admin
-
संस्कृत-हिन्दी शब्दों को तोलोंग सिकि में लिप्यन्तरण हेतु जानकारियाँ

ध्यातब्य हो कि आदिवासी भाषाओं में से कुँड़ुख़ भाषा की अपनी विशिष्ट शैली एवं विशेषताएँ हैं। इस विशिष्ट पहचान पर आधारित इस भाषा की लिपि, तोलोंग सिकि विकसित हुर्इ है। यह तथ्य है कि कुँड़ुख़ भाषा में कर्इ ध्वनियाँ है जिसे दिखलाने के लिए रोमन एवं देवनागरी लिपि में लिपि चिन्ह नहीं हैं। रोमन लिपि
-
देवनागरी में कुँड़ुख़ भाषा की लेखन समस्या और समाधान

कुँड़ुख़ भाषा की लेखन समस्या और गिनती को सुगम एवं सरल करने हेतु अब तक कर्इ पहल हुए। इस क्रम में दिनांक 26.08.2000 को जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग, राँची विश्वविद्यालय, राँची के सभागार में सम्पन्न हुए कार्यशाला में शून्य (0) का नामकरण ‘निदि’ रखा गया। उसके बाद दिनांक 24.09.2001 को पुन: जनजातीय एवं क्षेत्रीय
-
5वीं अनुसूची क्रियान्वयन को लेकर रांची हाईकोर्ट के सामने पत्थलगड़ी करने जुटे आदिवासी

रांची (झारखंड): पांचवीं अनुसूचित क्षेत्रों में संविधान सम्मत क्रियांवयन करने की मांग को लेकर रांची, खूंटी व गुमला से आये करीब साढ़े तीन हजार आदिवासियों ने यहां डोरंडा स्थित हाईकोर्ट के सामने पत्थलगड़ी करने पर अड़ गये। उनकी घंटों प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों के बहस चली। आंदोलनकारी आदिवासी मांग कर रहे थे कि संविधान के
-
सिसई में 65 वर्षीय बाइस पड़हा के नेता कैलाश उरावं की हत्या

गुमला (झारखंड) : जिला के सिसई स्थित छारदा पतरा गांव के समीप रविवार रात करीब 8:30 बजे सैंदा टुकूटोली निवासी 22 पड़हा के अगुआ (मुख्य नेता) कैलाश उरांव (65) की हत्या कर दी गयी। उनके भतीजे सोमा उरांव (65) का पैर काट कर गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। यह हमला टांगी (धारदार उपकरण)
-
स्कूली बच्चों ने मनाया तोलोंग सिकि कुंड़ुख़ भाषा सप्ताह दिवस 2

स्कूली बच्चों ने मनाया तोलोंग सिकि कुंड़ुख़ भाषा सप्ताह दिवस
-
स्कूली बच्चों ने मनाया तोलोंग सिकि कुंड़ुख़ भाषा सप्ताह दिवस

यह विडियो बीर बुधु भगत कुड़ुख़ स्कूल, छोटका सैन्दा, गुमला के बच्चों के कार्यक्रम का है। यह अवसर तोलोंग सिकि कुंड़ुख़ भाषा सप्ताह दिवस का पहला दिन १२-२-२०२१ है। यह आयोजन कार्तिक उरांव बाल विकास विद्यालय, सिसई, गुमला के प्रांगण में हुआ। इस स्कूल के बच्चे कुड़ुख़ भाषा की पढ़ाई, तोलोंग सिकि लिपि में करते
-
कुँड़ुख़ (तोलोंग सिकी) का निरंतर प्रसार : एक शॉर्ट वीडियो

यह विडियो जतरा टाना भगत विद्या मंदिर, विशुनपुर, गुमला का है। यहां कुड़ुख़ भाषा की पढ़ाई तोलोंग सिकि लिपि में होती हैं। झारखंड सरकार द्वारा तोलोंग सिकि में परीक्षा लिखने की अनुमति मिलने के बाद से ही यहां कुड़ुख़ की पढ़ाई तोलोंग सिकि में आरंभ हुई है। रिपोर्टर – भुवनेश्वर उरांव।
-
Adiwasi Bhawan Bhawan Inaugurated by CM Mamta at Kolkata

