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  • KURUX PHONETIC READER कुड़ुख़ भाषा एवं व्याकरण को समझने के लिए

    KURUX PHONETIC READER कुड़ुख़ भाषा एवं व्याकरण को समझने के लिए

    यह पुस्तक KURUX PHONETIC READER के नाम से मई 1985 में CIIL MYSORE द्वारा प्रकाशित हुआ है। इसका प्रथम संस्करण का समय, 40 वर्ष एवं 10 महीने से अधिक है। आदिवासी भाषा में शोध कर रहे शोधकर्ताओं द्वारा इस पुस्तक की मांग को देखते हुए कुड़ुख़ भाषा विज्ञान की इस आधार स्तंभ पुस्तक को सामान्य

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  • जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच का स्थापना दिवस संपन्न

    जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच का स्थापना दिवस संपन्न

    दिनांक 01.04.2026, दिन बुधवार को जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच का स्थापना दिवस फादर कामिल बुल्के पथ रांची में स्थित सत्यभारती के सभागार में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर नए अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चयन किया गया। समारोह में रांची विश्वविद्यालय के नागपुरी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. वीरेंद्र महतो को मंच का अध्यक्ष

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  • कुड़ुख़ टाइम्स का 17वां अंक प्रकाशित हुआ

    कुड़ुख़ टाइम्स का 17वां अंक प्रकाशित हुआ

    कुड़ुख़ टाइम्स का 17वां अंक आप पाठकों के सामने है। यह अंक अपने नये स्वरूप में आप पाठकों के लिए रोचक होगा। कुड़ुख़ संस्कृति एवं नेगचार को असम के डिब्रूगढ़ क्षेत्र में रहने वाले उरांव लोगों को जानिए। साथ ही तमिल-भाषी डॉ स्टीफन जी द्वारा इतिहास के पन्नों पर शोध परक लेख देखने को मिलेगा।

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  • कुडुख़ भाषा की लिपि “तोलोड सिकि” में कुडुख़ प्रवेशिका पुस्तक “अयंग कोंयछा” प्रकाशित

    कुडुख़ भाषा की लिपि “तोलोड सिकि” में कुडुख़ प्रवेशिका पुस्तक “अयंग कोंयछा” प्रकाशित

    कुडुख़ भाषा की लिपि “तोलोड सिकि” में कुडुख़ प्रवेशिका पुस्तक “अयंग कोंयछा” केतृतीय संस्करण के प्रकाशन पर मुझे एक विशिष्ट उर्जा की अनुभूति हो रही है। मैं अपने छात्र जीवनके समय में वर्ष 1989 में कुडुख़ समाज की स्थिति के बारे विचार करते हुए कुडुख़ भाषा एवं संस्कृतिके संरक्षण तथा संवर्द्धन हेतु कार्य करने का

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  • Kurukh Times की डिजिटल पत्रिका अंक 16 प्रकाशित हुआ

    Kurukh Times की डिजिटल पत्रिका अंक 16 प्रकाशित हुआ

    पूर्व के अंकों की तरह पत्रिका का 16वां अंक प्रकाशित हो गया है। इसमें तोलोंग सिकि लिपि में रोचक सामग्री शामिल किये गय हैं। आशा है अन्‍य अंकों की तरह इस अंक को भी आपका भरपूर प्‍यार मिलेगा। इसे आप इस पन्‍ने पर देख सकते हैं। आप चाहें तो इसे अपने पीसी या मोबाइल में

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  • KurukhTimes Magazine Vol 18 published

    KurukhTimes Magazine Vol 18 published

    कुडुख़ (उरांव) समुदाय भारत की एक ऐसी आदिम नष्वंषविज्ञान पहचान है, जिसका इतिहास गौरव, संघर्श और निरंतर प्रवास का मिश्रण रहा है। इस समुदाय की ऐतिहासिक जड़ों और दक्षिण से उत्तर भारत की ओर उनके विस्थापन का प्रमाणिक विवरण श्री योगेश्वर उरांव (असम राज्य वित्त सलाहकार) की शोधपरक पुस्तक “उरांवों के दक्षिण से उत्तर भारत

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  • KurukhTimes Magazine Vol 15 Published

    KurukhTimes Magazine Vol 15 Published

    संस्कृत, हिन्दी एवं कुँडुख़ भाषा की ध्वनियाँ (एक तुलनात्मक अध्ययन) : यद्यपि संस्कृत, हिन्दी एवं कुँडुख़ भाषा की ध्वनियों का तुलनात्मक अध्ययन एक जटिल विषय हैतथापि इन भाषाओं में उच्चरित ध्वनियों एवं इन ध्वनियों को लिखने के तरीकों को वर्तमान तकनीक के आधार पर इसके गुण-दोषों को इस शीर्षक के माध्यम से प्रस्तुत करने का

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  • KurukhTimes.com बेबसाईट की पुनः प्रस्तुति : अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर

    KurukhTimes.com बेबसाईट की पुनः प्रस्तुति : अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर

    अंतराष्ट्रीय महिला दिवस, दिनांक 8 मार्च 2026 को ‘जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच’ का प्रथम सम्मेलन, सत्यभारती रांची के सभागार में सम्पन्न हुआ। यह सम्मेलन झारखण्डी भाषा एवं संस्कष्ति के संरक्षण तथा संवर्धन हेतु झारखण्ड के नवोदित साहित्यकार एवं शोधार्थियों द्वारा आयोजित किया गया था। इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में झारखण्ड

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  • प्रकृति की थाली: आदिवासी खान-पान की सेहतमंद और स्वादिष्ट परंपरा

    प्रकृति की थाली: आदिवासी खान-पान की सेहतमंद और स्वादिष्ट परंपरा

    बढ़ती आबादी और समय के साथ रहन-सहन, संस्कारों तथा खान-पान में आये बदलावों के बावजूद आदिवासी समाज ने अपनी जीवनशैली को प्रकृति के साथ संतुलित रखने की परंपरा को हमेशा संजोकर रखा है। प्रकृति के अनुरूप ढली इस जीवनशैली में उनके भोजन का विशेष स्थान है। आदिवासी खान-पान केवल पेट भरने का माध्यम नहीं है,

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  • ओर- करम करम करले बहीन..

    ओर- करम करम करले बहीन..

    आईज तारीख 08 मार्च 2026 दिन एतवार के कुड़ुख़ टाइम्‍स डॉट कॉम कर पुनह परकाशन कर बेरा में टी आर एल ब्‍लॉग ले उरांव अखरा से तीन गो गावल गीत के नागपुरी भखा में बताल हय। इके धेयान देवब और गुनगुनाब अपने मन सउब – 1 ओर छोट-मोटे तेतईर गे आयो,भिंजल छांहईर गे आयो ।2।घुराल

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