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रूढ़ी-प्रथा के अन्तर्गत ग्रामसभा एवं पड़हा के कार्यकारिणी सदस्य – कौन और कैसे ?

ज्ञात हो कि रूढ़ीप्रथा ग्रामसभा पड़हा बिसुसेन्दरा, सिसई-भरनो, गुमला (झारखण्ड) द्वारा विगत 13 वर्षों से रूढ़ीप्रथा में प्रचलित सामाजिक मान्यताओं को लिखित रूप में संकलित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अग्रेतर क्रियान्वयन में परम्परागत ग्रामसभा पड़हा बिसुसेन्दरा 2020 के लिखित प्रतिवेदन के कंडिका – 9, 10, 11 को सामाजिक आधार मानकर
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तीन दिवसीय आदिवासी सरना युवा प्रशिक्षण शिविर सराजपुर, सुंदरगढ़, उड़ीसा में सम्पन्न

दिनांक 13,14 और 15 जून 2025 को तीन दिवसीय आदिवासी सरना युवा प्रशिक्षण शिविर स्थान – सराजपुर, सुंदरगढ़, उड़ीसा में सम्पन्न हुआ। इस शिविर में शामिल होने के लिए मैं 24 घंटे में 605 किलोमीटर का दूरी तय करके प्रशिक्षण शिविर स्थान पहूंचा । इसके लिए मैं झारखण्ड के गुमला जिला के बिशनपुर थाना के सखुवा
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चौंकाने वाली भविष्यवाणी है आदिवासी मौसम पूर्वानुमान कर्ता की
यह विडियो दिनांक 25.05.2025 को शूट किया गया आदिवासी मौसम विज्ञानी श्री गजेन्द्र उरांव उम्र 63 वर्ष ग्राम सैन्दा थाना सिसई जिला गुमला निवासी की है। मौसम पूर्वानुमान के बारे में उनका पूर्वानुमान विगत 12 वर्षों से सटीक रहा है। पिछले वर्ष 2024 में उन्होंने मौसम पूर्वानुमान में कहा था 2024 में वर्षा तीनों खण्ड
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ग्राम सभा पड़हा न्यायपंच नियमावली 2025

ग्राम सभा पड़हा न्यायपंच नियमावली 2025 : पद्दा पड़हा नेवईपंच्चा
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कुंडुख़ भाषा संस्कृति परम्परा ग्रामसभा विषयक तीन दिवसीय कार्यशाला संपन्न

दिनांक – 21.02.2025 से 23.02.2025 को (कुंडुख़ उरॉंव) समाज के लोगों के बीच में कुड़ुख़ भाषा संस्कृति परंपरा, ग्राम सभा विषयक कार्यशाला सम्पन्न हुआ। यह कार्यशाला टाटा स्टील फाउण्डेशन के सौजन्य से आयोजित हुआ। इस कार्यशाला का आयोजन, कुड़ुख़ भाषा सांस्कृतिक पुनरुत्थान केन्द्र बम्हनी, गुमला तथा अददी कुड़ुख़ चाला धुमकुड़िया पड़हा अखड़ा, रॉंची के संयुक्त
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धार्मिक उपनिवेषवाद और उरांव समाज के विकास की धारा

उपनिवेषवाद का अर्थ है – ‘‘किसी समृद्ध एवं शक्तिशाली राष्ट्र द्वारा अपने विभिन्न हितों को साधने के लिए किसी निर्बल किन्तु प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण राष्ट्र के विभिन्न संसाधनों का, शक्ति के बल पर उपभोग करना।’’ यहाँ धार्मिक उपनिवेषवाद का अर्थ है – कमजोर और असंगठित समाज को अपने धार्मिक जाल में उलझा कर उसके
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कुड़ुख़ भाषा संस्कृति परंपरा, ग्राम सभा विषयक कार्यशाला संपन्न

दिनांक – 21.02.2025 से 23.02.2025 को कुड़ुख़ (उरांव) समाज के लोगों द्वारा कुड़ुख़ भाषा संस्कृति परंपरा, ग्राम सभा विषयक कार्यशाला टाटा स्टील फाउण्डेशन के सौजन्न्य से सम्पन्न हुआ। इस कार्यशाला का आयोजन कुड़ुख़ भाषा सांस्कृतिक पुनरूत्थान केंद्र बम्हनी, गुमला तथा अद्दी कुड़ुख़ चाला धुमकुड़िया पड़हा अखड़ा, रांची के संयुक्त संयोजन में किया गया। कार्यशाला के प्रथम
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Sarhul: A Celebration of Spring, Heritage, and Dravidian Roots

Sarhul: Introduction: Sarhul is a vibrant spring festival celebrated in Jharkhand, marking the beginning of the new year. Observed for three days, starting from the third day of the Chaitra month, it holds deep significance for the Kurukh / Oraon speaking Dravidian community. The name “Sarhul” likely originates from the Tamil word “Cālam” (சாலம்), which refers
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उरांव पड़हा ग्राम सभा में नृत्य-संगीत

यह विडियो दिनांक 28.03.2025 को शूट किया गया है। यह आयोजन परम्परागत उरांव पड़हा ग्रासभा, सिसई-भरनो के सदस्यों द्वारा संचालित किया गया है। इस आयोजन की पूरी व्यवस्था, ग्रामीण लोगों के आपसी सहयोग से किया गया है। आपसी सहयोग एवं समर्पण तथा समाज के युवकों एवं बुजुर्गों का आपसी तालमेल आने वाले समय के लिए
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