Adiwasi Bhawan was the long waited dream of the Tribal people of west Bengal. Now the dream is fulfilled by inaugurating Adiwasi Bhawan by honorable Chief Minister Miss. Mamta Banarjee on 28 January 2021. This is one of the best architectural building in Kolkata. It is of 8 floor building consisting of office space, dormitory
-
कुँड़ुख़़-हिन्दी शब्दकोष और कुँड़ुख़ संस्कारों पर तीन पुस्तकों का लोकार्पण संपन्न

झारखण्ड की राजधानी राँची में स्थित डा रामदयाल मुण्डा जनजातीय शोध संस्थान, मोरहाबादी के सभागार में कुँड़ुख़ भाषा एवं सामाजिक पहलूओं से जुड़ी तीन पुस्तकों का विमोचन किया गया। पहली पुस्तक स्व विजय उराँव द्वारा लिखित – कुँड़ुख़-हिन्दी शब्दकोष है। दूसरी पुस्तक श्री बहुरा उराँव द्वारा रचित – कुँड़ुख़ (उराँव) समाज में जन्म विवाह एवं
-
अनेक बाधाओं के बावजूद कीर्तिमान की मुख्य धारा में गोते लगा रहे हैं आदिवासी

जब हम आदिवासी युवाओं की ओर देखते हैं तो लगता है उनके सामने बाधाओं की गहरी खाई और कंटीली राह खड़ी कर दी गई है। पढ़ने-लिखने, छात्रवृत्ति, नौकरी, आरक्षण से लेकर भाषा, संस्कृति, धर्म, जीवन-शैली, खान-पान, रहन-सहन, वेश-भूषा आदि को लेकर इनके सामने इतने प्रश्न और समस्याएं खड़ी कर दी जाती हैं बेचारे का माथा
Latest Posts
- ओर- करम करम करले बहीन..आईज तारीख 08 मार्च 2026 दिन एतवार के कुड़ुख़ टाइम्स डॉट कॉम कर पुनह परकाशन कर बेरा में टी आर एल ब्लॉग ले उरांव अखरा से तीन गो गावल गीत के नागपुरी भखा में बताल हय। इके धेयान देवब और गुनगुनाब अपने मन सउब – 1 ओर छोट-मोटे तेतईर गे आयो,भिंजल छांहईर गे आयो ।2।घुराल… Read more: ओर- करम करम करले बहीन..
- झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?राँची के कोर्नेलियस मिंज को लोग करन कहते हैं. उनका परिवार सरना आदिवासी था लेकिन बाद में ईसाई बन गया. हालाँकि कोर्नेलियस के घर में अब भी कई लोग सरना हैं. यह परिवार साथ में सरहुल भी मनाता है और क्रिसमस भी. आपस में शादियाँ भी होती हैं. करन कहते हैं कि जब सरना और… Read more: झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?
- झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानितरांची: आज दिनांक 21.02.2026 दिन शनिवार को प्रेस क्लब रांची में अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर अखिल झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार सम्मान 2026 झारखंड के 9 साहित्यकारों के रचनाकारों के साथ ओल चिकि लिपि के रचयिता श्रद्धेय पं रघुनाथ मुर्मू तथा वरांग चिति के रचयिता श्रद्धेय कोल लाको बोदरा को मरणोपरांत उनके वंशजों को… Read more: झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानित
- औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?आजादी के पचहत्तर साल बाद भी भारत अंग्रेज और अंग्रेजियत (औपनिवेशिक गुलामी) से मुक्त नहीं हुआ है”—इस उक्ति को यदि गहराई से समझें, तो यह किसी भौतिक गुलामी की नहीं बल्कि मानसिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक और वैचारिक गुलामी की ओर संकेत करती है। भारत ने 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता तो प्राप्त की, परंतु औपनिवेशिक सत्ता द्वारा… Read more: औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?
- हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते यह जानकर बहुत प्रेरणा मिलती है कि गुमला, रांची, लातेहार और लोहरदगा के युवा गणित (Maths) जैसे कठिन विषय को भी कुँड़ुख में ढाल रहे हैं। प्रसिद्ध अफ्रीकी लेखक चिंतक न्गुगी वा थ्योंगो ने हमेशा यही कहा कि – “भाषा केवल साहित्य के लिए नहीं, बल्कि विज्ञान और तर्क के लिए भी होनी चाहिए” ।… Read more: हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते