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धुमकुड़िया महबा उल्ला 2025 सैंदा में संपन्न हुआ

दिनांक 09/02/2025 को ग्राम – सैंदा, जिला गुमला में धुमकुड़िया कोरना- पूरना (प्रवेश-विदाई) का समारोह सम्पन्न हुआ। इस समारोह में बच्चे, बड़े बच्चे एवं बड़े बुजुर्ग उपस्थित हुए। यह आयोजन प्रतिवर्ष माघ महीने के शुक्ल पक्ष में हुआ करता है। इस वर्ष यह आयोजन शुक्ल पक्ष में रविवार के दिन दिनांक 09.02.2025 को ग्रामीणों के
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देवनागरी लिपि का आधार : एक चर्चा
यह विडियो दिनांक 30.01.2025 दिन बृहस्पतिवार को शूट किया गया है। यह विडियो कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा के वेद विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ विनय कुमार मिश्रा एवं कुड़ुख़ तोलोंग सिकि लिपि के सर्जक डॉ नारायण उरांव सैन्दा के बीच हुई बातचीत का अंश है। इस बातचीत में देवनागरी लिपि का आधार विषय पर
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मुझे प्रसार भारती, नई दिल्ली द्वारा हवाई जहाज का टिकट भेजा गया : अरविंद उरांव

रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा कुँडुख स्कूल, मंगलो, सिसई, गुमला के प्रधानाचार्य श्री अरविंद उराँव एवं उनकी पत्नी श्रीमती शांति उराँव को गणतंत्र दिवस समारोह 2025 में स्पेशल गेस्ट के रूप में आमंत्रित किया गया। गणतंत्र दिवस समारोह 2025 में रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा स्पेशल गेस्ट के रूप में आमंत्रित किए जाने पर समारोह
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कुँडुख स्कूल मंगलो अब होगा आवासीय, कुँडुख भाषा को व्यवहार में लाना होगा आसान

कुद्दोय न बेद्दोय ओक्कोय न ख़क्खोय ,पुरखर घी आ:इनका कत्था। हम सभी कुँडुख़ समुदाय को उन्हे कुँडुख थिंकर की उपाधि देनी चाहिए। उपाधि हमारे कुँडुख भाषा को उंचाई तक ले जाने में एक साथी रुप में प्रस्तुत होगा। कभी कभी मैं आश्चर्यचकित हुआ हूँ कि सुनने में मार्ग दर्शन-भार जैसे फिलिंग हुई। लेकिन बताए मार्ग
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The Historical Significance of Rohtasgarh and Oraons

Rohtasgarh is a historical place of significant value for the Oraon tribe. The Oraon, or Kurukh, are one of the largest tribal groups in Eastern India. There is some geographical situation in this mountain towards Son River where several descending roots descend down from up. These roots called as Ruih in Kurukh/Oraon language. So the mountain become famous as
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ताेलाेंङ सिकि कुंड़ुख़ व्याकरण संबंधी आवश्यक जानकारी

देवनागरी लिपि से कुंड़ुख भाषा की सभी ध्वनियों को ज्यों का त्यों लिखने में कठिनाई होती है । अतः देवनागरी लिपि के मूल सिद्धांत ‘एक ध्वनि एक संकेत’ के अनुसार तथा पुनरूक्ति दोष से बचने हेतु प्रचलित ध्वनि चिह्न के नीचे या उपर भाषा विज्ञान एवं तकनीकि सम्मत, पूरक चिह्न देकर पढ़ने एव लिखने के तरीके को तोलोंग सिकि में अपनाया गया है,
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क्या राज्य सरकार को पंचायत अधिनियम या पेसा पर कानून बनाने का अधिकार है?

पेसा कानून की नियमावली, पेसा कानून,1996 के मूल प्रावधानों के ही आलोक में बनाना है पर लोगो में कुछ भरम की स्थिति है । एक छोटा सा प्रयास है इसको दूर करने का ।जैसे, अस्पष्टता और भ्रम के निम्न बिंदु हैं। 1. पी पेसा या पेसा? पी-पेसा या पेसा कहने से पेसा कानून,1996 की मूल
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गुमला में ‘डहुड़ा कुद्दना हंका’ का आयोजन

