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तीन दिवसीय आदिवासी सरना युवा प्रशिक्षण शिविर सराजपुर, सुंदरगढ़, उड़ीसा में सम्पन्न

मान्दर के संबंध में कुड़ुख़ (उराँव) लोक गीत (मान्दर को कुड़ुख़ भाषा में ख़ेःल कहा जाता है)। इस शिविर में शामिल होने के लिए मैं 24 घंटे में 605 किलोमीटर का दूरी तय करके प्रशिक्षण शिविर स्थान पहूंचा । इसके लिए मैं झारखण्ड के गुमला जिला के बिशनपुर थाना के सखुवा टोला गांव से 145 किलोमीटर
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फ्रांस के पांच विदेशी मेहमान झारखंड टूर (भ्रमण) पर

फ्रांस से पांच विदेशी मेहमान झारखंड टूर (भ्रमण) में आए। उनका नाम था – जेराल्ड, दोमनिक, लासि्तन, आणि, जोजेत। वे, गो ट्रैवल द्वारा भारत के राज्यों में आए हेतु आए थे। इनका टूर (भ्रमण) आदिवासी गांव क्षेत्र को देखना और जानना था। इन विदेशी मेहमानों को भारतीय भाषा नहीं आती, ना अंग्रेजी, ना हिंदी।
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ब्रिटिश शासन का प्रभाव आदिवासियों के जीवन और संस्कृति पर – एक नजर

छोटानागपुर पठार (वर्तमान झारखंड और आस-पास के क्षेत्रों) में ब्रिटिश शासन का प्रभाव आदिवासियों के जीवन और संस्कृति पर गहरा और दीर्घकालिक रहा। इसने उनके आर्थिक जीवन, भूमि-संबंध, सामाजिक ढाँचे और सांस्कृतिक पहचान को गहराई से प्रभावित किया। इसके कुछ प्रमुख पहलुओं पर प्रभाव: 1. पारंपरिक भूमि व्यवस्था का विघटन • ब्रिटिश शासन से
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बाबा कार्तिक उरांव का 101वां जयंती समारोह, बिरसा नगर, जमशेदपुर में सम्पन्न

दिनांक 29-10-2025 को आदिवासी उरांव समाज समिति, बिरसा नगर जोन नंबर-06 में पंखराज साहेब बाबा कार्तिक उरांव का 101 वां जयंती 2025 समारोह हर्षोल्लास से मनाया गया। प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी बाबा कार्तिक उरांव जयंती समारोह, बिरसा नगर, जमशेदपुर में टाटा स्टील फाउंडेशन के सहयोग से मनाया गया। ज्ञात हो टाटा स्टील
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कुड़ुख़ भाषा की लिपि तोलोंग सिकि को सितम्बर 2025 में मिला यूनिकोड

झारखण्ड में 2री सबसे अधिक जनसंख्या वाले आदिवासी उरांव समुदाय अथवा भारत देश् में 4थी सबसे अधिक आदिवासी जनसंख्या वाले उरांव समुदाय की कुड़ुख़ भाषा की लिपि, तोलोंग सिकि को सितम्बर 2025 में वैश्विक स्तर पर UNICODE (BLOCK) में शामिल कर लिया गया है। UNICODE (BLOCK) में शामिल होने में भारत सरकार के सूचना प्राद्यौगिकि
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युकेजी की बच्ची ने कुंड़ुख भाषा व तोलोंग सिकि में गीत गाया

यह विडियो दिनांक २४ अक्टूबर २०२५ को शूट किया हुआ, थाना – सिसई, जिला – गुमला, झारखंड के अन्तर्गत सोहदरी उरांव पब्लिक स्कूल, शिवनाथपुर डहुटोली का है। यहां पर, बच्चे स्कूल की पढ़ाई के साथ कुड़ुख़ भाषा एवं तोलोंग सिकि, लिपि में पढ़ते-लिखते हैं। इस विडियो में UKG एक बच्ची द्वारा कुड़ुख़ भाषा गीत गाकर
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झारखंड के शिवनाथपुर गांव (सिसई) में कुड़ंख यानी तोलोंग सिकि भाषा में गणित का पहाड़ा याद करते बच्चे

यह विडियो दिनांक २१ अक्टूबर २०२५ को शूट किया हुआ ग्राम शिवनाथपुर, थाना – सिसई, जिला – गुमला, झारखंड के धुमकुड़िया का है। यहां पर, बच्चे स्कूल की पढ़ाई के साथ कुड़ुख़ भाषा एवं तोलोंग सिकि, लिपि में पढ़ते-लिखते हैं। इस विडियो में एक बच्चे द्वारा 1 से 5 तक का पहाड़ा, कुड़ुख़ भाषा में
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Brief note on ST Inclusion/Exclusion/ modification in Scheduled Tribe List

(According to report of Standing Committee on Social Justice and Empowerment 2012-13) Article 366(25) of the Constitution, defines Scheduled Tribes as follows:- “Scheduled Tribes means such tribes or tribal communities or parts of or groups within such tribes or tribal communities as are deemed under article 342 to be Scheduled Tribes for the purposes of
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रांची में आयोजित हुआ प्रथम धरती आबा फिल्म महोत्सव, देशभर की 52 फिल्मों का प्रदर्शन

रांची, 16 अक्टूबर 2025: रांची में 14 से 16 अक्टूबर तक भारत सरकार के आदिवासी कार्य मंत्रालय और झारखंड सरकार के कल्याण विभाग के सहयोग से “प्रथम धरती आबा आदिवासी फिल्म महोत्सव” का आयोजन किया गया। महोत्सव में पूरे भारत से प्राप्त फिल्मों में कुल 52 फिल्मों का चयन प्रदर्शन के लिए किया गया था
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मुड़मा जतरा 2025 : धूमिल संस्कार, मालामाल दुकानदार

दिनांक 8 और 9 अक्टूबर को लगने वाला मुड़मा जतरा आज मेला में तब्दील हो गया है,1984 ई में जब मैं मुड़मा जतरा गया था तब पूरे मैदान में जतरा के घोल नजर आ रहे थे। नागपुरी कलाकारों की मंच और उरांवों की खोड़हा कम से कम 30-35 रहा होगा, गगन भेदी मधुर मांदर नगाड़े
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- ओर- करम करम करले बहीन..आईज तारीख 08 मार्च 2026 दिन एतवार के कुड़ुख़ टाइम्स डॉट कॉम कर पुनह परकाशन कर बेरा में टी आर एल ब्लॉग ले उरांव अखरा से तीन गो गावल गीत के नागपुरी भखा में बताल हय। इके धेयान देवब और गुनगुनाब अपने मन सउब – 1 ओर छोट-मोटे तेतईर गे आयो,भिंजल छांहईर गे आयो ।2।घुराल… Read more: ओर- करम करम करले बहीन..
- झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?राँची के कोर्नेलियस मिंज को लोग करन कहते हैं. उनका परिवार सरना आदिवासी था लेकिन बाद में ईसाई बन गया. हालाँकि कोर्नेलियस के घर में अब भी कई लोग सरना हैं. यह परिवार साथ में सरहुल भी मनाता है और क्रिसमस भी. आपस में शादियाँ भी होती हैं. करन कहते हैं कि जब सरना और… Read more: झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?
- झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानितरांची: आज दिनांक 21.02.2026 दिन शनिवार को प्रेस क्लब रांची में अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर अखिल झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार सम्मान 2026 झारखंड के 9 साहित्यकारों के रचनाकारों के साथ ओल चिकि लिपि के रचयिता श्रद्धेय पं रघुनाथ मुर्मू तथा वरांग चिति के रचयिता श्रद्धेय कोल लाको बोदरा को मरणोपरांत उनके वंशजों को… Read more: झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानित
- औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?आजादी के पचहत्तर साल बाद भी भारत अंग्रेज और अंग्रेजियत (औपनिवेशिक गुलामी) से मुक्त नहीं हुआ है”—इस उक्ति को यदि गहराई से समझें, तो यह किसी भौतिक गुलामी की नहीं बल्कि मानसिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक और वैचारिक गुलामी की ओर संकेत करती है। भारत ने 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता तो प्राप्त की, परंतु औपनिवेशिक सत्ता द्वारा… Read more: औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?
- हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते यह जानकर बहुत प्रेरणा मिलती है कि गुमला, रांची, लातेहार और लोहरदगा के युवा गणित (Maths) जैसे कठिन विषय को भी कुँड़ुख में ढाल रहे हैं। प्रसिद्ध अफ्रीकी लेखक चिंतक न्गुगी वा थ्योंगो ने हमेशा यही कहा कि – “भाषा केवल साहित्य के लिए नहीं, बल्कि विज्ञान और तर्क के लिए भी होनी चाहिए” ।… Read more: हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते