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हार्वर्ड में व्याख्यान देंगे सीएम हेमन्त सोरेन

रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 20 फरवरी 2021 को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में ऑनलाइन व्याख्यान देंगे. मुख्यमंत्री को यह आमंत्रण हावर्ड केनेडी स्कूल के सीनियर फेलो सूरज येंगड़े की ओर से भेजा गया है. मुख्यमंत्री ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया है. मुख्यमंत्री झारखंड में आदिवासी अधिकारों, सतत विकास, कल्याणकारी नीतियों और कोरोना संक्रमण काल में राज्य सरकार
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जनजातीय व क्षेत्रीय भाषा विभाग के नये भवन से लोगों में आशा का संचार

रांची: आदिवासी एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग, रांची विश्वविद्यालय के नये परिसर भवन का उद्घाटन राज्यपाल द्रौपदी मु्र्मू द्वारा 13 दिसंबर को किया गया। इस प्रसंग में स्थानीय बौद्धिक तबके में उत्साह एवं आशा का माहौल देखा जा रहा है। लोगों को आशा है कि अब नई नियुक्तियाँ भी होंगी, ताकि छात्रों की पढ़ाई सुचारु रुप
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आदिवासी शिक्षा परंपरा को बचाने की कोशिश है धुमकुड़िया 2020

सरना यूथ वेलफेयर ग्रूप और आदर्श आदिवासी विकास सरना समिति के संयुक्त तत्वावधान में बीर बुधु भगत आदिवासी हॉस्टेल, हातमा में ‘धुमकुड़िया-2020’ का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम हर वर्ष इन संस्थाओं द्वारा आयोजित किया जाता है। कार्यक्रम के तहत पिछले चार दिनों तक वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के द्वारा देश भर से युवा जुड़े। उन्होंने विभिन्न
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धुमकुड़िया में फिर दीया जला रहे हैं

जंगल में तीर, धुनष, टंगिया अखड़ा में मांदर, नगाड़ा, ढोल,ढांक, बांसुरी, ठेसका, भेंर धुमकुड़िया के आंगन में बसुला, दउली, कुल्हाड़ी से बनाते हल,तीर धनुष,बलुवा, कुदाल का बेंट, बुनते कभी मछली के जाल, कभी बनाते गुलेल, कभी ढेलवाँस, दिमाग के टोकरी में,दउरी में इससे अधिक सजा लेते थे – बहुत कुछ हमारे आजा आजी, नाना नानी,
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उपन्यासकार रणेन्द्र से पत्रकार किसलय की लंबी बातचीत

श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफ्फको सम्मान के लिए चुने गए साहित्यकार रणेन्द्र (निदेशक, डॉ रामदयाल मुन्डा जनजातीय कल्याण एवं शोध संस्थान, रांची) से पत्रकार किसलय की लंबी बातचीत की झलकियां यहां देखिये/सुनिये। पूरी बातचीत यहां सुन सकते हैं: https://youtu.be/95SDG6ExRCA
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गणचिह्ववाद या टोटम प्रथा

Totem गणचिह्ववाद या टोटम प्रथा (totemism) किसी समाज के उस विश्वास को कहतें हैं जिसमें मनुष्यों का किसी जानवर, वृक्ष, पौधे या अन्य आत्मा से सम्बन्ध माना जाए। ‘टोटम’ दृाब्द ओजिब्वे (Ojibwe) नामक मूल अमरीकी आदिवासी कबीले की भाशा के ओतोतेमन (ototeman) से लिया गया है, जिसका मतलब अपना भार्इ-बहन रिश्तेदार है। इसका मूल शब्द
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कुंड़ुखटाइम्स डॉट कॉम तथा कुँड़ुख पाठ्य पुस्तकों का लोकार्पण

