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  • आदिवासी भाषाएं – दशा और दिशा : एक वैचारिक अध्‍ययन

    आदिवासी भाषाएं – दशा और दिशा : एक वैचारिक अध्‍ययन

    दिनांक 17-18 दिसम्‍बर 2022 को ”आदिवासी भाषाएं – दशा और दिशा : एक वैचारिक अध्‍ययन” विषय पर राज्‍य स्‍तरीय दो दिवसीय स्रममेलन, जेवियर कॉलेज, रांची के प्रांगन में सम्‍पन्‍न हुआ।   इस सम्‍मेलन में दिनांक 18 दिसम्‍बर 2022 दिन रविवार को ”झारखण्‍ड में आदिवासी भाषाएं” विषय पर डॉ. नारायण उरांव ‘सैन्‍दा’ द्वारा अपने विचार प्रस्‍तुत

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  • ‘चिंचों डण्डी अरा ख़ीःरी’ पुस्तक, कुँड़ुख़ (उराँव) भाषा में प्रकाशित

    ‘चिंचों डण्डी अरा ख़ीःरी’  पुस्तक, कुँड़ुख़ (उराँव) भाषा में प्रकाशित

    चिंचों डण्डी अरा ख़ीःरी नामक यह पुस्तक, कुँड़ुख़ (उराँव) भाषा में प्रकाशित पुस्तक है। चिंचों डण्डी अरा ख़ीःरी का शाब्दिक अर्थ बाल कविता एवं कहानी है। यह पुस्तक, कुँड़ुख़ (उराँव) भाषा की लिपि, तोलोंग सिकि एवं देवनागरी लिपि में प्रस्तुत है। इस लिपि का शोध-संकलन एवं अनुसंधान, एक एम.बी.बी.एस. चिकित्‍सक डॉ. नारायण उराँव ‘सैन्दा’ द्वारा

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  • कुंड़ुख टाइम्‍स त्रैमासिक पत्रिका का चतुर्थ (4th)अंक प्रकाशित हुआ

    कुंड़ुख टाइम्‍स त्रैमासिक पत्रिका का चतुर्थ (4th)अंक प्रकाशित हुआ

    कुंड़ुख टाइम्‍स त्रैमासिक पत्रिका का चतुर्थ (4th)अंक प्रकाशित हो गया है। यह अंक ‘बिसुसेन्‍दरा विशेषांक’ है। यह अंक Tata Steel Foundation के ‘ट्राइबल कल्‍चरल सोसायटी’ के सहयोग से तैयार किया गया है। इस अंक में आप पढ़ेंगे तोलोंग सिकि के आधार के बारे में। साथ ही इसके वर्णमाला के बारे में। चर्चा होगी पड़हा के परंपरागत

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  • मन्दर बिरो- झारखंड राज्य की पारंपरिक चिकित्सा

    मन्दर बिरो- झारखंड राज्य की पारंपरिक चिकित्सा

    ‘मन्दर बिरो’ कुड़ुख शब्द है, जिसका अर्थ है – औषधि द्वारा उपचार करना। पारंपरिक चिकित्सा शैली जिसमें वैद्य ( मन्दर-अख़ ‘उस ) द्वारा बीमारी को दूर करने या कम करने के लिए रोगी ( मन्दा ) को जड़ी-बूटी, चूरन या दवा के रूप में औषधि ( मन्दर ) दी जाती है। उपयोग में लाए गए

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  • कुंड़ुख टाइम्‍स पत्रिका / अंक 03 अप्रैल से जून 2022

    कुंड़ुख टाइम्‍स पत्रिका / अंक 03 अप्रैल से जून 2022

    कुंड़ुख टाइम्‍स पत्रिका का 3रा अंक (अप्रैल से जून 2022) यहां पीडीएफ में उपलब्‍ध है। पढें.. जरूरत है तो डाउनलोड भी कर सकते हैं। 

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  • सरना समाज और उसका अस्तित्व : एक पुस्‍तक चर्चा

    सरना समाज और उसका अस्तित्व : एक पुस्‍तक चर्चा

    ‘‘सरना समाज और उसका अस्तित्व’’ नामक इस छोटी पुस्तिका में आदिवासी उराँव समाज की जीवन यात्रा का वृतांत है, जो भारत देश की आजादी के दो दशक बाद, उराँव लोग विषम परिस्थिति में अपने पुर्वजों की धरोहरों को सहेजते हुए देश की मुख्यधारा के साथ चलने का प्रयास कर रहे थे। देश की आजादी के

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  • ‘कुँड़ुख़ व्याकरण की पारिभाषिक शब्दावली‘ विषयक एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न

    ‘कुँड़ुख़ व्याकरण की पारिभाषिक शब्दावली‘ विषयक एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न

    दिनांक 01 मई 2022, दिन रविवार को आदिवासी उराँव समाज समिति, बिरसा नगर, जोन न०-6, जमशेदपुर में ‘‘कुँड़ुख़ व्याकरण की पारिभाषिक शब्दावली‘‘ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न हुआ। यह कार्यशाला, टाटा स्टील फाउण्डेशन, जमशेदपुर के तकनीकि सहयोग से संचालित ‘‘कुँड़ुख़ (उराँव) भाषा एवं लिपि शिक्षण कार्यक्रम‘‘ का अग्रेतर क्रियान्वयन था। इस कार्यशाला में आदिवासी

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  • कुंड़ुख टाइम्‍स डॉट कॉम का 2रा प्रिंट एडिशन आ गया..

    कुंड़ुख टाइम्‍स डॉट कॉम का 2रा प्रिंट एडिशन आ गया..

    कुंड़ुख टाइम्‍स डॉट काम के प्रिंट एडिशन का दूसरा अंक प्रस्‍तुत है। इस अंक में हमने कई महत्‍वपूर्ण विषयों को समेटा है। कुंड़ुख भाषा की लिपि तोलोंग सिकि के आयामों पर व्‍यापक चर्चा शामिल है। तोलोंग सिकि की नींव का अपना एक इतिहास है। जी हां, आपने ठीक याद किया, झारखंड अलग राज्‍य आंदोलन। इस

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  • कुंड़ुखटाइम्‍स.कॉम का प्रथम प्रिंट एडिशन

    कुंड़ुखटाइम्‍स.कॉम का प्रथम प्रिंट एडिशन

    आपको तो पता है कि कुंड़ुखटाइम्‍स.कॉम लम्‍बे समय से आपको कुंड़ुख जगत की खबरें, सूचनाएं और शोध आदि संबंधित सामग्री ऑनलाइन उपलब्‍ध कराता रहा है। अब ऑनलाइन के अलावा हम इसका प्रिंट एडिशन भी प्रकाशित कर रहे हैं। आशा है आपको पसंद आयेगा। आज प्रस्‍तुत है कुंड़ुखटाइम्‍स.कॉम का प्रथम प्रिंट एडिशन। आप इसे चाहें तो

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  • धार्मिक उपनिवेशवाद और पारम्परिक उराँव (कुँड़ुख़) समाज

    धार्मिक उपनिवेशवाद और पारम्परिक उराँव (कुँड़ुख़) समाज

    उपनिवेशवाद का अर्थ है – किसी समृद्ध एवं शक्तिशाली राष्ट्र द्वारा अपने विभिन्न हितों को साधने के लिए किसी निर्बल किन्तु प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण राष्ट्र के विभिन्न संसाधनों का शक्ति के बल पर उपभोग करना। यहाँ धार्मिक उपनिवेशवाद का अर्थ है – कमजोर और असंगठित समाज को अपने धार्मिक संगत में मिलाकर उसके सांस्कृतिक विरासत

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