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Tribal society of jharkhand & their community music

झारखंड का आदिवासी समाज और भाव विभोर करनेवाले उनके कोरस संगीत! .. जरूर सुनिये..
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आदिवासियों के सवालों पर चुप्पी क्यों?

भारत जैसे महादेश में आज आदिवासियत पर विमर्श अपरिहार्य है। वास्तव में यह केवल अस्मिता अथवा अधिकारों का मसला मात्र नहीं है – आदिवासियत की प्रासंगिकता उन तमाम संदर्भों से भी है, जो आदिवासी समाज के संपन्नता से विपन्नता तक के संक्षिप्त इतिहास में आज कहीं जाहिर-अजाहिर तौर पर दर्ज हैं। सरकारों के लिये आदिवासियत…
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प्रकृति और पर्यावरण के लिए क्या महत्व रखता है आदिवासियों का सरना धर्म

देश में लंबे समय से आदिवासी समाज अपनी अलग धार्मिक पहचान की मांग करता आया है। झारखंड इस मांग का केंद्र रहा है और हाल के दिनों में यहां इस मांग ने जोर भी पकड़ा है। यही वजह है कि झारखंड के गठन के बाद पहली बार राज्य सरकार आदिवासियों के लिए अलग से धर्मावलंबी…
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पर्यावरण सिद्धांतों का उल्लंघन दरअसल मानवाधिकार हनन का मसला है

वर्तमान पीढ़ी का भावी पीढ़ियों के प्रति अनेक मानवीय दायित्व हैं जो दुनिया सहित भारत में पर्यावरण से संबंधित कानूनों और पर्यावरण प्रभाव के आकलन का बुनियादी वैज्ञानिक-दर्शन है। इस वैज्ञानिक दर्शन पर प्रतिपादित सिद्धांतों के अनुसार पर्यावरण प्रभाव के आकलन, कुछ महत्वपूर्ण आधार स्तंभों पर टिके हैं जो भावी पीढ़ियों के अधिकारों का प्रतिनिधित्व…
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झारखंड के लोक संगीत का आनंद लीजिए!

झारखंड के लोक संगीत का आनंद लीजिए! Enjoy the folk music of Jharkhand!
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लॉकडाउन समाप्ति के बाद अब 11 राज्यों में भूख की समस्या, आदिवासी-कमजोर वर्ग शिकंजे में : हंगर वॉच सर्वे

नई दिल्ली: कोविड-19 महामारी के चलते लगाए गए देशव्यापी लॉकडाउन के खत्म होने के पांच महीने बाद भी गरीबों और समाज के हाशिए पर रहने वाले लोगों के बीच भुखमरी की समस्या गंभीर बनी हुई है। भोजन का अधिकार अभियान द्वारा कुछ गैर-सरकारी संगठनों के साथ प्रकाशित ‘हंगर वॉच’ रिपोर्ट के मुताबिक देश के कम से…
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दुमका में आदिवासी महिला के साथ गैंगरेप, विपक्ष ने सोरेन सरकार को घेरा

रांची: झारखंड की उप राजधानी दुमका में आदिवासी महिला के गैंग रेप का मामला आक्रोशित करनेवाला है। एक महिला के साथ 17 लोगों ने गैंगरेप किया था। अंधेरा होने की वजह से महिला केवल एक आरोपी को पहचान पायी। उसने आरोपी का नाम रामू मोहली बताया। वह पीड़िता के गांव का ही रहने वाला है।…
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मेघालयः लंबित वेतन के लिए हज़ारों स्कूल शिक्षकों ने प्रधानमंत्री को पोस्टकार्ड भेजा

मेघालय के हजारों स्कूली शिक्षकों ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पोस्टकार्ड भेजकर केंद्र सरकार के समग्र शिक्षा अभियान (एसएसएए) मिशन के तहत शिक्षकों का वेतन जारी करने में हस्तक्षेप करने की मांग की। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षकों का वेतन पिछले पांच महीने से लंबित है। स्कूली शिक्षकों के संगठन का…
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22 पड़हा ग्रामसभा बिसुसेन्दरा 2020 का घोषणा पत्र

जैसा कि हम सभी जानते हैं – भारतीय संविधान के निर्माण से पूर्व, भारत में बहुत से राष्ट्र, प्रदेश एवं कबिलार्इ समूह स्वतंत्र रूप से गुजर-बसर कर रहे थे। देश की आजादी के पश्चात् नये जीवन की तरह भारतीय संविधान का निर्माण हुआ और वे सभी पुराने दल एक झण्डे के नीचे आ गये। इस…
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क्या है सरना धर्म ?

