Folklore
Tribal Life, History, Rituals, etc.
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युकेजी की बच्ची ने कुंड़ुख भाषा व तोलोंग सिकि में गीत गाया

यह विडियो दिनांक २४ अक्टूबर २०२५ को शूट किया हुआ, थाना – सिसई, जिला – गुमला, झारखंड के अन्तर्गत सोहदरी उरांव पब्लिक स्कूल, शिवनाथपुर डहुटोली का है। यहां पर, बच्चे स्कूल की पढ़ाई के साथ कुड़ुख़ भाषा एवं तोलोंग सिकि, लिपि में पढ़ते-लिखते हैं। इस विडियो में UKG एक बच्ची द्वारा कुड़ुख़ भाषा गीत गाकर
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झारखंड के शिवनाथपुर गांव (सिसई) में कुड़ंख यानी तोलोंग सिकि भाषा में गणित का पहाड़ा याद करते बच्चे

यह विडियो दिनांक २१ अक्टूबर २०२५ को शूट किया हुआ ग्राम शिवनाथपुर, थाना – सिसई, जिला – गुमला, झारखंड के धुमकुड़िया का है। यहां पर, बच्चे स्कूल की पढ़ाई के साथ कुड़ुख़ भाषा एवं तोलोंग सिकि, लिपि में पढ़ते-लिखते हैं। इस विडियो में एक बच्चे द्वारा 1 से 5 तक का पहाड़ा, कुड़ुख़ भाषा में
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चौंकाने वाली भविष्यवाणी है आदिवासी मौसम पूर्वानुमान कर्ता की
यह विडियो दिनांक 25.05.2025 को शूट किया गया आदिवासी मौसम विज्ञानी श्री गजेन्द्र उरांव उम्र 63 वर्ष ग्राम सैन्दा थाना सिसई जिला गुमला निवासी की है। मौसम पूर्वानुमान के बारे में उनका पूर्वानुमान विगत 12 वर्षों से सटीक रहा है। पिछले वर्ष 2024 में उन्होंने मौसम पूर्वानुमान में कहा था 2024 में वर्षा तीनों खण्ड
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Sarhul: A Celebration of Spring, Heritage, and Dravidian Roots

Sarhul: Introduction: Sarhul is a vibrant spring festival celebrated in Jharkhand, marking the beginning of the new year. Observed for three days, starting from the third day of the Chaitra month, it holds deep significance for the Kurukh / Oraon speaking Dravidian community. The name “Sarhul” likely originates from the Tamil word “Cālam” (சாலம்), which refers
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अंतर्राष्ट्रीय साहित्य उत्सव 2023 भोपाल, में पढ़ी गई कुंड़ुख (उरांव) कविताएं

डॉ नारायण उरांव ‘सैन्दा’ द्वारा अंतर्राष्ट्रीय साहित्य उत्सव 2023 भोपाल, में पढ़ी गई कुंड़ुख (उरांव) – हिन्दी अनुवाद कविताएं
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फागु सेंदेरा की मुण्डारी लोककथा

फागुन का महीना खत्म होने ही वाला है, होलिका दहन एवं उसके दूसरे दिन होली का त्योहार भारत के लगभग हर हिस्से में बहुत ही उल्लास और जोश के साथ मनाया जाता है, किंतु यदि मुंडा जनजाति( होडो) की आदिम परंपरा एवं लोक कथाओं पर नजर डाले तो फागू नेग एवं सेंदरा की परंपरा दिखाई
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गुमला मान्दर के संबंध में कुड़ुख़ (उरांव) भाषा में लोकगीत 2

gumlA mAnwar ke saMbaMW me kuzux (urAEv) lokgiq o:r – gumlA q Axe:l xe:nway ci ayo go,ju:zu jumurkA bwse laggo, re HH2HH Pe:r – gumlA xe:l xo:terA, yo,ju:zi CuturkA bese laggi, re HH2HHo:r – kahAE sirjalA ayo mAti kerA mAnwerA,kahAE sirjalA maTA Keiz HH2HH Pe:r – gumlA sirjalA ayo, mAti kerA manwerA,GAGrA sirjalA maTA Keiz
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मान्दर के संबंध में कुड़ुख़ (उरांव) भाषा में लोकगीत

mAnwar ke saMbaMW me kuzux (urAEv) lokgiqo:r – xe:l niXhay xoterA ju:zi,be:cA barLoy kA malA, re HH2HHPe:r – barA huE barLon, malA huE barLon.xe:r ciE:xo bA:ri barLon, re HH2HHo:r – xe:l xenwA kA:way wawA,u:xA-mA:xA nu kA:way, re HH2HHPe:r – mukkA xenwA kA:way wawA,caNwwo billi nu kA:way, re HH2HHo:r – Cote nu xe:l xenwoy wawA,parawoy hole
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एंग सईहा : एक कविता कुंड़ुख में..

