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ऐतिहासिक मुड़मा जतरा संपन्न

दिनांक 8-9 अक्टूबर 2025 ( झारखंड,राजकीय जतरा/मेला) में अंतरराष्ट्रीय सरना धर्मगुरु श्री बंधन तिग्गा ने घोषणा की “कुँड़ुख़ उराव भाषा की लिपि तोलोंग सिकि को देश के कोने-कोने तक पहुंचने के लिए तथा सामाजिक जन शिक्षा के मध्य के रूप में अनुमोदित एवं लोकार्पित करता हूं”। दिनांक 8.10.2025 दिन बुधवार को टीम धूमकुड़िया और अद्दी
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अद्दी अखड़ा ने उच्च शिक्षा निदेशक को ज्ञापन सौंपा : झारखंड के वि. वि. में कुंड़ंख भाषा एवं तोलोंग सिकि लिपि को पाठ्यक्रम में शामिल करें

रांची, 12 सितंबर: कुंड़ुंख भाषियों की संस्था अद्दी अखड़ा ने झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकि शिक्षा विभाग के निदेशक को एक ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि तत्काल प्रभाव से झारखंड के विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में कुंड़ुंख भाषा एवं तोलोंग सिकि लिपि को शामिल किया जाय। इससे पहले रांची विश्वविद्यालय के कुलपति को
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उरांव जनजाति प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से मिला, कुंडुख को 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग

दिल्ली/रांची: झारखंड का एक प्रतिनिधिमंडल भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलकर कुड़ुख (उरांव) भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने एवं इसके संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में मार्गदर्शन एवं कार्यादेश जारी करने का अनुरोध किया। राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपते हुए बताया कि देश में करीब 40 लाख उरांव जनजाति के
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डी डी चैनल पर प्रसारित हुआ कुंडुख स्कूल मंगलो पर बना डाक्यूमेंट्री

दिनांक 20/08/2025 को DD NATIONAL, चैनल पर समय 6:00pm बजे शाम में कुँडुख भाषा एवं कुंडुख स्कूल मंगलो पर बना डाक्यूमेंट्री फिल्म को भारत के गाँव का सबसे बड़ा ग्रामीण शो के रूप प्रसारित किया गया। यह हमारे लिए गर्व का विषय है। आगे कुँडुख़ भाषा का प्रचार-प्रसार के लिए समाज से और अधिक
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आज डॉ मुन्डा का जन्मदिन है! …नमन!

डॉ राम दयाल मुन्डा का जन्मदिन है आज। आप सबकी ओर से डॉ मुन्डा को नमन और बधाई !!!!
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Kurukh Training Program at Jalpaiguri (WB)

Kurukh Literary Society of India, kolkata chapter organized and coducted Kurukh Training Program w.e.f. 16.07.2025 to 30.07.2025 for the promotion preservation of Kurukh language at Mal Bazar, Jalpaiguri, WB. Program was inaurated by honourable mininster in charge, tribal development department, govt. of WB Shri Bulu Chik Baraik. Initially 90 people registered for training but only
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आदिवासी दिवस 2025 : आदिवासी समुदाय केवल आंकड़े नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता के मूल स्तंभ हैं

9 अगस्त को मनाया जाने वाला विश्व आदिवासी दिवस (International Day of the World’s Indigenous Peoples) आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक, सामाजिक, और राजनीतिक पहचान को सम्मानित करने और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक वैश्विक प्रयास है। आइए इसके इतिहास और वर्तमान स्थिति को विस्तार से समझें: इतिहास – 1982: संयुक्त राष्ट्र संघ
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गुरूजी नहीं रहे..!