सरना धर्म क्या है ? यह दूसरे धर्मों से किन मायनों में जुदा है ? इसका केन्द्रीय आर्दा और र्दान क्या है? अक्सर इस तरह के सवाल पूछे जाते हैं। कर्इ सवाल सचमुच जिज्ञााा के पुट लिए होते हैं और कर्इ बार इसे दृारारती अंदाज में भी पूछा जाता है, कि गोया तुम्हारा तो कोर्इ…
Latest Posts
- कुड़ुख़ भाषा आंदोलन के अग्रदूत व लापुंग के समाजसेवी एवं सरन उरांव को अंतिम विदाईरांची/लापुंग, 16 जून 2026। लापुंग थाना क्षेत्र के माड़ी दरमी टोली निवासी एवं कुड़ुख़ भाषा-संस्कृति के संरक्षण के लिए समर्पित वरिष्ठ समाजसेवी श्री सरन उरांव का 77 वर्ष की आयु में निधन हो गया। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे श्री उरांव ने 14 जून 2026 की सुबह 7 बजे अंतिम सांस ली। उन्हें 15… Read more: कुड़ुख़ भाषा आंदोलन के अग्रदूत व लापुंग के समाजसेवी एवं सरन उरांव को अंतिम विदाई
- वर्षा अच्छी होगी इस साल : गजेन्द्र उरांवयह विडियो आदिवासी समाज से अर्जित ज्ञान के तरीके से मौसम भविष्यवाणी कर्ता श्री गजेन्द्र उरांव, उम्र 64 वर्ष, ग्राम सैन्दा, थाना सिसई जिला गुमला द्वारा दिनांक 24.05.2026 को शूट किया गया साक्षात्कार है। इस प्रकार का मौसम भविष्यवाणी, बाबा गजेन्द्र उरांव द्वारा विगत 12 वर्षों से किया जा रहा है। बाबा गजेन्द्र उरांव धान… Read more: वर्षा अच्छी होगी इस साल : गजेन्द्र उरांव
- उरांव लोकजीवन, लोककथाथा, लोकसाहित्य एवं उरांव इतिहासयह फोटो लातेहार जिले के महुआ टांड़ प्रखंड के अन्तर्गत बुढ़ा नदी ऊर्फ पचगी ख़ाड़ नदी, बोहटा नदी एवं ओरंगा नदी, सुगाबांध स्थान पर मिलकर सोन एवं गंगा में जाकर मिलती है। इसी तरह ओड़ंगा अंड़िया, कांस, परास, बंकी नदी दक्षिणी कोयल नदी के रूप में कारो एवं शंख नदी एक साथ बहते हुए राउरकेला… Read more: उरांव लोकजीवन, लोककथाथा, लोकसाहित्य एवं उरांव इतिहास
- KURUX PHONETIC READER कुड़ुख़ भाषा एवं व्याकरण को समझने के लिएयह पुस्तक KURUX PHONETIC READER के नाम से मई 1985 में CIIL MYSORE द्वारा प्रकाशित हुआ है। इसका प्रथम संस्करण का समय, 40 वर्ष एवं 10 महीने से अधिक है। आदिवासी भाषा में शोध कर रहे शोधकर्ताओं द्वारा इस पुस्तक की मांग को देखते हुए कुड़ुख़ भाषा विज्ञान की इस आधार स्तंभ पुस्तक को सामान्य… Read more: KURUX PHONETIC READER कुड़ुख़ भाषा एवं व्याकरण को समझने के लिए
- जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच का स्थापना दिवस संपन्नदिनांक 01.04.2026, दिन बुधवार को जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच का स्थापना दिवस फादर कामिल बुल्के पथ रांची में स्थित सत्यभारती के सभागार में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर नए अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चयन किया गया। समारोह में रांची विश्वविद्यालय के नागपुरी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. वीरेंद्र महतो को मंच का अध्यक्ष… Read more: जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच का स्थापना दिवस संपन्न