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धरमुस बिट्ठी केरस (एक इतिहास)

देवनाथ सायस गही समधियान कुकड़ो पद्दा रहचा। तंगदन ओन्दर’आ गे गोल्लस धरमुसिन बिट्ठी धरचस। र्इ चान पर्इयाँ उरूख़कन्ती आस तंगदा गने पुरी सहर तिरिथ काला गे मनमनरस। धरमुस मून्द गोटंग अउर कुँड़खा़रिन बिद्दयस। देवनाथ गोल्लस गहि तिरिथ उरूखना उल्ला पतरा ए:रर की टिपिरकी रहचा। अँवती धरमुस तड़तड़ाय के कुकड़ो पद्दा केरस। पालकी नुं बिजोली बींड़िन
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मरंग गोमके जयपाल सिंह की 118वीं जयंती मनायी गई

मरंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की 118वीं जयंती रविवार 03 जनवरी 2021 को मनायी गयी। जयपाल का जन्म 3 जनवरी, 1903 को खूंटी जिला के टकराहातू गांव में हुआ था 1970 में 20 मार्च को हुई थी। मरंग गोमके ने अपने जीवनकाल में 1939 से लेकर 1970 तक 19 उच्चतम पदों पर अपनी सेवाएं दीं।
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खरसावां गोलीकांड का जनरल डायर कौन?

रांची: स्वतंत्र भारत में 1 जनवरी 1948 को खरसावां गोलीकांड की तुलना जालियांवालाबाग हत्याकांड से की जाती है। ओड़िसा मिलिट्री पुलिस की ओर से की गयी गोलीबारी में 35 आदिवासियों के मारे की पुष्टि हुई थी, लेकिन पीके देव की पुस्तक ‘मेमायर ऑफ ए बाइगोर एरा’ में दो हजार से ज्यादा आदिवासियों के मारे जाने
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धुमकुडि़या दिवस 2012 : एक स्वागत गीत

यह विडियो ग्राम सैन्दा, थाना सिसर्इ, जिला गुमला में धुमकुड़िया दिवस का है। यह आयोजन डॉ0 नारायण उराँव ‘सैन्दा’ द्वारा परम्परागत सामाजिक संस्था ‘धुमकुड़िया’ को पुनर्जीवित करने के उदेश्य से दिनांक 14 जनवरी 2012 को किया गया था। इस आयोजन का उदेश्य कुड़ुख़ भाशा-संस्कृति को संरक्षण तथा संवर्द्धन करना है। साथ ही मातृभाशा के माध्यम
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मीठे बोल बचपन के : आदिवासी समाज में भाषा का रियाज़ बचपन से ही शुरू होता है

यह विडियो लिटिबीर कुड़ुख़ एकेडमी, तिलसिरी, घाघरा, गुमला का है। कोरोना लॉकडाउन के चलते बच्चे घर में ही परम्परागत गीत सीख रहे हैं। 2रा विडियो में वही बच्चे अंगरेजी कविता याद कर रहे हैं। इस विद्यालय में कुड़ुख़ भाशा-संस्कृति के माध्यम से अंगरेजी एवं हिन्दी की उंचार्इ तक पहुँचने के उदेश्य से संचालित है।
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झारखंड आंदोलनकारी चिन्हितीकरण आयोग के अध्यक्ष जस्टिस विक्रमादित्य नहीं रहे

झारखंड हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस विक्रमादित्य प्रसाद का निधन हो गया है. वे झारखंड आंदोलनकारी चिन्हितीकरण आयोग के अध्यक्ष व कॉमर्शियल टैक्स ट्रिब्यूनल के चेयरमैन रहे थे. मिली जानकारी के अनुसार सोमवार सुबह सवा तीन बजे रांची में उनका निधन हो गया. वे रांची के मोरहाबादी में रहते थे. हरमू के मुक्ति धाम में
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झारखंड के हीरामन ने तैयार की कोरवा भाषा की डिक्शनरी, मोदी ने की तारीफ