झारखंड अलग प्रांत के प्रणेता और आदिवासी व मूलवासी समाज के गुरूजी अर्थात शिबु सोरेन का स्वर्गवास हो गया है। यूं तो अलग झारखंड की मांग पिछले लम्बे अरसे से चलती रही है लेकिन इस आंदोलन को जमीनी अधिकार का तेवर दिया था शिबु सोरेन ने। झारखंड ही क्यों पूरे देश का आदिवासी व बंचित
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आदिवासी महिलाओं का पैतृक संपत्ति पर सम्मान अधिकार पर चर्चा संपन्न

राम चरण बनाम सुखराम के हालिया मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा “आदिवासी महिला का पैतृक संपत्ति में सम्मान हिस्सेदारी” की बात की है. इस फैसले पर आदिवासी महिलाओं का विचार जानने हेतु , “टीम धुमकुड़िया” और “अंतरराष्ट्रीय कुँड़ुख़र समाज” द्वारा संयुक्त रूप से 26.7.2025 दिन शनिवार समय शाम 7:45 से रात्रि 10:30 तक एक
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डॉ. सोनाझरिया मिंज आवंड़ाटोली, चैनपुर, गुमला से यूनेस्को तक

डॉ. सोनाझरिया मिंज एक प्रसिद्ध आदिवासी विद्वान, अकादमिक, और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो झारखंड के गुमला जिले के ओरांव जनजाति से हैं। उनका जन्म दिसंबर 1962 में हुआ था, और वे वर्तमान में नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में स्कूल ऑफ कंप्यूटर एंड सिस्टम्स साइंसेज की प्रोफेसर हैं। उनकी कहानी संघर्ष, प्रेरणा, और
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- ओर- करम करम करले बहीन..आईज तारीख 08 मार्च 2026 दिन एतवार के कुड़ुख़ टाइम्स डॉट कॉम कर पुनह परकाशन कर बेरा में टी आर एल ब्लॉग ले उरांव अखरा से तीन गो गावल गीत के नागपुरी भखा में बताल हय। इके धेयान देवब और गुनगुनाब अपने मन सउब – 1 ओर छोट-मोटे तेतईर गे आयो,भिंजल छांहईर गे आयो ।2।घुराल… Read more: ओर- करम करम करले बहीन..
- झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?राँची के कोर्नेलियस मिंज को लोग करन कहते हैं. उनका परिवार सरना आदिवासी था लेकिन बाद में ईसाई बन गया. हालाँकि कोर्नेलियस के घर में अब भी कई लोग सरना हैं. यह परिवार साथ में सरहुल भी मनाता है और क्रिसमस भी. आपस में शादियाँ भी होती हैं. करन कहते हैं कि जब सरना और… Read more: झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?
- झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानितरांची: आज दिनांक 21.02.2026 दिन शनिवार को प्रेस क्लब रांची में अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर अखिल झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार सम्मान 2026 झारखंड के 9 साहित्यकारों के रचनाकारों के साथ ओल चिकि लिपि के रचयिता श्रद्धेय पं रघुनाथ मुर्मू तथा वरांग चिति के रचयिता श्रद्धेय कोल लाको बोदरा को मरणोपरांत उनके वंशजों को… Read more: झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानित
- औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?आजादी के पचहत्तर साल बाद भी भारत अंग्रेज और अंग्रेजियत (औपनिवेशिक गुलामी) से मुक्त नहीं हुआ है”—इस उक्ति को यदि गहराई से समझें, तो यह किसी भौतिक गुलामी की नहीं बल्कि मानसिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक और वैचारिक गुलामी की ओर संकेत करती है। भारत ने 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता तो प्राप्त की, परंतु औपनिवेशिक सत्ता द्वारा… Read more: औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?
- हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते यह जानकर बहुत प्रेरणा मिलती है कि गुमला, रांची, लातेहार और लोहरदगा के युवा गणित (Maths) जैसे कठिन विषय को भी कुँड़ुख में ढाल रहे हैं। प्रसिद्ध अफ्रीकी लेखक चिंतक न्गुगी वा थ्योंगो ने हमेशा यही कहा कि – “भाषा केवल साहित्य के लिए नहीं, बल्कि विज्ञान और तर्क के लिए भी होनी चाहिए” ।… Read more: हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते