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तोलोंग सिकि विकासयात्रा: शिक्षाविदों से मिला था मार्गदर्शन

झारखण्ड सरकार द्वारा 06 जून 2003 को मातृभाषा शिक्षा का माध्यम (medium of instruction of mother tongue) घोषित किया गया है तथा 18 सितम्बर 2003 को कुँड़ुख़ भाषा की लिपि के रूप में तोलोङ सिकि (लिपि) को स्वीकार किया गया। सरकार के इस निर्णय के बाद जैक द्वारा वर्ष 2009 में एक विद्यालय के लिए
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तोलोंग सिकि की मान्यता से पूर्व शिक्षाविदों द्वारा प्रोत्साहन के संदेश

तोलोङ सिकि को कुँड़ुख़ भाषा की लिपि के रूप में झारखण्ड तथा पश्चिम बंगाल में मान्यता है। झारखण्ड सरकार द्वारा 06 जून 2003 को मातृभाषा शिक्षा का माध्यम (medium of instruction of mother tongue) घोषित किया गया है तथा 18 सितम्बर 2003 को कुँड़ुख़ भाषा की लिपि के रूप में तोलोङ सिकि (लिपि) को स्वीकार
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Kurukh Language become 8th official language in the West Bengal

It was the initiative of the Honorable CM of West Bengal, Mamata Banerjee that Kurukh language was declared on 21st February 2017 on the occasion of International Mother Tongue Day as one of the official language of West Bengal. On 8th February 2018, the Kurukh Language Bill was passed as the 8th official language in
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महिलाओं को बैशाखी नहीं समाज का स्तंम्भ समझें

आदिवासी मातृशक्ति अपने बच्चे को अपना ‘दूध’ नहीं बल्कि अपना ‘रक्त’ का स्तन पान करवाती है ताकि खून में उबाल रहे यही उबाल समाज के प्रति जुनून पैदा कर बिरसा बनाती हैं। झारखंड की मातृशक्ति का कोख इतनी शक्तिशाली है कि हर सदी में एक जननायक पैदा की हैं। आज मेरे मातृशक्ति को ये अह्वान
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उरांव आदिवासियों का परम्पारागत सामाजिक एवं न्यायिक संगठन ‘‘राजी पड़हा, भारत’’ के नये पदाधिकारी

दिनांक 05/09/2021 दिन रविवार को उरांव आदिवासियों की परम्पारागत सामाजिक एवं न्या9यिक संगठन ‘‘राजी पड़हा, भारत’’ का बैठक आमंत्रण सूचना में दिये गये स्थान – गुमला एरोड्रम के निकट आदिवासी संस्कृति भवन में नहीं हो कर गुमला डुमर टोली मैदान में हुआ। इस बैठक में राजी पड़हा, पादा पड़हा, झारखंड और पादा पड़हा, छत्तीसगढ़ का
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संस्कृति को बचाने के लिए ज़रूरी है भाषा को बचाना – जसिंता केरकेट्टा

किसी भी समाज की संस्कृति के बचे रहने के लिए उसकी अपनी भाषा का बचा होना ज़रूरी है। भाषा के बिना कैसे अपनी संस्कृति को बचाने की बात हो सकती है? भाषा अपनी संस्कृति को अभिव्यक्त करने का माध्यम तो होती ही है, वह एक शक्तिशाली सांस्कृतिक हथियार भी होती है। किसी समाज को ख़त्म
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नयी शिक्षा नीति और मातृभाषाएं

महात्मा गांधी ने 20 अक्टूबर, 1917 को गुजरात के भड़ौच में एक शिक्षा सम्मेलन में कहा था – “विदेशी भाषा द्वारा शिक्षा पाने में दिमाग पर जो बोझ पड़ता है, वह असह्य है। यह बोझ हमारे बच्चे उठा तो सकते हैं, लेकिन उसकी कीमत हमें चुकानी पड़ती है, वे दूसरा बोझ उठाने लायक नहीं रह
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कुंड़ुख़ भाषा शिक्षण केन्द्र बिरसा नगर जमशेदपुर का उद्घाटन

