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  • साम्राज्यवादी धर्मों का आक्रमण और बिखरों को समेटते प्राकृतिक आदिवासी

    साम्राज्यवादी धर्मों का आक्रमण और बिखरों को समेटते प्राकृतिक आदिवासी

    पहले, प्रथम आदिवासी और प्रकृति दोनों एक ही बात थी. कोई भी एक को दूसरे की बिना कल्पना नहीं कर सकते थे. आज के समय में थोड़ा बदलाव आया भी है तो आदिवासी और प्रकृति को आप अन्योन्याश्रिता के तौर पर देख सकते हैं, जो की अंधाधुंध औद्योगीकरण और शहरीकरण के प्रभाव में थोड़ा कमजोर

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  • प्राकृतिक आस्था और आदिवासी अध्यात्म का प्रतीक “सरना”

    प्राकृतिक आस्था और आदिवासी अध्यात्म का प्रतीक “सरना”

    “सरना” शब्द आज पूरी दुनिया जानती है| इस शब्द के गहराई और शुरुवात में जाएँ तो शायद ही ये शब्द किसी आदिवासी भाषा में मिले, लेकिन आदिवासी समुदायों और गैर आदिवासी समुदायों के संवादों से उभरने वाले शब्दों को गौर करें तो आप पाएंगे की ‘सरना’ शब्द यहीं कहीं से उत्पन्न हुआ है| ‘सरना’, सिर्फ

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  • त्रिपुरा में प्रथम आदिवासी महासभा का सम्मेलन संपन्न

    त्रिपुरा में प्रथम आदिवासी महासभा का सम्मेलन संपन्न

    दिनांक 28.11.2021 दिन रविवार को त्रिपुरा (भारत) में निवास करने वाले उरांव, मुण्डा, संताल आदि बहुत से आदिवासी छात्रों द्वारा प्रथम आदिवासी महासभा का सम्मेलन किया गया। इस सम्मेालन में भारत सरकार के कैबिनेट मंत्री आदिवासी कार्य मंत्रालय अर्जून मुण्डा, पूर्व कुलपति (डी.एस.पी. मुखर्जी विश्वीविदयालय, रांची) डॉ. सत्य  नारायण मुण्डा, त्रि‍पुरा के आदिवासी कल्याथण मंत्री

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  • ‘विहिप का बयान अमर्यादित एवं मानसिक शोषण का प्रतीक’

    ‘विहिप का बयान अमर्यादित एवं मानसिक शोषण का प्रतीक’

    दिनांक 19.11.2021 को विश्व हिन्दु परिषद के प्रांत मंत्री डॉ. बिरेन्द्र साहु द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा गया कि हिन्दुओं का 16 संस्कार को आदिवासी भी मानते हैं‚ तो अलग से सरना धर्म कोड क्यों ॽ उन्होंने यह कहा कि संविधान में जनजाति समुदाय को हिंदू धर्म की श्रेणी के अंतर्गत रखा गया है।

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  • हिंदू धर्म के 16 संस्‍कारों की परंपरा का पालन आदिवासी भी करते हैं फिर सरना धर्म कोड क्‍यों?

    हिंदू धर्म के 16 संस्‍कारों की परंपरा का पालन आदिवासी भी करते हैं फिर सरना धर्म कोड क्‍यों?

    रांची: आदिवासी नेता डॉ करमा उरावं के बयान पर हमलावर विश्‍व हिंदू परिषद (विहिप) व सहयोगी संस्‍थाओं ने सरना धर्म कोड की मांग के खिलाफ मोर्चा खोला है। उनका कहना है कि आदिवासी या जनजातीय समाज को अलग धर्म कोड की कोई आवश्‍यक्‍ता ही नहीं। वे तो हिंदू हैं। ‘सरना’ केवल पूजा स्‍थल को कहा

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  • झारखण्ड में नई शिक्षा नीति और कुंड़ुख़ भाषा-लिपि की सार्थकता विषयक गोष्ठी

    झारखण्ड में नई शिक्षा नीति और कुंड़ुख़ भाषा-लिपि की सार्थकता विषयक गोष्ठी

    दिनांक 21.11.2021 दिन रविवार को अद्दी कुंड़ुख़ चाला धुमकुड़िया पड़हा अखड़ा (अद्दी अखड़ा), रांची (झारखण्ड) के अध्यक्ष जिता उरांव एवं सचिव  राजेन्द्र भगत की मुलाकात राजी पड़हा प्रार्थना सभा ट्रस्ट, मुड़मा, रांची के अध्यक्ष  बंधन तिग्गा से हुई। इस अवसर पर राउरकेला (ओड़िशा) से  मनीलाल केरकेट्टा एवं जामताड़ा (झारखण्ड) से  संजय पहान एवं उनके साथी

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  • कुँड़ुख़ तोलोंग सिकि (लिपि) पर उठते सवाल : एक परिचर्चा

    कुँड़ुख़ तोलोंग सिकि (लिपि) पर उठते सवाल : एक परिचर्चा

    जैसा कि हम सभी को जानते हैं कि – कुँड़ुख़ भाषा की लिपि, तोलोंग सिकि है। झारखण्ड सरकार द्वारा इस लिपि को वर्ष 2003 में कुंड़ुख़ भाषा की लिपि स्वीकार करते हुए केन्द्र सरकार को अनुसंशित किया गया है। साथ ही प. बंगाल में कुँड़ुख़ भाषा को 2018 से 8वीं राजकीय का दर्जा प्राप्तग है।

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  • टाटा द्वारा संचालित कुंड़ुख भाषा की कक्षाएं | Classes of Kunrukh language by Tata Steel

    टाटा द्वारा संचालित कुंड़ुख भाषा की कक्षाएं | Classes of Kunrukh language by Tata Steel

    टाटा स्टील फाउण्डेलशन‚ जमशेदपुर के सहयोग से कुंड़ुख़ भाषा शिक्षण कार्य : भाषा बचाने की दिशा में स्वागत योग्य कदम || टाटा स्टील फाउण्डेशन‚ जमशेदपुर के सहयोग से आदिवासी उरांव समाज समिति‚ बिरसा नगर‚ जमशेदपुर में कुंड़ुख़ भाषा शिक्षण कार्य किया जा रहा है। इस कार्य का शुभारंभ दिनांक 26.08.2021 को हुआ। यह भाषा शिक्षण कार्य शनिवार

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  • डॉ नारायण उरावं को सम्‍मानित किया झारखंड सरकार ने

    डॉ नारायण उरावं को सम्‍मानित किया झारखंड सरकार ने

    झारखंडी साहित्‍य एवं संस्‍कृति की उपादेयता तथा राष्‍ट्र के विकास में योगदान विषयक दो दिवसीय संगोष्‍ठी सह सांस्‍कृतिक कार्यक्रम के प्रथम दिवस दिनांक 14 नवंबर 2021 को डॉ नारायण उरावं का संबोधन। इस अवसर पर विभाग द्वारा डॉ उरावं को कुरूख भाषा की लिपि तोलोंग सिकि विकसित करने के लिये खास तौर पर सम्‍मानित भी किया

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  • कुँड़ुख़ भाषा अरा तोलोंग सिकि (लिपि)

    कुँड़ुख़ भाषा अरा तोलोंग सिकि (लिपि)

    1 कुँड़ुख भाषा – कुँड़ुख भाषा एक उतरी द्रविड़ भाषा परिवार की भाषा है। लिंगविस्टक सर्वे ऑफ इंडिया 2011 के रिपोर्ट के अनुसार भारत देश में कुँड़ुख़ भाषा बोलने वाले लोगों की संख्या 19‚88‚350 है। पर कुँड़ुख भाषी उराँव लोग अपनी जनसंख्या के बारे में बतलाते हैं कि पुरे विश्व में कुँड़ुख भाषी उराँव लोग 50

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