Folklore

Tribal Life, History, Rituals, etc.

  • ग्रामीण मौसम पूर्वानुमान के अनुसार – रथ यात्रा से करमा तक अच्छी वर्षा होगी

    ग्रामीण मौसम पूर्वानुमान के अनुसार – रथ यात्रा से करमा तक अच्छी वर्षा होगी

    विगत 7 वर्षों से ग्रामीण लोकज्ञान के अनुसार मौसम पूर्वानुमान कर रहे थाना – सिसई, जिला – गुमला (झारखण्ड ) के सैन्दा् एवं सियांग गाँव के निवासी गजेन्द्रा उराँव (65 वर्ष, फोटो में बायें) तथा श्री बुधराम उराँव (70 वर्ष, फोटो में दायें) द्वारा घर में रखा हुआ पिछले वर्ष का धान (बीज वाला धान)

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  • यहां गाकर सिखाते हैं कुड़ुख (आदिवासी भाषा) मातृभाषा!

    यहां गाकर सिखाते हैं कुड़ुख (आदिवासी भाषा) मातृभाषा!

    यह विडियो, कार्तिक उरांव आदिवासी कुड़ुख् विद्यालय, मंगलो, सिसई, गुमला में चल रहे कुंड़ुख्‍ हिन्दीआ विद्यालय की कक्षा का है. इस कक्षा में कुंड़ुख्‍ गीत एवं कविताओं को मौसमी राग में गाकर पढ़ाया जाता है. पढ़ाई के इस तरीके से गांव स्तकर में गीत नृत्य़ को फिर से जागृत करने में मदद मिलेगी. साधारणतया ऐसा

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  • ख़द्दी परब (सरहुल त्योहार)

    ख़द्दी परब (सरहुल त्योहार)

    नमहँय देश भारत नू अकय बग्गे भख़ा कछनखरऊ अरा नने किसिम गहि संस्कृति खोड़हा नू मेसेरका रअ़र्इ। हुल्लो परिया तिम इसन नने रकम जइतर तंगआ-तंगआ भख़ा-संस्कृति, परम्परा अरा विश्‍वासन अङिय’अर संग्गे-संग्गे रअ़ते बरआ लगनर। र्इवन्दा बेड़ा नू अकय किय्या-मर्इय्या मंज्जा। एका-एका जइतर गहि भख़ा-संस्कृति, इतिङख़ीरी गहि कगद नूम रर्इह केरा, पहें एका-एका खोड़हा गहि आ:लर,

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  • धुमकुडि़या दिवस 2012 : एक स्‍वागत गीत

    धुमकुडि़या दिवस 2012 : एक स्‍वागत गीत

    यह विडियो ग्राम सैन्दा, थाना सिसर्इ, जिला गुमला में धुमकुड़िया दिवस का है।  यह आयोजन डॉ0 नारायण उराँव ‘सैन्दा’ द्वारा परम्परागत सामाजिक संस्था ‘धुमकुड़िया’ को पुनर्जीवित करने के उदेश्य से दिनांक 14 जनवरी 2012 को किया गया था। इस आयोजन का उदेश्य कुड़ुख़ भाशा-संस्कृति को संरक्षण तथा संवर्द्धन करना है। साथ ही मातृभाशा के माध्यम

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  • मीठे बोल बचपन के : आदिवासी समाज में भाषा का रियाज़ बचपन से ही शुरू होता है

    मीठे बोल बचपन के : आदिवासी समाज में भाषा का रियाज़ बचपन से ही शुरू होता है

    यह विडियो लिटिबीर कुड़ुख़ एकेडमी, तिलसिरी, घाघरा, गुमला का है। कोरोना लॉकडाउन के चलते बच्चे घर में ही परम्परागत गीत सीख रहे हैं। 2रा विडियो में वही बच्चे अंगरेजी कविता याद कर रहे हैं। इस विद्यालय में कुड़ुख़ भाशा-संस्कृति के माध्यम से अंगरेजी एवं हिन्दी की उंचार्इ तक पहुँचने के उदेश्य से संचालित है। 

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  • Tribal society of jharkhand & their community music

    Tribal society of jharkhand & their community music

    झारखंड का आदिवासी समाज और भाव विभोर करनेवाले उनके कोरस संगीत! .. जरूर सुनिये..

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  • झारखंड के लोक संगीत का आनंद लीजिए!

    झारखंड के लोक संगीत का आनंद लीजिए!

    झारखंड के लोक संगीत का आनंद लीजिए! Enjoy the folk music of Jharkhand!

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  • करम परब गही ख़ीरी (करम त्योहार की कहानी)

    करम परब गही ख़ीरी (करम त्योहार की कहानी)

    बअ़नर – हुल्लो परिया नु ओरोत कुँड़ुख़ बे:लस ही रा:जी नु ओंगओल अनभनियाँ रा:जी कीड़ा मंज्जा। चेंप-झड़ी मल पुर्इंका ती खितीपुती मल मना लगिया। तूसा-झरिया, खाड़-ख़ोसरा, कूबी-पोखारी उरमी ख़ाया लगिया। मन्न-मास ही खं़जपा हूँ नठारआ हेल्लरा। ओना-मोख़ा गे मल ख़खरना ती टोड़ंग-परता ता अड़ख़ा-चे:खे़ल अरा बोकला गुट्ठीन मो:ख़र, आलर एकअम बेसे उल्ला खेपआ लगियर। चान-चान,

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