दिनांक 04.09.2021 दिन शनिवार को दिन के 2.30 बजे आदिवासी उरांव समाज समिति‚ बिरसा नगर‚ जॉन न.– 6 जमशेदपुर में टाटा स्टील फाउन्डेशन जमशेदपुर द्वारा कुंड़ुख़ भाषा शिक्षण केन्द्र का उद्घाटन किया गया। इस मौके पर टाटा स्टील फाउन्डेशण जमशेदपुर के कार्यपालक अधिकारी श्री शिवशंकर कांडेयोंग‚ कुंड़ुख़ तोलोंग सिकि के सर्जक डॉ. नारायण उरांव‚ ए.बी.एम.
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कुंड़ुख़ भाषा की तोलोंग सिकि के संस्थापक डॉ. नारायण उरांव को विभागीय एवं सामाजिक सम्मान

भारत सरकार के Linguistic Survey of India (लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया) विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार कुंड़ुख़ एक उतरी द्रविड़ भाषा समूह की भाषा है। इस भाषा को बोलने वाले उरांव आदिवासी एवं अन्य समूह के लोग अपने देश भारत में लगभग 50 लाख हैं। पिछले दो दशक पूर्व तक इस भाषा की कोई
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गुमला, घाघरा के पुटो तिलसीरी में तैयार है कुड़ुख-अंग्रेजी स्कूल

गुमला जिला (झारखंड) के घाघरा प्रखंड के पुटो स्थिति तिलसिरी ग्राम में तैयार हो गया है कुड़ुख-अंग्रेजी स्कूल। स्कूल का निर्माण लिटीवीर फाउण्डेशन फॉर एज्युकेशन, एग्रीकल्चर, तिलसीरी, घाघरा द्वारा किया गया है। तिलसीरी गाँव में स्थिति इस स्कूल के लिए स्व. जहाँजिया ऊराँव, तिलसीरी के परिवार ने करीबन 8 एकड़ जमीन दान में दिया है।
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- ओर- करम करम करले बहीन..आईज तारीख 08 मार्च 2026 दिन एतवार के कुड़ुख़ टाइम्स डॉट कॉम कर पुनह परकाशन कर बेरा में टी आर एल ब्लॉग ले उरांव अखरा से तीन गो गावल गीत के नागपुरी भखा में बताल हय। इके धेयान देवब और गुनगुनाब अपने मन सउब – 1 ओर छोट-मोटे तेतईर गे आयो,भिंजल छांहईर गे आयो ।2।घुराल… Read more: ओर- करम करम करले बहीन..
- झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?राँची के कोर्नेलियस मिंज को लोग करन कहते हैं. उनका परिवार सरना आदिवासी था लेकिन बाद में ईसाई बन गया. हालाँकि कोर्नेलियस के घर में अब भी कई लोग सरना हैं. यह परिवार साथ में सरहुल भी मनाता है और क्रिसमस भी. आपस में शादियाँ भी होती हैं. करन कहते हैं कि जब सरना और… Read more: झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?
- झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानितरांची: आज दिनांक 21.02.2026 दिन शनिवार को प्रेस क्लब रांची में अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर अखिल झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार सम्मान 2026 झारखंड के 9 साहित्यकारों के रचनाकारों के साथ ओल चिकि लिपि के रचयिता श्रद्धेय पं रघुनाथ मुर्मू तथा वरांग चिति के रचयिता श्रद्धेय कोल लाको बोदरा को मरणोपरांत उनके वंशजों को… Read more: झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानित
- औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?आजादी के पचहत्तर साल बाद भी भारत अंग्रेज और अंग्रेजियत (औपनिवेशिक गुलामी) से मुक्त नहीं हुआ है”—इस उक्ति को यदि गहराई से समझें, तो यह किसी भौतिक गुलामी की नहीं बल्कि मानसिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक और वैचारिक गुलामी की ओर संकेत करती है। भारत ने 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता तो प्राप्त की, परंतु औपनिवेशिक सत्ता द्वारा… Read more: औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?
- हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते यह जानकर बहुत प्रेरणा मिलती है कि गुमला, रांची, लातेहार और लोहरदगा के युवा गणित (Maths) जैसे कठिन विषय को भी कुँड़ुख में ढाल रहे हैं। प्रसिद्ध अफ्रीकी लेखक चिंतक न्गुगी वा थ्योंगो ने हमेशा यही कहा कि – “भाषा केवल साहित्य के लिए नहीं, बल्कि विज्ञान और तर्क के लिए भी होनी चाहिए” ।… Read more: हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते