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  • आदिवासी महासम्‍मेलन 2020 : संविधान में आदिवासियों के लिए बने कानून को अमल में लाए सरकार

    आदिवासी महासम्‍मेलन 2020 : संविधान में आदिवासियों के लिए बने कानून को अमल में लाए सरकार

    वाराणसी, जेएनएन :  आदिवासी महासम्‍मेलन उत्‍तर प्रदेश 2020 का आयोजन रविवार को वाराणसी में किया गया। इस दौरान अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. नंद कुमार सायं ने कहा कि आदिवासियों को संविधान में जो सुविधाएं दी गई है उसे प्रदेश सरकार अमल में नहीं ला रही है। कई जिलों और प्रदेशों में…

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  • आदिवासी समाज के इतिहास को दबाया गया

    आदिवासी समाज के इतिहास को दबाया गया

    वाराणसी, दुद्धी(सोनभद्र): महारानी दुर्गावती स्मारक स्थल मल्देवा में रविवार को आदिवासी सम्मेलन एवं चिंतन शिविर का आयोजन हुआ। इसकी शुरुआत बावनगढ़ के देवी-देवता एवं आदिशक्ति बड़ादेव के पूजन से हुई। देव कुमार लिंगो ने पूजा अर्चना की। मुख्य अतिथि आदिवासी महासंघ के बिहार के प्रदेश अध्यक्ष रामनगीना गौड़ ने यहां कहा कि आदिवासी समाज भारत…

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  • हम हिंदू नहीं, आदिवासियों ने मांगा ‘आदिवासी धर्म’ का अधिकार

    हम हिंदू नहीं, आदिवासियों ने मांगा ‘आदिवासी धर्म’ का अधिकार

    हम हिंदू नहीं हैं, हम भील और गोंड भी नहीं हैं। हम आदिवासी हैं। सरकार 2021 में होने वाली जनगणना में आदिवासी धर्म के लिए अलग कोड और कॉलम निर्धारित करे। यह मांग 25 फरवरी 2019 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एकजुट हुए आदिवासियों ने की। इस मौके पर बामसेफ के खिलाफ भी आवाज उठी…

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  • विकास के नाम पर आदिवासियों का विनाश होता आया है, हो रहा है और होगा

    विकास के नाम पर आदिवासियों का विनाश होता आया है, हो रहा है और होगा

    संविधान की पाँचवी अनुसूची तथा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिये गये ऐतिहासिक समता निर्णय 1997, का राज्य सरकार तथा प्रशासनिक तंत्र द्वारा घोर उल्लंघन का आरोप लगाते हुये संविधान की पाँचवी अनुसूची के तहत् प्रशासित एवं नियंत्रित अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं संविधानिक सुरक्षा हेतु जमीन के अंतरण पर पूर्णतः रोक लगाने के…

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  • आदिवासी जीवन-दर्शन और कुड़ुख़ भाषा की तोलोंग लिपि

    आदिवासी जीवन-दर्शन और कुड़ुख़ भाषा की तोलोंग लिपि

    झारखण्ड अलग प्रांत आन्दोलन के दौरान हम छात्र नेताओं के जेहन में हमेाा ही एक प्रन उठता था – क्या, नये राज्य में हम अपनी भाशा-संस्कृति को सुरक्षित रख पाएंगे ? इसके लिए क्या-क्या कदम उठाने होंगे ? इसी क्रम में विचार आया – संस्कृति को बचाने के लिए भाशा़ को बचाना जरूरी है और…

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  • आदिवासी समाज और मातृभाषा शिक्षा

    आदिवासी समाज और मातृभाषा शिक्षा

    परिचय: ‘‘शिक्षा और आदिवासी भाशा‘‘ एक गंभीर और संवेदनाील विशय है। इस विशय पर न तो समाज गंभीर हो सका, न ही सरकारी विभाग। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था सीधे तौर पर सरकार से संबंधित है और सरकार के पास भारतीय परिदृश्य में बहुत सारी जिम्मेदारियाँ है, जिसमें सर्वजन को समान अवसर प्रदान करने जैसी कठिन चुनौतियाँ…

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