‘चिंचों डण्डी अरा ख़ीःरी’ पुस्तक, कुँड़ुख़ (उराँव) भाषा में प्रकाशित

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चिंचों डण्डी अरा ख़ीःरी नामक यह पुस्तक, कुँड़ुख़ (उराँव) भाषा में प्रकाशित पुस्तक है। चिंचों डण्डी अरा ख़ीःरी का शाब्दिक अर्थ बाल कविता एवं कहानी है। यह पुस्तक, कुँड़ुख़ (उराँव) भाषा की लिपि, तोलोंग सिकि एवं देवनागरी लिपि में प्रस्तुत है। इस लिपि का शोध-संकलन एवं अनुसंधान, एक एम.बी.बी.एस. चिकित्‍सक डॉ. नारायण उराँव ‘सैन्दा’ द्वारा किया गया है तथा इस लिपि का कम्प्यूटर वर्जन, केलितोलोंग फोण्ट के नाम से श्री किसलय जी के द्वारा विकसित किया गया है। वर्तमान में कुँड़ुख़ (उराँव) भाषा एवं तोलोंग सिकि को झारखण्ड सरकार में 2003 ई. में तथा प.बंगाल सरकार में वर्ष 2018 में स्वीकृति प्रदान किया गया है। चिंचों डण्डी अरा ख़ीःरी पुस्तक का यह रूप तोलोंग सिकि एवं देवनागरी लिपि संस्करण, टाटा स्टील फाउण्डेषन की इकाई ट्राइबल कल्चरल सोसायटी, जमशेदपुर द्वारा के सहयोग से अद्दी कुँड़ुख़ चाःला धुमकुड़िया पड़हा अखड़ा (अद्दी अखड़ा), राँची द्वारा प्रकाशित है।

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