दिनांक – 05/01/2025, दिन- रविवार को स्थान- पड़हा पिण्डा, छोटका सैन्दा, टूकू टोली, सिसई, गुमला में ‘डहुड़ा कुद्दना हंका’ का आयोजन हुआ। जिसका विषय – कुंड़ख़र पद्दा पंच्चा, पड़हा पंच्चा, बेल पंच्चा और सरकारी न्यायालय व्यवस्था रहा। तीन संगी पड़हा (9+6+7 = 22 पड़हा ) की प्रतिनिधियों की उपस्थिति देखी गई। मुख्य वक्ताओं में डॉ
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परंपरागत ग्रामसभा पड़हा बिसुसेन्दरा गुमला मंडल के सम्मेलन के अनुसार दिशा निर्देश

भारतीय संसद द्वारा पारित पेसा कानून 1996 की धारा 4(d) के तहत दिनांक 18 एवं 19 मई 2024 को 22 गांवों के सदस्यों द्वारा ‘परम्परागत ग्रामसभा पड़हा बिसुसेन्दरा, गुमला मण्डल’ का दो दिवसीय सम्मेलन पड़हा पिण्डा ग्राम सैन्दा, थाना सिसई जिला गुमला (झारखंड) में संपन्न हुआ और सम्मेलन की उपलब्धि को आम लोगों के अनुपालन
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झारखण्ड के गुमला शहर के नामकरण की अवधारणा

पुरखर बाःचका रअ़नर – कुद्दोय ना बेद्दोय, ओक्कोय ना ख़क्खोय अर्थात घुमोगे (ढूँढ़ोगे) तो खोजोगे (पाओगे), बैठोगे यानी संगत में बैठोगे तो ज्ञान हासिल करोगे। तथ्य है कि झारखण्ड राज्य में गुमला नामक एक जिला है, जिसका मुख्यालय गुमला है। गुमला जिला के गुमला शहर का नामकरण की अवधारणा के बारे में कई बुजूर्ग अलग-अलग
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- जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच का स्थापना दिवस संपन्नदिनांक 01.04.2026, दिन बुधवार को जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच का स्थापना दिवस फादर कामिल बुल्के पथ रांची में स्थित सत्यभारती के सभागार में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर नए अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चयन किया गया। समारोह में रांची विश्वविद्यालय के नागपुरी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. वीरेंद्र महतो को मंच का अध्यक्ष… Read more: जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विकास मंच का स्थापना दिवस संपन्न
- कुड़ुख़ टाइम्स का 17वां अंक प्रकाशित हुआकुड़ुख़ टाइम्स का 17वां अंक आप पाठकों के सामने है। यह अंक अपने नये स्वरूप में आप पाठकों के लिए रोचक होगा। कुड़ुख़ संस्कृति एवं नेगचार को असम के डिब्रूगढ़ क्षेत्र में रहने वाले उरांव लोगों को जानिए। साथ ही तमिल-भाषी डॉ स्टीफन जी द्वारा इतिहास के पन्नों पर शोध परक लेख देखने को मिलेगा।… Read more: कुड़ुख़ टाइम्स का 17वां अंक प्रकाशित हुआ
- कुडुख़ भाषा की लिपि “तोलोड सिकि” में कुडुख़ प्रवेशिका पुस्तक “अयंग कोंयछा” प्रकाशितकुडुख़ भाषा की लिपि “तोलोड सिकि” में कुडुख़ प्रवेशिका पुस्तक “अयंग कोंयछा” केतृतीय संस्करण के प्रकाशन पर मुझे एक विशिष्ट उर्जा की अनुभूति हो रही है। मैं अपने छात्र जीवनके समय में वर्ष 1989 में कुडुख़ समाज की स्थिति के बारे विचार करते हुए कुडुख़ भाषा एवं संस्कृतिके संरक्षण तथा संवर्द्धन हेतु कार्य करने का… Read more: कुडुख़ भाषा की लिपि “तोलोड सिकि” में कुडुख़ प्रवेशिका पुस्तक “अयंग कोंयछा” प्रकाशित
- Kurukh Times की डिजिटल पत्रिका अंक 16 प्रकाशित हुआपूर्व के अंकों की तरह पत्रिका का 16वां अंक प्रकाशित हो गया है। इसमें तोलोंग सिकि लिपि में रोचक सामग्री शामिल किये गय हैं। आशा है अन्य अंकों की तरह इस अंक को भी आपका भरपूर प्यार मिलेगा। इसे आप इस पन्ने पर देख सकते हैं। आप चाहें तो इसे अपने पीसी या मोबाइल में… Read more: Kurukh Times की डिजिटल पत्रिका अंक 16 प्रकाशित हुआ