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  • ‘कुँड़ुख़ व्याकरण की पारिभाषिक शब्दावली‘ विषयक एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न

    ‘कुँड़ुख़ व्याकरण की पारिभाषिक शब्दावली‘ विषयक एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न

    दिनांक 01 मई 2022, दिन रविवार को आदिवासी उराँव समाज समिति, बिरसा नगर, जोन न०-6, जमशेदपुर में ‘‘कुँड़ुख़ व्याकरण की पारिभाषिक शब्दावली‘‘ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न हुआ। यह कार्यशाला, टाटा स्टील फाउण्डेशन, जमशेदपुर के तकनीकि सहयोग से संचालित ‘‘कुँड़ुख़ (उराँव) भाषा एवं लिपि शिक्षण कार्यक्रम‘‘ का अग्रेतर क्रियान्वयन था। इस कार्यशाला में आदिवासी

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  • कुंड़ुख टाइम्‍स डॉट कॉम का 2रा प्रिंट एडिशन आ गया..

    कुंड़ुख टाइम्‍स डॉट कॉम का 2रा प्रिंट एडिशन आ गया..

    कुंड़ुख टाइम्‍स डॉट काम के प्रिंट एडिशन का दूसरा अंक प्रस्‍तुत है। इस अंक में हमने कई महत्‍वपूर्ण विषयों को समेटा है। कुंड़ुख भाषा की लिपि तोलोंग सिकि के आयामों पर व्‍यापक चर्चा शामिल है। तोलोंग सिकि की नींव का अपना एक इतिहास है। जी हां, आपने ठीक याद किया, झारखंड अलग राज्‍य आंदोलन। इस

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  • कुंड़ुखटाइम्‍स.कॉम का प्रथम प्रिंट एडिशन

    कुंड़ुखटाइम्‍स.कॉम का प्रथम प्रिंट एडिशन

    आपको तो पता है कि कुंड़ुखटाइम्‍स.कॉम लम्‍बे समय से आपको कुंड़ुख जगत की खबरें, सूचनाएं और शोध आदि संबंधित सामग्री ऑनलाइन उपलब्‍ध कराता रहा है। अब ऑनलाइन के अलावा हम इसका प्रिंट एडिशन भी प्रकाशित कर रहे हैं। आशा है आपको पसंद आयेगा। आज प्रस्‍तुत है कुंड़ुखटाइम्‍स.कॉम का प्रथम प्रिंट एडिशन। आप इसे चाहें तो

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  • धार्मिक उपनिवेशवाद और पारम्परिक उराँव (कुँड़ुख़) समाज

    धार्मिक उपनिवेशवाद और पारम्परिक उराँव (कुँड़ुख़) समाज

    उपनिवेशवाद का अर्थ है – किसी समृद्ध एवं शक्तिशाली राष्ट्र द्वारा अपने विभिन्न हितों को साधने के लिए किसी निर्बल किन्तु प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण राष्ट्र के विभिन्न संसाधनों का शक्ति के बल पर उपभोग करना। यहाँ धार्मिक उपनिवेशवाद का अर्थ है – कमजोर और असंगठित समाज को अपने धार्मिक संगत में मिलाकर उसके सांस्कृतिक विरासत

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  • कुँड़ुख़ भाषा अरा तोलोंग सिकि (लिपि)

    कुँड़ुख़ भाषा अरा तोलोंग सिकि (लिपि)

    1 कुँड़ुख भाषा – कुँड़ुख भाषा एक उतरी द्रविड़ भाषा परिवार की भाषा है। लिंगविस्टक सर्वे ऑफ इंडिया 2011 के रिपोर्ट के अनुसार भारत देश में कुँड़ुख़ भाषा बोलने वाले लोगों की संख्या 19‚88‚350 है। पर कुँड़ुख भाषी उराँव लोग अपनी जनसंख्या के बारे में बतलाते हैं कि पुरे विश्व में कुँड़ुख भाषी उराँव लोग 50

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  • कुंड़ुख़ भाषा में मुहावरा एवं कहावत का प्रयोग

    कुंड़ुख़ भाषा में मुहावरा एवं कहावत का प्रयोग

    कुंड़ुख़ भाषा में मुहावरा एवं कहावत का प्रयोग बखुबी होता है। कई असहज बातों को इससे आसानी से समझा जाता है। आइये इसे जाने : bai qurrA (muhAvarA )¡.  adde e:rnA ( KiEsA:rnA ) – As eXgan adde e:rwas.¢.  aXli e:wnA ( WirAbaHnA ) – kalA boXgA, eXgan WirAbaHA polloy.£.  akil barnA ( lu:r kunwurnA

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  • कुँड़ुख़ तोलोङ सिकि (लिपि) की स्थापना में भाषा विज्ञान के तथ्य

    कुँड़ुख़ तोलोङ सिकि (लिपि) की स्थापना में भाषा विज्ञान के तथ्य

    झारखण्ड सरकार द्वारा 06 जून 2003 को मातृभाषा शिक्षा का माध्यम (Medium of  instruction of mother tongue) घोषित किया गया है तथा 18 सितम्बर 2003 को कुँड़ुख़ भाषा की लिपि के रूप में तोलोङ सिकि (लिपि) को स्वीकार किया गया। सरकार के इस निर्णय के बाद जैक द्वारा वर्ष 2009 से मैट्रिक में कुँड़ुख़ भाषा

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  • तोलोंग सिकि विकासयात्रा: शिक्षाविदों से मिला था मार्गदर्शन

    तोलोंग सिकि विकासयात्रा: शिक्षाविदों से मिला था मार्गदर्शन

    झारखण्ड सरकार द्वारा 06 जून 2003 को मातृभाषा शिक्षा का माध्यम (medium of  instruction of mother tongue) घोषित किया गया है तथा 18 सितम्बर 2003 को कुँड़ुख़ भाषा की लिपि के रूप में तोलोङ सिकि (लिपि) को स्वीकार किया गया। सरकार के इस निर्णय के बाद जैक द्वारा वर्ष 2009 में एक विद्यालय के लिए

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  • तोलोंग सिकि की मान्‍यता से पूर्व शिक्षाविदों द्वारा प्रोत्‍साहन के संदेश

    तोलोंग सिकि की मान्‍यता से पूर्व शिक्षाविदों द्वारा प्रोत्‍साहन के संदेश

    तोलोङ सिकि को कुँड़ुख़ भाषा की लिपि के रूप में झारखण्ड तथा पश्चिम बंगाल में मान्यता है। झारखण्ड सरकार द्वारा 06 जून 2003 को मातृभाषा शिक्षा का माध्यम (medium of instruction of mother tongue) घोषित किया गया है तथा 18 सितम्बर 2003 को कुँड़ुख़ भाषा की लिपि के रूप में तोलोङ सिकि (लिपि) को स्वीकार

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  • उरांव आदिवासियों का परम्पारागत सामाजिक एवं न्यायिक संगठन ‘‘राजी पड़हा, भारत’’ के नये पदाधिकारी

    उरांव आदिवासियों का परम्पारागत सामाजिक एवं न्यायिक संगठन ‘‘राजी पड़हा, भारत’’ के नये पदाधिकारी

    दिनांक 05/09/2021 दिन रविवार को उरांव आदिवासियों की परम्पारागत सामाजिक एवं न्या9यिक संगठन ‘‘राजी पड़हा, भारत’’ का बैठक आमंत्रण सूचना में दिये गये स्थान – गुमला एरोड्रम के निकट आदिवासी संस्कृति भवन में नहीं हो कर गुमला डुमर टोली मैदान में हुआ। इस बैठक में राजी पड़हा, पादा पड़हा, झारखंड और पादा पड़हा, छत्तीसगढ़ का

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