डॉ रामदयाल मुण्डा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान, झारखंड़ सरकार एवं कुंड़ुख भाषा, संस्कृति, परंपरा, लिपि के संरक्षण व संवर्द्धन के लिए समर्पित संस्था अद्दी कुंड़ुख चाःला धुमकुड़िया, पड़हा अखड़ा (अद्दी अखड़ा) रांची के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार, 18 दिसंबर 2020 को डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ सत्यनारायण मुण्डा के मुख्य आतिथ्य में संस्थान
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डॉ निर्मल मिंज का संदेश : KurukhTimes.com के लोकार्पण के अवसर पर

जाने माने शिक्षाविद् व आदिवासी चिंतक डॉ निर्मल मिंज ने KurukhTimes.com के लोकार्पण के अवसर पर अपना शुभकामना संदेश रिकार्ड करवाया है। आप भी सुनें..
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Tribal society of jharkhand & their community music

झारखंड का आदिवासी समाज और भाव विभोर करनेवाले उनके कोरस संगीत! .. जरूर सुनिये..
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आदिवासियों के सवालों पर चुप्पी क्यों?

भारत जैसे महादेश में आज आदिवासियत पर विमर्श अपरिहार्य है। वास्तव में यह केवल अस्मिता अथवा अधिकारों का मसला मात्र नहीं है – आदिवासियत की प्रासंगिकता उन तमाम संदर्भों से भी है, जो आदिवासी समाज के संपन्नता से विपन्नता तक के संक्षिप्त इतिहास में आज कहीं जाहिर-अजाहिर तौर पर दर्ज हैं। सरकारों के लिये आदिवासियत
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- ओर- करम करम करले बहीन..आईज तारीख 08 मार्च 2026 दिन एतवार के कुड़ुख़ टाइम्स डॉट कॉम कर पुनह परकाशन कर बेरा में टी आर एल ब्लॉग ले उरांव अखरा से तीन गो गावल गीत के नागपुरी भखा में बताल हय। इके धेयान देवब और गुनगुनाब अपने मन सउब – 1 ओर छोट-मोटे तेतईर गे आयो,भिंजल छांहईर गे आयो ।2।घुराल… Read more: ओर- करम करम करले बहीन..
- झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?राँची के कोर्नेलियस मिंज को लोग करन कहते हैं. उनका परिवार सरना आदिवासी था लेकिन बाद में ईसाई बन गया. हालाँकि कोर्नेलियस के घर में अब भी कई लोग सरना हैं. यह परिवार साथ में सरहुल भी मनाता है और क्रिसमस भी. आपस में शादियाँ भी होती हैं. करन कहते हैं कि जब सरना और… Read more: झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?
- झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानितरांची: आज दिनांक 21.02.2026 दिन शनिवार को प्रेस क्लब रांची में अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर अखिल झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार सम्मान 2026 झारखंड के 9 साहित्यकारों के रचनाकारों के साथ ओल चिकि लिपि के रचयिता श्रद्धेय पं रघुनाथ मुर्मू तथा वरांग चिति के रचयिता श्रद्धेय कोल लाको बोदरा को मरणोपरांत उनके वंशजों को… Read more: झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानित
- औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?आजादी के पचहत्तर साल बाद भी भारत अंग्रेज और अंग्रेजियत (औपनिवेशिक गुलामी) से मुक्त नहीं हुआ है”—इस उक्ति को यदि गहराई से समझें, तो यह किसी भौतिक गुलामी की नहीं बल्कि मानसिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक और वैचारिक गुलामी की ओर संकेत करती है। भारत ने 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता तो प्राप्त की, परंतु औपनिवेशिक सत्ता द्वारा… Read more: औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?
- हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते यह जानकर बहुत प्रेरणा मिलती है कि गुमला, रांची, लातेहार और लोहरदगा के युवा गणित (Maths) जैसे कठिन विषय को भी कुँड़ुख में ढाल रहे हैं। प्रसिद्ध अफ्रीकी लेखक चिंतक न्गुगी वा थ्योंगो ने हमेशा यही कहा कि – “भाषा केवल साहित्य के लिए नहीं, बल्कि विज्ञान और तर्क के लिए भी होनी चाहिए” ।… Read more: हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते