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फग्गु परब ही ख़ीरी/धुमकुड़िया ही मुंधता ख़ीरी (फग्गु पर्व तथा धुमकुड़िया के आरंभ की कुँड़ुख़ लोक-कथा)
बअ्नर हुल्लो परिया नु कुँडु.ख़ खोंड़हा अकय ससर्इत नु रहचा। ओण्टा सोनो गिधि (ॅीपजम अनसजनतम) आल जियन केरमे-केरमे पिटा-मुंज्जा लगिया। आद आ:लर गही उगता-पगसिन ओन्टे कोहाँ ले सरा-हरा सिम्बाली मन्न नु खोता कमआ लगिया अरा आ:लारिन नेप्पा-नेप्पा खोता मइय्याँ पिटा-मोख़ा लगिया। एका-एका से उल्ला कट्टा लगिया अन्नेम नितकिम ओरोत आल जिया खोंडहा ती नठारआ लगियर।
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लिटीबीर अरा टटख़ा खोरका ता एड़ेथ कण्डो
लिटीबीर अरा टटख़ा खोरका ता एड़ेथ कण्डो, गही बखनी झारखण्ड रा:जी ता जिला गुमला, थाना घाघरा, पत्रालय पुटो, पद्दा तिलसिरी गेड़े टोला ता सियाँ नु मंज्ज-केरका तली। इसता अड्डा अक्कु एड़ेथ कण्डो ही ना:मे ती जगआ लगी। अन्ने गा र्इद पुरखा परिया तिम जगोतर रअ़र्इ, पँहेस जोक्क उल्ला गे इदी गही हुदा अरबरकी रहचा। अक्कु
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पद्दा ता देबी अयंग
बअ़नर हुल्लो परिया नु ओण्टा कुँडुख़ बे:लस तंगआ बेलख़ा नु दव कुना रा:जी-पा:टी चलाबअ़आ लगियस। एड़पा-पल्ली, बेलख़ा, आ:लर अरा सँवसे जिया-जँऊत बे:लस गही बेलख़ा नु निचोत रअ़आ लगिया। एन्ने बेलख़ा रा:जी नु बे:लासिन अम्मबर ने:का हुँ ससर्इत मल रहचा। बे:लस रा:जी चलाबअ़ओ बा:री गा डिढ़गर मना लगियस पंहेस एड़पा उला कलपारआ लगियस। आस गही एड़पा
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हरियनी पुजा (हरयरी पुजा)
कुँड़ुख़ खोंड़हा नु बेड़ा सिरे धरमे, धरती अयंग अरा धरमी सवंग गही पुजा-धजा हुल्लो परिया तिम मनतेम बरआ लगी। कुँड़ख़र, आल उज्जना गे अरा कोड़े उज्जना गे धरमे सवंगन सुमरारनर अरा गोहरारनर। कुँड़ुख़ खोंड़हा ता मुद्ध परब – फग्गु, ख़द्दी, पच्चो करम, रा:जी करम, सोहरर्इ गुट्ठी तली। इबड़ा परब नु पुजा-धजा संग्गे ओनना-मो:ख़ना, रिज्झ-रंग गुट्ठी
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पच्चो करम अरा रो:गे खेदना
कुँड़ुख़ पहटा नू पच्चो करम जेट्ठे चन्ददो नू मनी। एका-एका पद्दा नू र्इ करमन रो:गे करम हूँ बअ़नर। परब गही ना:मे लेखआ पच्चो करम नू पच्चो-पचगिर भर्इर करम उबुसनर। र्इ परब नू भादो चन्ददो ता रा:जी करम मलता डिण्डा करम बेसे पेल्लर-जों:ख़र मल उबुसनर। र्इ परब नू बेंजेरका बिटी बगारिन हूँ पा:ही मल एड़तार’र्इ। अवंगे
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कुँड़ख़र अरा सोहराई परब

हुल्लो परिया ता कत्था तली। टोड़ंग-परता मजही नू ओण्टे पद्दा रहचा। आ पद्दा ता उरमी आलर-तेःलर‚ अड्डो-मेक्खो‚ ओःड़ा-ख़ोःख़ा– जिया-जउँत दव कुना उज्जा-बिज्जा लगिया। बअ़नर – आल जिया उरमी उल्ला ओण्टे बेसेम मल रअ़ई। एका तरती एन्देर ताःका बरचा का अन्ति धरमे ही छया-भया। आ बेड़ा अनभनियाँ राःजी कीःड़ा मंज्जा। चेंप-झड़ी मल मंज्जका ती केरमे-केरमे आःलो
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ख़द्दी परब (सरहुल त्योहार)

नमहँय देा भारत नू अकय बग्गे भख़ा कछनखरऊ अरा नने किसिम गहि संस्कृति खोड़हा नू मेसेरका रअ़र्इ। हुल्लो परिया तिम इसन नने रकम जइतर तंगआ-तंगआ भख़ा-संस्कृति, परम्परा अरा विवासन अङिय’अर संग्गे-संग्गे रअ़ते बरआ लगनर। र्इवन्दा बेड़ा नू अकय किय्या-मर्इय्या मंज्जा। एका-एका जइतर गहि भख़ा-संस्कृति, इतिङख़ीरी गहि कगद नूम रर्इह केरा, पहें एका-एका खोड़हा गहि आ:लर,
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सिरजन-बिरजन गही ख़ीरी (सृष्टि कथा)
बअ़नर – एका बारी धरमेस मेरख़ा अरा ख़े़ख़लन कमचस आ बारी सँवसे ख़ेख़ेल अम्म ती निन्दका रहचा अरा गोट्टे नु उ:ख़ा दिम उ:ख़ा रहचा। इबड़न ए:रर धरमेस गे दव मल लग्गिया केंधेल, ख़ने आस बी:ड़ी कमचस। बी:ड़ी कमचका ख़ो:ख़ा उरमी बेड़ा बिल्ली रआ हेल्लरा। आद हुँ धरमेस गे द:व मल लग्गिया केंधेल, ख़ने आस उ:ख़ा
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कुँड़ख़र ही सोहरई परब

हुल्लो परिया ता कत्था तली। टोड़ंग-परता मजही नू ओण्टे पद्दा रहचा। आ पद्दा ता उरमी, आलर-ते:लर, अड्डो-मेक्खो, ओ:ड़ा-ख़ो:ख़ा, जिया-जउँत दव कुना उज्जा-बिज्जा लगिया। बअ़नर – आल जिया उरमी उल्ला ओण्टे बेसेम मल रअ़र्इ। एका तरती एन्देर ता:का बरचा का अन्ति धरमे ही छया-भया। अनभनियाँ, रा:जी की:ड़ा मंज्जा। केरमे-केरमे आलर, नन्ना-नन्ना आ:लोन तमहँय कूल गे लवआ-पिटा
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पद्दा ता देबी अयंग
बअ़नर हुल्लो परिया नु ओण्टा कुँडुख़ बे:लस तंगआ बेलख़ा नु दव कुना रा:जी-पा:टी चलाबअ़आ लगियस। एड़पा-पल्ली, बेलख़ा, आ:लर अरा सँवसे जिया-जँऊत बे:लस गही बेलख़ा नु निचोत रअ़आ लगिया। एन्ने बेलख़ा रा:जी नु बे:लासिन अम्मबर ने:का हुँ ससर्इत मल रहचा। बे:लस रा:जी चलाबअ़ओ बा:री गा डिढ़गर मना लगियस पंहेस एड़पा उला कलपारआ लगियस। आस गही एड़पा
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- कुडुख़ भाषा की लिपि “तोलोड सिकि” में कुडुख़ प्रवेशिका पुस्तक “अयंग कोंयछा” प्रकाशितकुडुख़ भाषा की लिपि “तोलोड सिकि” में कुडुख़ प्रवेशिका पुस्तक “अयंग कोंयछा” केतृतीय संस्करण के प्रकाशन पर मुझे एक विशिष्ट उर्जा की अनुभूति हो रही है। मैं अपने छात्र जीवनके समय में वर्ष 1989 में कुडुख़ समाज की स्थिति के बारे विचार करते हुए कुडुख़ भाषा एवं संस्कृतिके संरक्षण तथा संवर्द्धन हेतु कार्य करने का… Read more: कुडुख़ भाषा की लिपि “तोलोड सिकि” में कुडुख़ प्रवेशिका पुस्तक “अयंग कोंयछा” प्रकाशित
- Kurukh Times की डिजिटल पत्रिका अंक 16 प्रकाशित हुआपूर्व के अंकों की तरह पत्रिका का 16वां अंक प्रकाशित हो गया है। इसमें तोलोंग सिकि लिपि में रोचक सामग्री शामिल किये गय हैं। आशा है अन्य अंकों की तरह इस अंक को भी आपका भरपूर प्यार मिलेगा। इसे आप इस पन्ने पर देख सकते हैं। आप चाहें तो इसे अपने पीसी या मोबाइल में… Read more: Kurukh Times की डिजिटल पत्रिका अंक 16 प्रकाशित हुआ