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‘तोलोंग सिकि वर्णमाला’ का संशोधित स्वरूप जून 1997 को

‘ग्राफिक्स ऑफ तोलोंग सिकि’ नामक पुस्तिका के लोकार्पण के अवसर पर दिनांक 05 मई 1997 को राँची विश्वविद्यालय, राँची के पूर्व कुलपति तथा जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के विभगाध्यिक्ष भाषाविद डॉ. रामदयाल मुण्डा ने कहा कि – ‘ग्राफिक्स ऑफ तोलोंग सिकि’ पुस्तिका में प्रस्तुत वर्णमाला संस्कृत-हिन्दी की तरह है। आदिवासी भाषा की लिपि के…
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कुँड़ुख़ तोलोंग सिकि के विकास की परिकल्पना 1989 में दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल‚ लहेरियासराय (बिहार) से हुआ

ज्ञातव्य है कि डॉ० नारायण उराँव का आवश्यक इंटरर्नशीप अवधि दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, लहेरियासराय (बिहार) में एम.बी.बी.एस. की परीक्षा पास करने के बाद फरवरी 1989 से फरवरी 1990 तक था। उस इंटर्नशीप अवधि में उन्होंने अपने चिकित्सीय कार्य के अतिरिक्त आदिवासी समाज के कई सामयिक प्रष्नों के प्रत्युत्तर में एक पुस्तक लिखी‚ जिसका…
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सर्वप्रथम 07 अक्टूबर 1993 को हिन्दी दैनिक ‘आज’ में तोलोङ सिकि के संबंध में विस्तृत लेख छपा

ज्ञातब्य है कि झारखण्ड अलग प्रांत आन्दोलन के छात्र नेताओं एवं बुदि्धजीवियों की राय थी कि आदिवासी भाषाओं की पहचान के लिए एक नई लिपि का विकास हो, पर यह कैसे हो या कौन करे, इस विषय पर सभी मौन रहे। इसी बीच पेशे से चिकित्सीक डॉ० नारायण उराँव द्वारा इस दिशा में कार्य किया…
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कुँड़ुख़ तोलोङ सिकि को पहली बार आदिवासी समाज के सामने 24 सितम्बर 1993 को रखा गया

ज्ञातब्य है कि कुँड़ुख़ भाषा, झारखण्ड में द्वितीय राजभाषा एवं प० बंगाल में Official language के रूप में मान्यता प्राप्त है। झारखण्ड सरकार द्वारा वर्ष 2011 में कई भाषाओं को द्वितीय राजभाषा का मान्यता दिया गया, जिनमें से कुँड़ुख़ भाषा भी एक है। इसी तरह 2018 में प० बंगाल में कई भाषाओं को Official language…
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सकलराम तिरकी को बंगाल कैसे मिला 1500 एकड़ का खतियानी जमींदारी?

वर्तमान लोहरदगा जिला‚ कुड़ू थाना क्षेत्र के जिंगरी जोंजरो गांव के रहने वाला सकलराम तिरकी‚ एक उरांव परिवार में जन्मा् एवं पला–बढ़ा तथा एक मजदूर किसान का बेटा को जब अपने गांव–परिवार की गरीबी में अपने गांव से दूर जाने के लिए विवस होना पड़ा तो वह रास्ता ढूँढ़ते हुए बंगाल के पहाड़ी क्षेत्र अर्थात…
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कुँड़ुख़ भाषा की लिपि‚ तोलोंग सिकि है – बिहार जनजातीय कल्याण शोध संस्थान

ज्ञात हो कि बिहार जनजातीय कल्याण शोध संस्थान‚ मोरहाबादी‚ राँची के सभागार में “कुँडख़ भाषा-साहित्य-लिपि : दशा और दिशा” विषयक कार्यशाला दिनांक 19 सितम्बर 1998‚ दिन शनिवार को सम्पन्न हुआ। यह कार्यशाला‚ जनजातीय कल्याण शोध संस्थान‚ राँची तथा बिहार शिक्षा परियोजना‚ रातू‚ रांची के संयुक्त तत्वधान में बुलाया गया था। इस कार्यशाला में जनजातीय कल्याण…
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तोलोंग सिकि (लिपि) का आधार

तोलोंग सिकि एक वर्णात्मक लिपि है। इसमें‚ उच्चारण के अनुसार लिखा एवं पढ़ा जाता है। इसमें हलन्त का प्रयोग नहीं होता है। इस लिपि को कुँड़ुख़ भाषियों ने कुँड़ुख़ भाषा की लिपि की सामाजिक स्वीकृति प्रदान की है तथा झारखण्ड सरकार द्वारा कुँड़ुख़ भाषा की लिपि की वैधानिक मान्यता देकर विद्यालयों में पठन-पाठन का अवसर…
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झारखण्ड आंदोलनकारियों की मांग पर आदिवासी भाषा की लिपि ‘तोलोङ सिकि’ पर भाषाविद डॉ॰ फ्रांसिस एक्का से विमर्श

