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विश्वविद्यालय कुँडु़ख विभाग को तोलोंग सिकि लिपि पर पठन-पाठन करने हेतु ज्ञापन सौंपा गया

आज दिनांक 02/07/2024 को अद्दी कुँड़ुख चाला धुमकुड़िया पड़हा अखड़ा, रांची संस्था के द्वारा कुँड़ुख विभाग, रांची विश्वविद्यालय (जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय ) के विभाग अध्यक्ष डॉ नारायण भगत महोदय को ज्ञापन सौंपा गया। जिसमें कुँड़ुख भाषा की लिपि तोलोंग सिकी में पठन-पाठन आरंभ करने तथा विषयवार परीक्षा होने की बात रखी गई। उरांव/कुँड़ुख
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राउरकेला में प्रथम धुमकुड़िया का दो दिवसीय सफल आयोजन, डॉ नारायण उरांव “सैंदा” ने युवाओं को प्रेरित किया

नेड्डा -29/06/2024 से 30/06/2024 को दो दिवसीय करियर काउंसलिंग कार्यक्रम के आयोजक:- सरना प्रार्थना सभा, उड़ीसा द्वारा सरना चौक निकट धुमकुड़िया भवन, उदितनगर, राउरकेला में आयोजन हुआ। कुंडुख समाज कैसे बचेगी? इसी सवाल का जवाब में- विलुप्त होती अपनी मातृभाषा कुंडुख़, पड़हा, धुमकुड़िया, अखड़ा, सारना (अध्यात्म स्त्रोत- सरना प्रार्थना सभा) सरना धरम, ने-ग चार, कुंडुख़
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श्रद्धेय बाबा विजय उरांव के जन्मदिवस पर कुंड़ुख़ भाषा विभाग में साहित्य संगोष्ठी सम्पन्न

श्रद्धेय बाबा विजय उरांव को उनके जन्मदिवस पर उनकी जिया (आत्मा) को शत शत नमन। आज दिनांक 01 जुलाई 2024 को आयोजित बाबा FC विजय उरांव के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित साहित्य संगोष्ठी के लिए विश्वविद्यालय कुंड़ुख़ विभाग परिवार को डॉ नारायण उरांव की से हार्दिक आभार एवं बधाई। इस अवसर में आप सबों के
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उरांव समाज प्रतिनिधि मंडल ने तोलोंग सिकि लिपि को विवि में लागू कराने हेतु राज्यपाल के समक्ष रखी मांग

दिनांक 26.06.2024 दिन बुधवार को 03.00 बजे अपराहन 05 उरांव आदिवासी,अपनी मातुभाषा कुंड़ुख एवं कुंड़ुख़ की लिपि तोलोंग सिकि के संरक्षण तथा संवर्द्धन के लिए महामहीम राज्यपाल,झारखण्ड से मिले । प्रतिनिधि मण्डल का नेतृत्व सुश्री नीतू साक्षी टोप्पो , पेल्लो कोटवार, अद़दी अखड़ा, रांची द्वारा किया गया। इस प्रतिनिधि मण्डल में साहित्यकार सह साहित्य अकादमी,
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धुमकुड़िया को जीवित करने के लिए मौसम अनुसार रागों में गीतों का अभ्यास जरूरी : डॉ नारायण उरांव “सैन्दा”

धुम-ताअ़+कुड़ियां = धमकुड़िया शब्द बना है। धुमकुड़िया उरांव आदिवासी गांव में एक पारंपरिक सामाजिक पाठशाला सह कौशल विकास केंद्र है। दादा-दादी या नाना-नानी अपने पोते-पोतियों, नाती को बुलाकर उन्हें गायन-नृत्य-वादन सीखने देते हैं। दूसरे शब्दों में, हम कह सकते हैं कि वह प्रणाली या वातावरण जहाँ बच्चे गाना-नाचना और खेल-खेल में पारंपरिक अभ्यास करना सीखते
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धुमकुड़िया का उद्घाटन : दिनांक 16/06/2024 : स्थान :- आताकोरा लेटंगा टोली, भरनो

भरनो :-आताकोरा लेटंगा टोली के युवाओं ने विलुप्त होती कुंडुख़ भाषा संस्कृति की संरक्षण एवं संवर्धन करने के उद्देश्य से श्रम दान कर एक धुमकुड़िया का नव निर्माण किया है । धुमकुड़िया नव निर्मित करने के बाद में एक विशेष नेग ,पूजा-अनुष्ठान- डण्डा कट्टना किया जाता है । दिनांक 16/06/2024 को आताकोरा लेटंगा टोली के
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ग्रामीण मौसम भविष्य-वक्ता का पूर्वानुमान 2024
विगत 10 साल से ग्रामीण इलाकों में प्रक़ति की वस्तुओं को देखकर मौसम पूर्वानुमान करने वाले 65 वर्षीय श्री गजेन्द्र उरांव ने साल 2024 का मौसम पूर्वानुमान बतलाया है। उन्होंने कहा कि इस साल 2024 में बरखा तीनों पाली में होगा । इससे फसल अच्छी होगी। ग्रामीण मौसम पूर्वानुमान कर्ता द्वारा बरखा को तीन भाग
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कुंड़ख़ कत्था अईन अरा ख़ोसराचम्मबी एक आधुनिक उरांव/कुंड़ुख़ भाषा व्याकरण

प्रस्तुत पुस्तक कुंड़ख़ कत्था अईन अरा ख़ोसराचम्मबी एक आधुनिक उरांव/कुंड़ुख़ भाषा व्याकरण है। इसका शोध संकलन पेशे से चिकित्सक डॉ नारायण उरांव सैन्दा द्वारा किया गया है। यह टाटा स्टील फाउंडेशन, के तकनीकी सहयोग से इस ऊंचाई तक पंहुचा है। समाज में लोगों तक पहुंचाने का कार्य अद्दी अखड़ा संस्था रांची द्वारा किया जा रहा
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परम्परागत ग्रामसभा पड़हा बिसुसेन्दरा, गुमला मण्डल 2024

भारतीय संसद द्वारा पारित पेसा कानून 1996 (PESA ACT 1996 ) के Section 4(d) के तहत दिनांक 18 एवं 19 मई 2024 दिन शनिवार एवं रविवार को 9 पड़हा गांव, 7 पड़हा गांव एवं 6 पड़हा गांव, कुल 22 गांवों की सभा (22 गाव का पड़हा बैठक) द्वारा अपनी रूढ़ी-परम्परा के अनुसार ‘‘परम्परागत ग्रामसभा पड़हा
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- ओर- करम करम करले बहीन..आईज तारीख 08 मार्च 2026 दिन एतवार के कुड़ुख़ टाइम्स डॉट कॉम कर पुनह परकाशन कर बेरा में टी आर एल ब्लॉग ले उरांव अखरा से तीन गो गावल गीत के नागपुरी भखा में बताल हय। इके धेयान देवब और गुनगुनाब अपने मन सउब – 1 ओर छोट-मोटे तेतईर गे आयो,भिंजल छांहईर गे आयो ।2।घुराल… Read more: ओर- करम करम करले बहीन..
- झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?राँची के कोर्नेलियस मिंज को लोग करन कहते हैं. उनका परिवार सरना आदिवासी था लेकिन बाद में ईसाई बन गया. हालाँकि कोर्नेलियस के घर में अब भी कई लोग सरना हैं. यह परिवार साथ में सरहुल भी मनाता है और क्रिसमस भी. आपस में शादियाँ भी होती हैं. करन कहते हैं कि जब सरना और… Read more: झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?
- झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानितरांची: आज दिनांक 21.02.2026 दिन शनिवार को प्रेस क्लब रांची में अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर अखिल झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार सम्मान 2026 झारखंड के 9 साहित्यकारों के रचनाकारों के साथ ओल चिकि लिपि के रचयिता श्रद्धेय पं रघुनाथ मुर्मू तथा वरांग चिति के रचयिता श्रद्धेय कोल लाको बोदरा को मरणोपरांत उनके वंशजों को… Read more: झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानित
- औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?आजादी के पचहत्तर साल बाद भी भारत अंग्रेज और अंग्रेजियत (औपनिवेशिक गुलामी) से मुक्त नहीं हुआ है”—इस उक्ति को यदि गहराई से समझें, तो यह किसी भौतिक गुलामी की नहीं बल्कि मानसिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक और वैचारिक गुलामी की ओर संकेत करती है। भारत ने 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता तो प्राप्त की, परंतु औपनिवेशिक सत्ता द्वारा… Read more: औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?
- हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते यह जानकर बहुत प्रेरणा मिलती है कि गुमला, रांची, लातेहार और लोहरदगा के युवा गणित (Maths) जैसे कठिन विषय को भी कुँड़ुख में ढाल रहे हैं। प्रसिद्ध अफ्रीकी लेखक चिंतक न्गुगी वा थ्योंगो ने हमेशा यही कहा कि – “भाषा केवल साहित्य के लिए नहीं, बल्कि विज्ञान और तर्क के लिए भी होनी चाहिए” ।… Read more: हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते
