़पा नू मल्ला से गा मण्डी. राशन मल्ला तनखा मल्ला, मल्ला तो बोनस ओन्ना मल्ला अत्तना मल्ला मंजा सरबनास. ख़द्द चीं’ख़ी, मुक्का चीं’ख़ी‚ एःरर कट्टू नीःदी एन्दरा ईदिम तली बगनियर ही असल आजादी ?.. लॉक आउट मइया तंगियो तितिल बितिल पईरिम पईरी बगान ता भें’रे

    Read More

  • सय बिमल टोप्पो की कुँड़ुख़ कविता तोलोंग सिकि एवं देवनागरी लिपि में

    सय बिमल टोप्पो की कुँड़ुख़ कविता तोलोंग सिकि एवं देवनागरी लिपि में

    हाथी हाथी ! हाथी ! हाथी ! इदा हाथी, अदा हाथी इसन हाथी असन हाथी सगरे दुनिया नू हाथी मुंधवारे हाथी, ख़ोख़ा हाथी पईरी न पुतबारी हाथी टोड़ंग नू हाथी, पद्दा नू हूं हाथी लुका ओदआ, फटका चो’ड़ताअ़आ ब’आ – हटो बबा, बुढ़ा बबा पीछे हटो गनेस बबा. (गणेश)   हाथीहाथी ! हाथी ! हाथी !इदा हाथी, अदा हाथीइसन हाथी असन हाथी  सगरे दुनिया

    Read More

  • कुलदीप तिग्गा की कुंड़ुख़ कविता : देवनागरी लिपि एवं तोलोंग सिकि में

    कुलदीप तिग्गा की कुंड़ुख़ कविता : देवनागरी लिपि एवं तोलोंग सिकि में

    jingi| Bair bipaiq dahrejingi| gA niMwirkA mal rahcA,jingi| nu kayno dahre rahcA,jingi| nu beMkko dahre rahcA,bipaiq qi kiyyA-mayYA niMwirkA,paheE ibzA jingi| gahi soBnA.ak|un qA bezA nAm ekA qarA kA:loq,barnA bezA nAm ekA se uj|oq,akkun qA bezA nAm ujjA kA:loq,barnA bezA nAm soJ kA:loq,ekA bezA eQerLo ujjnA dahre.i bezA soJ dahre kA:loq,barA e:kqe De:r gecCA kA:loq,jingi|

    Read More

Latest Posts