झारखण्ड आंदोलनकारियों की मांग पर आदिवासी भाषा की नई लिपि तोलोङ सिकि, विषय पर भाषाविद डॉ॰ फ्रांसिस एक्का से विमर्श : झारखण्ड आंदोलनकारियों की मांग पर आदिवासी भाषा की नई लिपि तोलोङ सिकि, विषय पर विचार–विमर्श करने के लिए केन्द्रीसय भारतीय भाषा संस्थासन‚ मैसूर (भारत सरकार) के भाषाविद‚ प्रोफेसर सह निदेशक डॉ॰ फ्रांसिस एक्का से मैं…
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सैन्दां धुमकुड़िया में कुड़ुख़ भाषा एवं तोलोंग सिकि

धुमकुड़िया सैन्दां, सिसई, गुमला में बच्चों को कुड़ुख़ भाषा एवं तोलोंग सिकि सिखलाते हुए शिक्षक एवं छात्रगण धुमकुड़िया सैन्दां, सिसई, गुमला में बच्चों को कुड़ुख़ भाषा एवं तोलोंग सिकि सिखलाते हुए शिक्षक एवं छात्रगण धुमकुड़िया सैन्दां, सिसई, गुमला में बच्चों को कुड़ुख़ भाषा एवं तोलोंग सिकि सिखलाते हुए शिक्षक एवं छात्रगण धुमकुड़िया सैन्दां, सिसई, गुमला में बच्चों को…
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संस्कृत, हिन्दी एवं कुँड़ुख़ भाषा का वर्णमाला : एक तुलनात्मक अध्ययन

यह आलेख‚ कुँड़ुख़ भाषा की लिपि तोलोंग सिकि की वर्णमाला के साथ संस्कृत एवं हिन्दी भाषा की लिपि देवनागरी की वर्णमाला के साथ एक तुलनात्मक अध्ययन है। इस लेख के माध्यम से कुँड़ुख़ भाषा की लिपि के संबंध में उठने वाले कई प्रश्नों के उत्तर को समझने का प्रयास है। संस्कृत, हिन्दी एवं कुँड़ुख़ भाषा…
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- वर्षा अच्छी होगी इस साल : गजेन्द्र उरांवयह विडियो आदिवासी समाज से अर्जित ज्ञान के तरीके से मौसम भविष्यवाणी कर्ता श्री गजेन्द्र उरांव, उम्र 64 वर्ष, ग्राम सैन्दा, थाना सिसई जिला गुमला द्वारा दिनांक 24.05.2026 को शूट किया गया साक्षात्कार है। इस प्रकार का मौसम भविष्यवाणी, बाबा गजेन्द्र उरांव द्वारा विगत 12 वर्षों से किया जा रहा है। बाबा गजेन्द्र उरांव धान… Read more: वर्षा अच्छी होगी इस साल : गजेन्द्र उरांव
- उरांव लोकजीवन, लोककथाथा, लोकसाहित्य एवं उरांव इतिहासयह फोटो लातेहार जिले के महुआ टांड़ प्रखंड के अन्तर्गत बुढ़ा नदी ऊर्फ पचगी ख़ाड़ नदी, बोहटा नदी एवं ओरंगा नदी, सुगाबांध स्थान पर मिलकर सोन एवं गंगा में जाकर मिलती है। इसी तरह ओड़ंगा अंड़िया, कांस, परास, बंकी नदी दक्षिणी कोयल नदी के रूप में कारो एवं शंख नदी एक साथ बहते हुए राउरकेला… Read more: उरांव लोकजीवन, लोककथाथा, लोकसाहित्य एवं उरांव इतिहास
- KURUX PHONETIC READER कुड़ुख़ भाषा एवं व्याकरण को समझने के लिएयह पुस्तक KURUX PHONETIC READER के नाम से मई 1985 में CIIL MYSORE द्वारा प्रकाशित हुआ है। इसका प्रथम संस्करण का समय, 40 वर्ष एवं 10 महीने से अधिक है। आदिवासी भाषा में शोध कर रहे शोधकर्ताओं द्वारा इस पुस्तक की मांग को देखते हुए कुड़ुख़ भाषा विज्ञान की इस आधार स्तंभ पुस्तक को सामान्य… Read more: KURUX PHONETIC READER कुड़ुख़ भाषा एवं व्याकरण को समझने के लिए
- जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच का स्थापना दिवस संपन्नदिनांक 01.04.2026, दिन बुधवार को जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच का स्थापना दिवस फादर कामिल बुल्के पथ रांची में स्थित सत्यभारती के सभागार में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर नए अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चयन किया गया। समारोह में रांची विश्वविद्यालय के नागपुरी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. वीरेंद्र महतो को मंच का अध्यक्ष… Read more: जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच का स्थापना दिवस संपन्न
- कुड़ुख़ टाइम्स का 17वां अंक प्रकाशित हुआकुड़ुख़ टाइम्स का 17वां अंक आप पाठकों के सामने है। यह अंक अपने नये स्वरूप में आप पाठकों के लिए रोचक होगा। कुड़ुख़ संस्कृति एवं नेगचार को असम के डिब्रूगढ़ क्षेत्र में रहने वाले उरांव लोगों को जानिए। साथ ही तमिल-भाषी डॉ स्टीफन जी द्वारा इतिहास के पन्नों पर शोध परक लेख देखने को मिलेगा।… Read more: कुड़ुख़ टाइम्स का 17वां अंक प्रकाशित हुआ