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  • कुड़ुख़ टाइम्स का 17वां अंक प्रकाशित हुआ

    कुड़ुख़ टाइम्स का 17वां अंक प्रकाशित हुआ

    कुड़ुख़ टाइम्स का 17वां अंक आप पाठकों के सामने है। यह अंक अपने नये स्वरूप में आप पाठकों के लिए रोचक होगा। कुड़ुख़ संस्कृति एवं नेगचार को असम के डिब्रूगढ़ क्षेत्र में रहने वाले उरांव लोगों को जानिए। साथ ही तमिल-भाषी डॉ स्टीफन जी द्वारा इतिहास के पन्नों पर शोध परक लेख देखने को मिलेगा।…

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  • कुडुख़ भाषा की लिपि “तोलोड सिकि” में कुडुख़ प्रवेशिका पुस्तक “अयंग कोंयछा” प्रकाशित

    कुडुख़ भाषा की लिपि “तोलोड सिकि” में कुडुख़ प्रवेशिका पुस्तक “अयंग कोंयछा” प्रकाशित

    कुडुख़ भाषा की लिपि “तोलोड सिकि” में कुडुख़ प्रवेशिका पुस्तक “अयंग कोंयछा” केतृतीय संस्करण के प्रकाशन पर मुझे एक विशिष्ट उर्जा की अनुभूति हो रही है। मैं अपने छात्र जीवनके समय में वर्ष 1989 में कुडुख़ समाज की स्थिति के बारे विचार करते हुए कुडुख़ भाषा एवं संस्कृतिके संरक्षण तथा संवर्द्धन हेतु कार्य करने का…

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  • Kurukh Times की डिजिटल पत्रिका अंक 16 प्रकाशित हुआ

    Kurukh Times की डिजिटल पत्रिका अंक 16 प्रकाशित हुआ

    पूर्व के अंकों की तरह पत्रिका का 16वां अंक प्रकाशित हो गया है। इसमें तोलोंग सिकि लिपि में रोचक सामग्री शामिल किये गय हैं। आशा है अन्‍य अंकों की तरह इस अंक को भी आपका भरपूर प्‍यार मिलेगा। इसे आप इस पन्‍ने पर देख सकते हैं। आप चाहें तो इसे अपने पीसी या मोबाइल में…

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  • KurukhTimes Magazine Vol 18 published

    KurukhTimes Magazine Vol 18 published

    कुडुख़ (उरांव) समुदाय भारत की एक ऐसी आदिम नष्वंषविज्ञान पहचान है, जिसका इतिहास गौरव, संघर्श और निरंतर प्रवास का मिश्रण रहा है। इस समुदाय की ऐतिहासिक जड़ों और दक्षिण से उत्तर भारत की ओर उनके विस्थापन का प्रमाणिक विवरण श्री योगेश्वर उरांव (असम राज्य वित्त सलाहकार) की शोधपरक पुस्तक “उरांवों के दक्षिण से उत्तर भारत…

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  • KurukhTimes Magazine Vol 15 Published

    KurukhTimes Magazine Vol 15 Published

    संस्कृत, हिन्दी एवं कुँडुख़ भाषा की ध्वनियाँ (एक तुलनात्मक अध्ययन) : यद्यपि संस्कृत, हिन्दी एवं कुँडुख़ भाषा की ध्वनियों का तुलनात्मक अध्ययन एक जटिल विषय हैतथापि इन भाषाओं में उच्चरित ध्वनियों एवं इन ध्वनियों को लिखने के तरीकों को वर्तमान तकनीक के आधार पर इसके गुण-दोषों को इस शीर्षक के माध्यम से प्रस्तुत करने का…

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  • KurukhTimes.com बेबसाईट की पुनः प्रस्तुति : अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर

    KurukhTimes.com बेबसाईट की पुनः प्रस्तुति : अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर

    अंतराष्ट्रीय महिला दिवस, दिनांक 8 मार्च 2026 को ‘जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच’ का प्रथम सम्मेलन, सत्यभारती रांची के सभागार में सम्पन्न हुआ। यह सम्मेलन झारखण्डी भाषा एवं संस्कष्ति के संरक्षण तथा संवर्धन हेतु झारखण्ड के नवोदित साहित्यकार एवं शोधार्थियों द्वारा आयोजित किया गया था। इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में झारखण्ड…

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  • प्रकृति की थाली: आदिवासी खान-पान की सेहतमंद और स्वादिष्ट परंपरा

    प्रकृति की थाली: आदिवासी खान-पान की सेहतमंद और स्वादिष्ट परंपरा

    बढ़ती आबादी और समय के साथ रहन-सहन, संस्कारों तथा खान-पान में आये बदलावों के बावजूद आदिवासी समाज ने अपनी जीवनशैली को प्रकृति के साथ संतुलित रखने की परंपरा को हमेशा संजोकर रखा है। प्रकृति के अनुरूप ढली इस जीवनशैली में उनके भोजन का विशेष स्थान है। आदिवासी खान-पान केवल पेट भरने का माध्यम नहीं है,…

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  • ओर- करम करम करले बहीन..

    ओर- करम करम करले बहीन..

    आईज तारीख 08 मार्च 2026 दिन एतवार के कुड़ुख़ टाइम्‍स डॉट कॉम कर पुनह परकाशन कर बेरा में टी आर एल ब्‍लॉग ले उरांव अखरा से तीन गो गावल गीत के नागपुरी भखा में बताल हय। इके धेयान देवब और गुनगुनाब अपने मन सउब – 1 ओर छोट-मोटे तेतईर गे आयो,भिंजल छांहईर गे आयो ।2।घुराल…

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  • झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?

    झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?

    राँची के कोर्नेलियस मिंज को लोग करन कहते हैं. उनका परिवार सरना आदिवासी था लेकिन बाद में ईसाई बन गया. हालाँकि कोर्नेलियस के घर में अब भी कई लोग सरना हैं. यह परिवार साथ में सरहुल भी मनाता है और क्रिसमस भी. आपस में शादियाँ भी होती हैं. करन कहते हैं कि जब सरना और…

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  • झारखंड साहित्‍य अकादमी पुरस्‍कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्‍मानित

    झारखंड साहित्‍य अकादमी पुरस्‍कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्‍मानित

    रांची: आज दिनांक 21.02.2026 दिन शनिवार को प्रेस क्लब रांची में अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर अखिल झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार सम्मान 2026 झारखंड के 9 साहित्यकारों के रचनाकारों के साथ ओल चिकि लिपि के रचयिता श्रद्धेय पं रघुनाथ मुर्मू तथा वरांग चिति के रचयिता श्रद्धेय कोल लाको बोदरा को मरणोपरांत उनके वंशजों को…

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