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कुंड़ुखटाइम्स मैगजिन का 06 अंक प्रकाशित हुआ..

Kurukh Times बहुभाषीय पत्रिका का छठा अंक प्रकाशित हो चुका है। अपनी खास साज-सज्जा और समृद्ध लेखों से परिपूर्ण यह पत्रिका पठनीय है। आप इसे यहीं ऑनलाइन पढ़ सकते हैं अथवा चाहें तो, नि:शुल्क डाउनलोड भी कर सकते हैं। नीचे पीडीएफ वर्जन उपलब्ध है। पढ़ें अथवा डाउनलोड कर लें।
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कुंड़ुख टाइम्स (वेब संस्करण) का अक्टूबर से दिसंबर 2022 / अंक 5 प्रकाशित

कुंड़ुख टाइम्स (वेब संस्करण) का अक्टूबर से दिसंबर 2022 / अंक 5 का यह संस्करण काफी पठनीय है। आप इसे यहां ऑनलाइन पढ़ सकते हैं। आप चाहें तो इसका पीडीएफ फाइल भी अपने लैपटॉप या पीसी अथवा मोबाइल पर डाउनलोड कर सकते।
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धुमकुडि़या : पारम्परिक सामाजिक, व्यक्तित्व एवं कौशल विकास केन्द्र

धुमकुड़िया, उराँव आदिवासी समाज की एक पारम्परिक सामाजिक, व्यक्तित्व एवं कौशल विकास केन्द्र है। प्राचीन काल से ही यह, गाँव में एक व्यक्तित्व एवं कौशल विकास शिक्षण-शाला के रूप में हुआ करता था, जो गाँव के लोगों द्वारा ही चलाया जाता था। समय के साथ यह पारम्परिक सामाजिक, व्यक्तित्व एवं कौशल विकास केन्द्र विलुप्त होने
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Learning KURUKH [Tribal Language] through Rhymes Recitation in Rural Jharkhand III
![Learning KURUKH [Tribal Language] through Rhymes Recitation in Rural Jharkhand III](https://www.kurukhtimes.com/wp-content/uploads/2022/12/song-learning.jpg)
पूरा वीडियो यहां देखें: https://youtu.be/AU5W3dAqQgQ बाल कविता में छोटे बच्चों में से एक भाई अपनी छोटी बहन के लिए चन्दा मामा से गरम-गरम रोटी की मांग करते हुए दोनों भाई-बहन कहते हैं कि –ओ चन्दा मामा, तुम मेरी छोटी बहन और मेरे लिए रोटी दो, तुम हम दोनों के लिए रोटियां दो।ओ चन्दा मामा, हमारी मां
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आदिवासी भाषाएं – दशा और दिशा : एक वैचारिक अध्ययन

दिनांक 17-18 दिसम्बर 2022 को ”आदिवासी भाषाएं – दशा और दिशा : एक वैचारिक अध्ययन” विषय पर राज्य स्तरीय दो दिवसीय स्रममेलन, जेवियर कॉलेज, रांची के प्रांगन में सम्पन्न हुआ। इस सम्मेलन में दिनांक 18 दिसम्बर 2022 दिन रविवार को ”झारखण्ड में आदिवासी भाषाएं” विषय पर डॉ. नारायण उरांव ‘सैन्दा’ द्वारा अपने विचार प्रस्तुत
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‘चिंचों डण्डी अरा ख़ीःरी’ पुस्तक, कुँड़ुख़ (उराँव) भाषा में प्रकाशित

चिंचों डण्डी अरा ख़ीःरी नामक यह पुस्तक, कुँड़ुख़ (उराँव) भाषा में प्रकाशित पुस्तक है। चिंचों डण्डी अरा ख़ीःरी का शाब्दिक अर्थ बाल कविता एवं कहानी है। यह पुस्तक, कुँड़ुख़ (उराँव) भाषा की लिपि, तोलोंग सिकि एवं देवनागरी लिपि में प्रस्तुत है। इस लिपि का शोध-संकलन एवं अनुसंधान, एक एम.बी.बी.एस. चिकित्सक डॉ. नारायण उराँव ‘सैन्दा’ द्वारा
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कुंड़ुख टाइम्स त्रैमासिक पत्रिका का चतुर्थ (4th)अंक प्रकाशित हुआ

कुंड़ुख टाइम्स त्रैमासिक पत्रिका का चतुर्थ (4th)अंक प्रकाशित हो गया है। यह अंक ‘बिसुसेन्दरा विशेषांक’ है। यह अंक Tata Steel Foundation के ‘ट्राइबल कल्चरल सोसायटी’ के सहयोग से तैयार किया गया है। इस अंक में आप पढ़ेंगे तोलोंग सिकि के आधार के बारे में। साथ ही इसके वर्णमाला के बारे में। चर्चा होगी पड़हा के परंपरागत
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मन्दर बिरो- झारखंड राज्य की पारंपरिक चिकित्सा

‘मन्दर बिरो’ कुड़ुख शब्द है, जिसका अर्थ है – औषधि द्वारा उपचार करना। पारंपरिक चिकित्सा शैली जिसमें वैद्य ( मन्दर-अख़ ‘उस ) द्वारा बीमारी को दूर करने या कम करने के लिए रोगी ( मन्दा ) को जड़ी-बूटी, चूरन या दवा के रूप में औषधि ( मन्दर ) दी जाती है। उपयोग में लाए गए
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कुंड़ुख टाइम्स पत्रिका / अंक 03 अप्रैल से जून 2022

कुंड़ुख टाइम्स पत्रिका का 3रा अंक (अप्रैल से जून 2022) यहां पीडीएफ में उपलब्ध है। पढें.. जरूरत है तो डाउनलोड भी कर सकते हैं।
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सरना समाज और उसका अस्तित्व : एक पुस्तक चर्चा

‘‘सरना समाज और उसका अस्तित्व’’ नामक इस छोटी पुस्तिका में आदिवासी उराँव समाज की जीवन यात्रा का वृतांत है, जो भारत देश की आजादी के दो दशक बाद, उराँव लोग विषम परिस्थिति में अपने पुर्वजों की धरोहरों को सहेजते हुए देश की मुख्यधारा के साथ चलने का प्रयास कर रहे थे। देश की आजादी के
Latest Posts
- ओर- करम करम करले बहीन..आईज तारीख 08 मार्च 2026 दिन एतवार के कुड़ुख़ टाइम्स डॉट कॉम कर पुनह परकाशन कर बेरा में टी आर एल ब्लॉग ले उरांव अखरा से तीन गो गावल गीत के नागपुरी भखा में बताल हय। इके धेयान देवब और गुनगुनाब अपने मन सउब – 1 ओर छोट-मोटे तेतईर गे आयो,भिंजल छांहईर गे आयो ।2।घुराल… Read more: ओर- करम करम करले बहीन..
- झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?राँची के कोर्नेलियस मिंज को लोग करन कहते हैं. उनका परिवार सरना आदिवासी था लेकिन बाद में ईसाई बन गया. हालाँकि कोर्नेलियस के घर में अब भी कई लोग सरना हैं. यह परिवार साथ में सरहुल भी मनाता है और क्रिसमस भी. आपस में शादियाँ भी होती हैं. करन कहते हैं कि जब सरना और… Read more: झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?
- झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानितरांची: आज दिनांक 21.02.2026 दिन शनिवार को प्रेस क्लब रांची में अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर अखिल झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार सम्मान 2026 झारखंड के 9 साहित्यकारों के रचनाकारों के साथ ओल चिकि लिपि के रचयिता श्रद्धेय पं रघुनाथ मुर्मू तथा वरांग चिति के रचयिता श्रद्धेय कोल लाको बोदरा को मरणोपरांत उनके वंशजों को… Read more: झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानित
- औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?आजादी के पचहत्तर साल बाद भी भारत अंग्रेज और अंग्रेजियत (औपनिवेशिक गुलामी) से मुक्त नहीं हुआ है”—इस उक्ति को यदि गहराई से समझें, तो यह किसी भौतिक गुलामी की नहीं बल्कि मानसिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक और वैचारिक गुलामी की ओर संकेत करती है। भारत ने 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता तो प्राप्त की, परंतु औपनिवेशिक सत्ता द्वारा… Read more: औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?
- हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते यह जानकर बहुत प्रेरणा मिलती है कि गुमला, रांची, लातेहार और लोहरदगा के युवा गणित (Maths) जैसे कठिन विषय को भी कुँड़ुख में ढाल रहे हैं। प्रसिद्ध अफ्रीकी लेखक चिंतक न्गुगी वा थ्योंगो ने हमेशा यही कहा कि – “भाषा केवल साहित्य के लिए नहीं, बल्कि विज्ञान और तर्क के लिए भी होनी चाहिए” ।… Read more: हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते