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पर्यावरण सिद्धांतों का उल्लंघन दरअसल मानवाधिकार हनन का मसला है

वर्तमान पीढ़ी का भावी पीढ़ियों के प्रति अनेक मानवीय दायित्व हैं जो दुनिया सहित भारत में पर्यावरण से संबंधित कानूनों और पर्यावरण प्रभाव के आकलन का बुनियादी वैज्ञानिक-दर्शन है। इस वैज्ञानिक दर्शन पर प्रतिपादित सिद्धांतों के अनुसार पर्यावरण प्रभाव के आकलन, कुछ महत्वपूर्ण आधार स्तंभों पर टिके हैं जो भावी पीढ़ियों के अधिकारों का प्रतिनिधित्व
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झारखंड के लोक संगीत का आनंद लीजिए!

झारखंड के लोक संगीत का आनंद लीजिए! Enjoy the folk music of Jharkhand!
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लॉकडाउन समाप्ति के बाद अब 11 राज्यों में भूख की समस्या, आदिवासी-कमजोर वर्ग शिकंजे में : हंगर वॉच सर्वे

नई दिल्ली: कोविड-19 महामारी के चलते लगाए गए देशव्यापी लॉकडाउन के खत्म होने के पांच महीने बाद भी गरीबों और समाज के हाशिए पर रहने वाले लोगों के बीच भुखमरी की समस्या गंभीर बनी हुई है। भोजन का अधिकार अभियान द्वारा कुछ गैर-सरकारी संगठनों के साथ प्रकाशित ‘हंगर वॉच’ रिपोर्ट के मुताबिक देश के कम से
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दुमका में आदिवासी महिला के साथ गैंगरेप, विपक्ष ने सोरेन सरकार को घेरा

रांची: झारखंड की उप राजधानी दुमका में आदिवासी महिला के गैंग रेप का मामला आक्रोशित करनेवाला है। एक महिला के साथ 17 लोगों ने गैंगरेप किया था। अंधेरा होने की वजह से महिला केवल एक आरोपी को पहचान पायी। उसने आरोपी का नाम रामू मोहली बताया। वह पीड़िता के गांव का ही रहने वाला है।
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मेघालयः लंबित वेतन के लिए हज़ारों स्कूल शिक्षकों ने प्रधानमंत्री को पोस्टकार्ड भेजा

मेघालय के हजारों स्कूली शिक्षकों ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पोस्टकार्ड भेजकर केंद्र सरकार के समग्र शिक्षा अभियान (एसएसएए) मिशन के तहत शिक्षकों का वेतन जारी करने में हस्तक्षेप करने की मांग की। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षकों का वेतन पिछले पांच महीने से लंबित है। स्कूली शिक्षकों के संगठन का
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22 पड़हा ग्रामसभा बिसुसेन्दरा 2020 का घोषणा पत्र

जैसा कि हम सभी जानते हैं – भारतीय संविधान के निर्माण से पूर्व, भारत में बहुत से राष्ट्र, प्रदेश एवं कबिलार्इ समूह स्वतंत्र रूप से गुजर-बसर कर रहे थे। देश की आजादी के पश्चात् नये जीवन की तरह भारतीय संविधान का निर्माण हुआ और वे सभी पुराने दल एक झण्डे के नीचे आ गये। इस
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क्या है सरना धर्म ?

सरना धर्म क्या है ? यह दूसरे धर्मों से किन मायनों में जुदा है ? इसका केन्द्रीय आर्दा और र्दान क्या है? अक्सर इस तरह के सवाल पूछे जाते हैं। कर्इ सवाल सचमुच जिज्ञााा के पुट लिए होते हैं और कर्इ बार इसे दृारारती अंदाज में भी पूछा जाता है, कि गोया तुम्हारा तो कोर्इ
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झारखंड आंदोलन की देन है तोलोंग सिकि लिपि

तोलोंग सिकि कुड़ुख आदिवासी भाषा की लिपि की विकास यात्रा ने एक नयी पीढ़ी तक का सफर तय कर लिया है । 28 वर्षों यह सफर एक कठिन यात्रा की तरह पूरी हुई है। आज भी यह सफर अपनी मंजिल पूरी नहीं कर पाया है परंतु तोलोंग सिकि को आधुनिक भाषा लिपि के रूप में सामाजिक मान्यता
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भाषा, मानव विकास के लिए अनमोल रत्न

ईशा से हजारों सालों पूर्व में भी मानव सभ्यता थी और र्इसा के बाद 2018 र्इ के बीत जाने के बाद भी मानव समुदाय और समाज का विकास के बीच एक अत्यन्त ही गम्भीर और ज्वलंत भय सा बना हुआ है। पूरी दुनियाँ विकास की बात से जुड़ी हुर्इ हैं। कर्इ देा विकसित हो गए
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बरा घोखदत का – कुंडुखर गहि, एज्जरना एकासे परदा उंगी?

हमारी सामाजिक एकता टूट रही है क्योंकि – 1.आज हमारी पड़हा,धुमकड़िया,अखड़ा, चाला-टोंका, पंचा, मदाइत, कोहा-बेंज्जा,कुंडी आदि की समृद्ध परंपरा छिन्न-भिन्न हो गई है. फलतः,समाज के सभी लोगों को जोड़े ऱखने की जो एकजुट, मजबूत पुरखा परंपरा कायम थी, वह कड़ी व सामाजिक एकजुटता की लय कहीं टूट गई लगती है.ऐसी हालत में अब हम क्या कर
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- KURUX PHONETIC READER कुड़ुख़ भाषा एवं व्याकरण को समझने के लिएयह पुस्तक KURUX PHONETIC READER के नाम से मई 1985 में CIIL MYSORE द्वारा प्रकाशित हुआ है। इसका प्रथम संस्करण का समय, 40 वर्ष एवं 10 महीने से अधिक है। आदिवासी भाषा में शोध कर रहे शोधकर्ताओं द्वारा इस पुस्तक की मांग को देखते हुए कुड़ुख़ भाषा विज्ञान की इस आधार स्तंभ पुस्तक को सामान्य… Read more: KURUX PHONETIC READER कुड़ुख़ भाषा एवं व्याकरण को समझने के लिए
- जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच का स्थापना दिवस संपन्नदिनांक 01.04.2026, दिन बुधवार को जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच का स्थापना दिवस फादर कामिल बुल्के पथ रांची में स्थित सत्यभारती के सभागार में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर नए अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चयन किया गया। समारोह में रांची विश्वविद्यालय के नागपुरी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. वीरेंद्र महतो को मंच का अध्यक्ष… Read more: जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच का स्थापना दिवस संपन्न
- कुड़ुख़ टाइम्स का 17वां अंक प्रकाशित हुआकुड़ुख़ टाइम्स का 17वां अंक आप पाठकों के सामने है। यह अंक अपने नये स्वरूप में आप पाठकों के लिए रोचक होगा। कुड़ुख़ संस्कृति एवं नेगचार को असम के डिब्रूगढ़ क्षेत्र में रहने वाले उरांव लोगों को जानिए। साथ ही तमिल-भाषी डॉ स्टीफन जी द्वारा इतिहास के पन्नों पर शोध परक लेख देखने को मिलेगा।… Read more: कुड़ुख़ टाइम्स का 17वां अंक प्रकाशित हुआ
- कुडुख़ भाषा की लिपि “तोलोड सिकि” में कुडुख़ प्रवेशिका पुस्तक “अयंग कोंयछा” प्रकाशितकुडुख़ भाषा की लिपि “तोलोड सिकि” में कुडुख़ प्रवेशिका पुस्तक “अयंग कोंयछा” केतृतीय संस्करण के प्रकाशन पर मुझे एक विशिष्ट उर्जा की अनुभूति हो रही है। मैं अपने छात्र जीवनके समय में वर्ष 1989 में कुडुख़ समाज की स्थिति के बारे विचार करते हुए कुडुख़ भाषा एवं संस्कृतिके संरक्षण तथा संवर्द्धन हेतु कार्य करने का… Read more: कुडुख़ भाषा की लिपि “तोलोड सिकि” में कुडुख़ प्रवेशिका पुस्तक “अयंग कोंयछा” प्रकाशित
- Kurukh Times की डिजिटल पत्रिका अंक 16 प्रकाशित हुआपूर्व के अंकों की तरह पत्रिका का 16वां अंक प्रकाशित हो गया है। इसमें तोलोंग सिकि लिपि में रोचक सामग्री शामिल किये गय हैं। आशा है अन्य अंकों की तरह इस अंक को भी आपका भरपूर प्यार मिलेगा। इसे आप इस पन्ने पर देख सकते हैं। आप चाहें तो इसे अपने पीसी या मोबाइल में… Read more: Kurukh Times की डिजिटल पत्रिका अंक 16 प्रकाशित हुआ