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22 गांव सभा, पड़हा, बिसु सेन्दरा समन्वय सम्मेलन

पता : ग्राम -करकरी, पो0 – करकरी, थाना – सिसई, जिला – गुमला – झारखण्ड, पिन – 835324 : भारतीय संविधान की 5वीं अनुसूची के अन्तर्गत झारखण्ड राज्य के अधिसूचित क्षेत्र में ग्राम – करकरी, पो0 – करकरी, थाना – सिसई, जिला – गुमला, झारखण्ड में संसद द्वारा पारित पेसा कानून 1996 (PESA – 1996) के
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सरहुल का संदेश.. आदिवासी छात्रावास रांची में मनाया गया सरहुल 2021

कोरोना लहर 2 से पूरा देश और सूबा परेशान है. कोरोना लहर 2 के चलते लोगों को सांस लेने में दिक्कतें हो रही हैं. अस्पताल में जगह नहीं मिल रहा है. सरकारी अस्पतालों में जगह नहीं है. प्राईवेट अस्पताल में फीस भरने के लिए पैसे नहीं हैं. ऐसे में गरीब करे तो क्या करे। पर
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आदिवासी कॉलेज छात्रावास में सरहुल संपन्न

कोरोना 2 के बीच आदिवासी समाज अपनी पुस्तैनी धरोहर को आगे बढ़ाते हुए चैत शुक्ल तृतिया (15 अप्रील 2021) को परम्परागत तरीके से सरहुल परब मनाया. इस वर्ष कोरोना महामारी के चलते झारखण्ड सरकार की ओर से जुलूस निकालने पर पाबंदी के चलते लोग अपने पूजा स्थल पर सामाजिक दूरी बनाते हुए पूजा अर्चना किये. बैगा, पहान, पुजार, महतो,
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डॉ गिरिधारी राम गौँझू नहीं रहे.. !

समाचार दु:खद है.. झारखंड की संस्कृति, भाषा व सामाजिक उत्थान के लिये हमेशा संघर्षरत प्रणेता डॉ गिरिधारी राम गोंझू का असमय निधन हो गया है। उन्होंने आज गुरूवार 15 अप्रैल 2021 को रांची स्थित रिम्स अस्पताल में अंतिम सांस लीं। उन्हें हर्ट अटैक आया था। डॉ गिरिधारी राम गौंझू रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय
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बंदी उरावं नहीं रहे

बिहार (एकीकृत) के पूर्व मंत्री बंदी उरांव का मंगलवार को निधन हो गया है। वे रांची के हेहल स्थित आवास में रहते थे। बंदी उरांव के निधन की खबर सुनकर उनके पैतृक गांव भरनो प्रखंड के डुडिया पंचायत के दतिया बसाईर टोली के ग्रामीणों में शोक की लहर है। इधर उनके निधन की खबर के
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यहां गाकर सिखाते हैं कुड़ुख (आदिवासी भाषा) मातृभाषा!

यह विडियो, कार्तिक उरांव आदिवासी कुड़ुख् विद्यालय, मंगलो, सिसई, गुमला में चल रहे कुंड़ुख् हिन्दीआ विद्यालय की कक्षा का है. इस कक्षा में कुंड़ुख् गीत एवं कविताओं को मौसमी राग में गाकर पढ़ाया जाता है. पढ़ाई के इस तरीके से गांव स्तकर में गीत नृत्य़ को फिर से जागृत करने में मदद मिलेगी. साधारणतया ऐसा
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Tribal Society Demanded inclusion of Kurukh & TolongSiki at Kurukh Sahitaya Sabha in Assam

Kokrajhar (Assam): The local tribal society organized here the 6th biennial conference of All kurukh (oraon) Sahitya Sabha (Assam) on 19, 20 and 21 March 2021 at Mazbat, Udalguri district (Assam). Sri Promod Boro the Chief of BTC was the Chief Guest and Ashok Baxla, founder secretary, Kurukh Litrary Society of India (New Delhi) was
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जंतर मंतर में अलग आदिवासी धर्मकोड के लिए धरना प्रदर्शन संपन्न

दिल्ली, जंतर मंतर: 2021 की जनगणना में आदिवासियों के द्वारा अलग धर्म के कॉलम की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना-प्रदर्शन किया गया। जिसमें राष्ट्रीय आदिवासी इंडीजीनस धर्म समन्वय समिति भारत के तत्वधान में भारत वर्ष के तमाम राज्यों व परदेशों से समस्त आदिवासियों ने शिरकत किया और केंद्र सरकार से मांग
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जयपुर (राजस्थान) में मीणा समाज का सम्मेलन, अलग धर्म कोड की मांग

“मीणा” जनजातीय समाज की ओर से 13 मार्च 2021, शनिवार, को समस्त भारतीय आदिवासियों के लिए “जनगणना 2021” की प्रपत्र पर एक पृथक “ट्राईबल कॉलम” में जनगणना हेतु एक सेमिनार जयपुर, राजस्थान में संपन्न हुई। इस सम्मेलन में भारत के सभी क्षेत्रों से जनजाति के लोग उपस्थित होकर अपने विचार रखे। सम्मेलन में राजस्थान के
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राजस्थान में भी जोर से उठ रही है आदिवासी धर्म कोड की मांग

राजस्थान: राजस्थान के डुंगरपुर से कांग्रेस विधायक गणेश घोघरा ने सदन में कहा कि ये आरएसएस लोग हमें हिन्दू बताते हैं.. हम अपने को हिन्दू मानने को तैयार नहीं हैं। हमारे ऊपर हिन्दू धम मत थोपो! आदिवासियों की जीवनशैली, परंपरा और खानपान हिन्दुओं से अलग है। और, आदिवासी प्रकृति के उपासक हैं। इसलिए सरकार को
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- ओर- करम करम करले बहीन..आईज तारीख 08 मार्च 2026 दिन एतवार के कुड़ुख़ टाइम्स डॉट कॉम कर पुनह परकाशन कर बेरा में टी आर एल ब्लॉग ले उरांव अखरा से तीन गो गावल गीत के नागपुरी भखा में बताल हय। इके धेयान देवब और गुनगुनाब अपने मन सउब – 1 ओर छोट-मोटे तेतईर गे आयो,भिंजल छांहईर गे आयो ।2।घुराल… Read more: ओर- करम करम करले बहीन..
- झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?राँची के कोर्नेलियस मिंज को लोग करन कहते हैं. उनका परिवार सरना आदिवासी था लेकिन बाद में ईसाई बन गया. हालाँकि कोर्नेलियस के घर में अब भी कई लोग सरना हैं. यह परिवार साथ में सरहुल भी मनाता है और क्रिसमस भी. आपस में शादियाँ भी होती हैं. करन कहते हैं कि जब सरना और… Read more: झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?
- झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानितरांची: आज दिनांक 21.02.2026 दिन शनिवार को प्रेस क्लब रांची में अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर अखिल झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार सम्मान 2026 झारखंड के 9 साहित्यकारों के रचनाकारों के साथ ओल चिकि लिपि के रचयिता श्रद्धेय पं रघुनाथ मुर्मू तथा वरांग चिति के रचयिता श्रद्धेय कोल लाको बोदरा को मरणोपरांत उनके वंशजों को… Read more: झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानित
- औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?आजादी के पचहत्तर साल बाद भी भारत अंग्रेज और अंग्रेजियत (औपनिवेशिक गुलामी) से मुक्त नहीं हुआ है”—इस उक्ति को यदि गहराई से समझें, तो यह किसी भौतिक गुलामी की नहीं बल्कि मानसिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक और वैचारिक गुलामी की ओर संकेत करती है। भारत ने 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता तो प्राप्त की, परंतु औपनिवेशिक सत्ता द्वारा… Read more: औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?
- हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते यह जानकर बहुत प्रेरणा मिलती है कि गुमला, रांची, लातेहार और लोहरदगा के युवा गणित (Maths) जैसे कठिन विषय को भी कुँड़ुख में ढाल रहे हैं। प्रसिद्ध अफ्रीकी लेखक चिंतक न्गुगी वा थ्योंगो ने हमेशा यही कहा कि – “भाषा केवल साहित्य के लिए नहीं, बल्कि विज्ञान और तर्क के लिए भी होनी चाहिए” ।… Read more: हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते