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श्रद्धेय डा॰ निर्मल मिंज की श्रद्धांजलि स्वरूप उनकी सात कविताएं (तोलोंग सिकि एवं देवनागरी में)

श्रद्धेय डॅा॰ निर्मल मिंज की इन कविताओं में से 1ली कविता “उज्जकना पूंप लेखआ” में अपने व्य॰क्तिगत एवं पारिवारिक जीवन पर आधारित विचार है। 2री कविता “कुकई झील (फिनलैंड)” में विदेश में पढ़ाई कर रहे छात्र फिनलैंड की धरती में भी कुँड़ुख़ में सोचते हुए कविता रचना किये हैं। 3री कविता में “तेताली मन्न तेंग्गाोली”
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डॉ मिंज का निधन कुड़ुंख समाज के लिए अपूरणीय क्षति है : जिता उरांव

कुड़ुंख भाषा साहित्य के पुरोधा एवं आधार स्तम्भ डॉ निर्मल मिंज 5 मई 2021 को हमारे बीच से सदा लिये जुदा हो गए। इस तरह अचानक उनका जाना हम कुड़ुख समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है। वे एक कुशल समाज सुधारक, धर्म अगुआ एवं पिछड़े तथा शोषित वर्ग के अग्रगण्य पथ प्रदर्शक थे। विशेषकर
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झारखंडी शिक्षाविद् डॉ निर्मल मिंज जिन्होंने आदिवासी भाषाओं को पढ़ने पढ़ाने का मौका दिया

यह सत्तर के बाद का समय था, जब डॉ. निर्मल मिंजअक्सर संत जेवियर कॉलेज आते-जाते दिखाई पड़ते थे. उनके बारे जानकारी मिलती थी-अनुशासनप्रियके साथ-साथ झारखंड के भाषा संस्कृति के विकास के लिए उत्सुक हैं.यही कारण था कि झारखंड में नौ झारखंडी भाषाओं की पढ़ाई अपने कॉलेज में शुरू करने का साहस एवं दूरदरर्शी निर्णय उन्होंने
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गलती सुधारने का वक्त आ गया है: डॉ निर्मल मिंज (संदर्भ: झारखंड)

यह वीडियो स्वर्गीय डॉ निर्मल मिंज को श्रद्धांजलि है। डॉ मिंज का यह वीडियो 19 मई 2017 को रिकॉर्ड किया गया था। साक्षात्कारकर्ता हैं पत्रकार किसलय।
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यूजिन मिंज नहीं रहे, विनम्र श्रद्धांजलि!..

जैक (झारखंड अधिविद्य परिषद) के उप सचिव यूजिन मिंज का निधन हो गया है। उन्होंने 07 मई 2021 को अंतिम सांसें ली। उनके निधन से कुड़ुख़ भाषी समाज अत्यंत मर्माहत है। कुड़ुंख भाषा की तोलोंग सिकि एवं कुड़ुख़ भाषा के सिलेबस को स्कूल स्तर तक पहुंचाने में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है। अद्दी कुड़ुंख़
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डॉ निर्मल मिंज नहीं रहे!.. एवं अन्य खबर..

अलग झारखंड राज्य आंदोलन को बौद्धिक मोर्चे पर दिशा देनेवाले डॉ निर्मल मिंज नहीं रहे। अलग राज्य आंदोलन में उनका योगदान भुलाया नहीं जा सकता है। डॉ मिंज गोस्सनर चर्च के बिशप रहे हैं। डॉ निर्मल मिंज को साहित्य अकादमी का भाषा सम्मान से नवाजा जा चुका है। कुड़ुख भाषा में लेखन और उसके लिए
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डॉ निर्मल मिंज नहीं रहे!.. पढि़ये डॉ मिंज से 2017 में लिया गया एक इंटरव्यू..

अलग झारखंड राज्य आंदोलन को बौद्धिक मोर्चे पर दिशा देनेवाले डॉ निर्मल मिंज नहीं रहे। अलग राज्य आंदोलन में उनका योगदान भुलाया नहीं जा सकता है। डॉ मिंज गोस्सनर चर्च के बिशप रहे हैं। डॉ निर्मल मिंज को साहित्य अकादमी का भाषा सम्मान से नवाजा जा चुका है। कुड़ुख भाषा में लेखन और उसके लिए
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कोलकाता कुँड़ुख़ बकलुरिया खोड़हा गही कुंदुरना अरा परदना

चान 1950 नु एम्मबस बकरा कोचा (टांेगो) जिला: गुमला (झारखण्ड) अरा इंग्गयो ही पद्दा, चैनपुर, गुमला बेजरार ती नुकरी खतरी उत्तर पानियलगुड़ी, अलिपुरद्वार जंक्षन, जलपाईगुड़ी (पष्चिम बंगाल) नु डेरा बसा नंज्जर। इंग्गयो, निर्मला गल्र्स हाई स्कूल, दमनपुर मिषन नु मस्टारिन रहचा। इसता पद्दा नुम एंगहय कुंदुरना मंज्जा। पद्दा-ख़ेप्पा नु नन्ना जातियर सादरी, बंगला, हिन्दी, बग्गे
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आदिवासी त्यौहार मनते रहें … ताकि धरती की उर्वरता, निर्मलता बची रहे !

आज संपूर्ण विश्व में आदिवासियों के जीवन-व्यवहार, पर्व-त्यौहार, इतिहास, भोजन, रहन-सहन और भाषा, संस्कृति का अध्ययन किया जा रहा है. ऐसा नहीं है कि पहले इनका अध्ययन नहीं किया जा रहा था. यूरोपीय मानव-विज्ञानइन्हें कभी सब-ह्यूमन कह रहा था और लोग इनके नरभक्षी होने, इनकी निर्वस्त्रता, निरक्षरता, गरीबी, विचित्रता को कौतुहलवश देख रहे थे, उन्हें
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22 गांव सभा पड़हा बिसु सेन्दरा समन्वय सम्मेलन 17 एवं 18 अप्रैल 2021
यह विडियो 22 गांव सभा] पड़हा] बिसु सेन्दरा समन्वय सम्मेलन 17 एवं 18 अप्रील 2021 का है। यह आयोजन गांव करकरी थाना सिसई जिला गुमला में हुआ था। यह विडियो 22 गांव सभा पड़हा बिसु सेन्दसरा के सम्मालनित पंच्चोंि के स्वायगत में किया गया नृत्यन एवं गीत है – रिपोर्टर : गजेन्द्र
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