रांची : झारखंड के गढ़वा जिला अंतर्गत रंका के सिंजो गांव निवासी पैंतीस वर्षीय हीरामन कोरवा ने आदिवासी भाषा कोरवा की डिक्शनरी तैयार की है। हीरामन को भाषा समझने में दिक्कत हुई तो स्वयं एक शब्दकोष बनाने का ख्याल आया। 50 पन्ने की इस डिक्शनरी का नाम है “कोरवा भाषा शब्दकोष’। इसी साल नवंबर में
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मानव तस्करों के चंगुल से बचायी गई नाबालिग और महिला

रांची : रेलवे पुलिस ने एक नाबालिग लड़की एवं महिला को मानव तस्करों से बचा लिया। पुलिस ने इस मामले में सुनीता उराइन नामक आरोपी महिला को गिरफ्तार भी किया है। वह इन्हें दिल्ली ले जा रही थी। वह राज्य के विभिन्न इलाकों से लड़कियों को दिल्ली ले जाती है। इसके एवज में उसे पैसे
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केंद्र के असहयोग के बावजूद झारखंडी किसानों का कर्ज माफ होगा
रांची : झारखंड के कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा है कि 9।07 लाख मानक खाताधारक किसानों को कृषि ऋण माफी योजना का लाभ पहुंचाना हेमंत सोरेन सरकार की प्राथमिकता है। फिलहाल एनपीए खाताधारक किसानों को कृषि ऋण माफी योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा। एनपीए खाताधारक किसानों को अगले चरण में ऋण माफी योजना
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मैकलुस्कीगंज में ओस जम रही हैं
झारखंड में ठंढ़ का कहर जारी है। रांची के मैकलुस्कीगंज में झाड़ियों, घास व खेत-खलिहान में ओस की बूंदें जम गईं। इधर, मौसम विभाग के अनुसार, 31 और 1 जनवरी को आंशिक बादल छाए रहने के आसार है। हालांकि बारिश होने की संभावना कम ही है। शाम होते ही ठंडी हवा लोगों को घरों में
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- ओर- करम करम करले बहीन..आईज तारीख 08 मार्च 2026 दिन एतवार के कुड़ुख़ टाइम्स डॉट कॉम कर पुनह परकाशन कर बेरा में टी आर एल ब्लॉग ले उरांव अखरा से तीन गो गावल गीत के नागपुरी भखा में बताल हय। इके धेयान देवब और गुनगुनाब अपने मन सउब – 1 ओर छोट-मोटे तेतईर गे आयो,भिंजल छांहईर गे आयो ।2।घुराल… Read more: ओर- करम करम करले बहीन..
- झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?राँची के कोर्नेलियस मिंज को लोग करन कहते हैं. उनका परिवार सरना आदिवासी था लेकिन बाद में ईसाई बन गया. हालाँकि कोर्नेलियस के घर में अब भी कई लोग सरना हैं. यह परिवार साथ में सरहुल भी मनाता है और क्रिसमस भी. आपस में शादियाँ भी होती हैं. करन कहते हैं कि जब सरना और… Read more: झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?
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- औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?आजादी के पचहत्तर साल बाद भी भारत अंग्रेज और अंग्रेजियत (औपनिवेशिक गुलामी) से मुक्त नहीं हुआ है”—इस उक्ति को यदि गहराई से समझें, तो यह किसी भौतिक गुलामी की नहीं बल्कि मानसिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक और वैचारिक गुलामी की ओर संकेत करती है। भारत ने 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता तो प्राप्त की, परंतु औपनिवेशिक सत्ता द्वारा… Read more: औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?
- हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते यह जानकर बहुत प्रेरणा मिलती है कि गुमला, रांची, लातेहार और लोहरदगा के युवा गणित (Maths) जैसे कठिन विषय को भी कुँड़ुख में ढाल रहे हैं। प्रसिद्ध अफ्रीकी लेखक चिंतक न्गुगी वा थ्योंगो ने हमेशा यही कहा कि – “भाषा केवल साहित्य के लिए नहीं, बल्कि विज्ञान और तर्क के लिए भी होनी चाहिए” ।… Read more: हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते