Folklore
Tribal Life, History, Rituals, etc.
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दैवीय आंधी-तूफान ने तय किया आदिवासियों का जतरा स्थल

यह वीडियो गुमला जिला के पड़हा बैठक का है। यह बैठक नौ गांव के पड़हा संगठन के माध्यम से लगाये जा रहे पड़हा जतरा का मसला पर लगातार तीन दिनों तक बुलाया गया। यानी लगातार 2, 3 एवं 4 नवम्बर तक बैठक करने के बाद जो निर्णय हुआ उसका निष्कर्ष है। इस बैठक में निर्णय…
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आदिवासियों में मौसम पूर्वानुमान की विधि : Method of weather forecasting in tribal

आदिवासियों में मौसम पूर्वानुमान की विधि : Method of weather forecasting in tribal गुमला (सिसई) के एक कोटवार गजेेन्द्र उरांव बता रहे हैं आदिवासी समाज में अनूठी परंपरा है मौसम पूर्वानुमान की..
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आदिवासी परंपरानुगत अनुमान: औसत से कम वर्षा होने का मौसम पूर्वानुमान 2022

दिनांक 21.06.2022 दिन मंगलवार को उरागन डिप्पा, ग्राम : सैन्दा, थाना : सिसई, जिला : गुमला (झारखण्ड) में पारम्परिक ग्रामीण मौसम पूर्वानुमान कर्ता द्वारा वर्ष 2022 का मौसम पूर्वानुमान किया गया। पारम्परिक मौसम पूर्वानुमान कर्ता श्री गजेन्द्र उराँव, 65 वर्ष, ग्राम : सैन्दा, थाना : सिसई (गुमला) तथा श्री बुधराम उराँव, 66 वर्ष, ग्राम :…
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तोलोंग सिकि सिखाने की एक कला यह भी..

यह विडियो ऐतिहासिक पड़हा जतरा स्थल,मुड़मा, रांची में दिनांक १२मार्च से १४ मार्च २०२२ तक आयोजित कार्यशाला में कुंड़ुख़ भाषा एवं तोलोंग सिकि पढ़ने-पढ़ाने के तरीके को कविता के माध्यम से बतलाते हुए श्रीमती गीता उरांव..
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परम्परागत धुमकुड़िया प्रवेश दिवस (कोरना उल्ला) सम्पन्न

दिनांक 16 फरवरी 2022 दिन बुधवार को परम्परगत उरा¡व समाज द्वारा पौराणिक पारम्परिक पाठशाला धुमकुड़िया के रूप में माघ पुर्णिमा 2022 को गुमला जिला के सिसई थाना के सैन्दा ग्राम में रूढ़ी पम्परा पूजा विधि के साथ धुमकुड़िया प्रवेश दिवस मनाया गया। यह दिवस पर, ग्राम सैन्दा के बच्चे एवं बुजूर्ग उपस्थित थे। ज्ञात हो…
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कुंड़ुख़ भाषा में पहेलियों का प्रयोग

कुंड़ुख़ भाषा में पहेलियों का प्रयोग बखुबी होता है। बच्चों के लिए यह बौदि्धक एवं भाषा विकास का एक अनोखा तरीका है जिसे समाज में बच्चों को सिखलाया जाता है। आइये इसे जाने :–कुँड़ुख़ कत्थाu बुझवईल (उराँव भाषा में पहेलियाँ)1. एन्देर अमख़ी नानी, अम्म सिम्बी नत्ती, एन्दरा हिके ? – इंज्जो अमख़ी। 2. अतख़ा खसखस, ख़ंजपा…
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परम्परागत आदिवासी मौसम पूर्वानुमान का प्रथम चरण सही

गुमला जिला‚ सिसई थाना क्षेत्र के सैन्दा गांव निवासी श्री गजेन्द्र उराँव (65 वर्ष) एवं सियांग गांव निवासी श्री बुधराम उराँव (70 वर्ष) द्वारा मई महीने में वर्ष 2021 के लिए अपने क्षेत्र के आसपास मौसम के बारे में मौसम पूर्वानुमान किया गया था जो प्रथम चरण में सही साबित हुआ। पूर्वानुमान कर्ता द्वय द्वारा…
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कुँड़ुख़ गीत करम राग

प्रस्तुत कुँड़ुख़ गीत करम राग में ग्राम – जगदा, पोस्ट – झिरपाणी, राउरकेला-42 जिला – सुंदरगढ़, ओडिशा निवासी कुमारी सुमरी तिरकी द्वारा गाया गया है। मांदर बजाने वाले ग्राम लाठिकाटा जिला – सुंदरगढ़, ओडिशा के श्री दशरथ उरांव हैं तथा झुमका बजाने वाले ग्राम – जगदा, पोस्ट – झिरपाणी के श्री बांदे एक्का हैं। यह…
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कुँड़ुख़ गीत आसारी राग

प्रस्तुत कुँड़ुख़ गीत आसारी राग में ग्राम – जगदा, पोस्ट – झिरपाणी, राउरकेला-42 जिला – सुंदरगढ़, ओडिशा निवासी कुमारी सुमरी तिरकी द्वारा गाया गया है। मांदर बजाने वाले ग्राम लाठिकाटा जिला – सुंदरगढ़, ओडिशा के दशरथ उरांव हैं तथा झुमका बजाने वाले ग्राम – जगदा, पोस्ट – झिरपाणी के श्री बांदे एक्का हैं। यह गीत…
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कुड़ुख़ भाषा के महत्व पर चर्चा

कुड़ुख़ भाषा का महत्व के बारे में चर्चा करते हुए डा० नारायण उरांव एवं उनकी कविता तोलोंग सिकि तथा देवनागरी में लिप्यन्तपण | कुड़ुख़ भाषा का महत्व के बारे में चर्चा करते हुए डा० नारायण उरांव एवं उनकी कविता तोलोंग सिकि तथा देवनागरी में लिप्यन्तपण.. ruiwAs gaZe kA:loq (asAri rA:ge nu) ruiwAs gaZe purKar hi…
Latest Posts
- वर्षा अच्छी होगी इस साल : गजेन्द्र उरांवयह विडियो आदिवासी समाज से अर्जित ज्ञान के तरीके से मौसम भविष्यवाणी कर्ता श्री गजेन्द्र उरांव, उम्र 64 वर्ष, ग्राम सैन्दा, थाना सिसई जिला गुमला द्वारा दिनांक 24.05.2026 को शूट किया गया साक्षात्कार है। इस प्रकार का मौसम भविष्यवाणी, बाबा गजेन्द्र उरांव द्वारा विगत 12 वर्षों से किया जा रहा है। बाबा गजेन्द्र उरांव धान… Read more: वर्षा अच्छी होगी इस साल : गजेन्द्र उरांव
- उरांव लोकजीवन, लोककथाथा, लोकसाहित्य एवं उरांव इतिहासयह फोटो लातेहार जिले के महुआ टांड़ प्रखंड के अन्तर्गत बुढ़ा नदी ऊर्फ पचगी ख़ाड़ नदी, बोहटा नदी एवं ओरंगा नदी, सुगाबांध स्थान पर मिलकर सोन एवं गंगा में जाकर मिलती है। इसी तरह ओड़ंगा अंड़िया, कांस, परास, बंकी नदी दक्षिणी कोयल नदी के रूप में कारो एवं शंख नदी एक साथ बहते हुए राउरकेला… Read more: उरांव लोकजीवन, लोककथाथा, लोकसाहित्य एवं उरांव इतिहास
- KURUX PHONETIC READER कुड़ुख़ भाषा एवं व्याकरण को समझने के लिएयह पुस्तक KURUX PHONETIC READER के नाम से मई 1985 में CIIL MYSORE द्वारा प्रकाशित हुआ है। इसका प्रथम संस्करण का समय, 40 वर्ष एवं 10 महीने से अधिक है। आदिवासी भाषा में शोध कर रहे शोधकर्ताओं द्वारा इस पुस्तक की मांग को देखते हुए कुड़ुख़ भाषा विज्ञान की इस आधार स्तंभ पुस्तक को सामान्य… Read more: KURUX PHONETIC READER कुड़ुख़ भाषा एवं व्याकरण को समझने के लिए
- जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच का स्थापना दिवस संपन्नदिनांक 01.04.2026, दिन बुधवार को जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच का स्थापना दिवस फादर कामिल बुल्के पथ रांची में स्थित सत्यभारती के सभागार में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर नए अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चयन किया गया। समारोह में रांची विश्वविद्यालय के नागपुरी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. वीरेंद्र महतो को मंच का अध्यक्ष… Read more: जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच का स्थापना दिवस संपन्न
- कुड़ुख़ टाइम्स का 17वां अंक प्रकाशित हुआकुड़ुख़ टाइम्स का 17वां अंक आप पाठकों के सामने है। यह अंक अपने नये स्वरूप में आप पाठकों के लिए रोचक होगा। कुड़ुख़ संस्कृति एवं नेगचार को असम के डिब्रूगढ़ क्षेत्र में रहने वाले उरांव लोगों को जानिए। साथ ही तमिल-भाषी डॉ स्टीफन जी द्वारा इतिहास के पन्नों पर शोध परक लेख देखने को मिलेगा।… Read more: कुड़ुख़ टाइम्स का 17वां अंक प्रकाशित हुआ