एंग सईहा अक्कु नीन गेच्छम ओक्कर ओत्ख़ीम रअ़दी,ह’ई एन अख़एन निंग्गन,का नीन नेख़य तीम ईदरिम मला बअ़दी।होरमर ती नुड़दी ससईतन,अरा सहआगे सीखरआ लगदी छछेम रअर नीन।एन्देरगे का ईद मुक्कर गहि मेद जे तली ।मे:द ता हुरमी गोट बदलारना हूं ओंटे-ओंटे नुंजनन अख़तिई।इन्ना नीन इवंदा कोंहा परदकी एन्देर अख़ओय नीन एन्दरा- एन्दरा सहचकी होतंग,सन्नी पूंप ती अयंग छांव
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ग्रामीण मौसम भविष्य-वक्ता का पूर्वानुमान 2024
विगत 10 साल से ग्रामीण इलाकों में प्रक़ति की वस्तुओं को देखकर मौसम पूर्वानुमान करने वाले 65 वर्षीय श्री गजेन्द्र उरांव ने साल 2024 का मौसम पूर्वानुमान बतलाया है। उन्होंने कहा कि इस साल 2024 में बरखा तीनों पाली में होगा । इससे फसल अच्छी होगी। ग्रामीण मौसम पूर्वानुमान कर्ता द्वारा बरखा को तीन भाग
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- ओर- करम करम करले बहीन..आईज तारीख 08 मार्च 2026 दिन एतवार के कुड़ुख़ टाइम्स डॉट कॉम कर पुनह परकाशन कर बेरा में टी आर एल ब्लॉग ले उरांव अखरा से तीन गो गावल गीत के नागपुरी भखा में बताल हय। इके धेयान देवब और गुनगुनाब अपने मन सउब – 1 ओर छोट-मोटे तेतईर गे आयो,भिंजल छांहईर गे आयो ।2।घुराल… Read more: ओर- करम करम करले बहीन..
- झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?राँची के कोर्नेलियस मिंज को लोग करन कहते हैं. उनका परिवार सरना आदिवासी था लेकिन बाद में ईसाई बन गया. हालाँकि कोर्नेलियस के घर में अब भी कई लोग सरना हैं. यह परिवार साथ में सरहुल भी मनाता है और क्रिसमस भी. आपस में शादियाँ भी होती हैं. करन कहते हैं कि जब सरना और… Read more: झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?
- झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानितरांची: आज दिनांक 21.02.2026 दिन शनिवार को प्रेस क्लब रांची में अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर अखिल झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार सम्मान 2026 झारखंड के 9 साहित्यकारों के रचनाकारों के साथ ओल चिकि लिपि के रचयिता श्रद्धेय पं रघुनाथ मुर्मू तथा वरांग चिति के रचयिता श्रद्धेय कोल लाको बोदरा को मरणोपरांत उनके वंशजों को… Read more: झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानित
- औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?आजादी के पचहत्तर साल बाद भी भारत अंग्रेज और अंग्रेजियत (औपनिवेशिक गुलामी) से मुक्त नहीं हुआ है”—इस उक्ति को यदि गहराई से समझें, तो यह किसी भौतिक गुलामी की नहीं बल्कि मानसिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक और वैचारिक गुलामी की ओर संकेत करती है। भारत ने 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता तो प्राप्त की, परंतु औपनिवेशिक सत्ता द्वारा… Read more: औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?
- हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते यह जानकर बहुत प्रेरणा मिलती है कि गुमला, रांची, लातेहार और लोहरदगा के युवा गणित (Maths) जैसे कठिन विषय को भी कुँड़ुख में ढाल रहे हैं। प्रसिद्ध अफ्रीकी लेखक चिंतक न्गुगी वा थ्योंगो ने हमेशा यही कहा कि – “भाषा केवल साहित्य के लिए नहीं, बल्कि विज्ञान और तर्क के लिए भी होनी चाहिए” ।… Read more: हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते