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राष्ट्रीय आदिवासी छात्र संघ ने रांची विश्वविद्यालय के कुलपति को ज्ञापन सौंपा

दिनांक 18.0.2022 दिन मंगलवार को राष्ट्रीय आदिवासी छात्र संघ द्वारा रांची विश्वविद्यालय, रांची के कुलपति को ज्ञापन सौंपा गया। इस ज्ञापन में कुंड़ुख़ भाषा विषय के पठन-पाठन एवं विकास हेतु निम्नलिखित मांग की गई – 1. रांची विश्वविद्यालय, रांची में कुंड़ुख़ भाषा का स्वतंत्र पाठ्यक्रम तैयार किया जाए। पाठ्यक्रम समिति (सिलेबस बोर्ड) में 05 सदस्यों
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कोकराझार, असम में तोलोंग सिकि (कुँड़ुख़ भाषा की लिपि) कार्यशाला सम्पन्न

दिनांक 30 सितम्बर 2022 से 02 अक्टुबर 2022 तक कुँड़ुख़ लिटरेरी सोसायटी आफ इंडिया, नई दिल्ली का तीन दिवसीय राष्ट्रीय कुँड़ुख़ भाषा साहित्स सम्मेलन कोकराझार, असम में सम्पन्न हुआ. यह सम्मेलन कुँड़ुख़ (उरांव) साहित्य सभा, असम एवं आल कुँड़ुख़ (उरांव) छात्र संघ, असम के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया गया था. इस कुँड़ुख़ भाषा सम्मेलन
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कोकराझार (असम) में कुंड़ुख साहित्य सभा

यह विडियो असम के कोकराझार में, कुड़ुख़ अर्थात, उरांव साहित्य सभा द्वारा आयोजित खुला अधिवेशन के कार्यक्रम का है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, बोड़ो टेरिटोरियल रीजन के माननीय मंत्री के स्वागत में प्रस्तुत, किया गया नृत्य है। यह आयोजन दिनांक दो अक्टूबर दो हजार बाईस, दिन रविवार को कुड़ुख़ लिटरेरी सोसायटी आफ इंडिया के संयुक्त
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प्रकृति का पारिस्थितिकी तंत्र कैसे काम करता है, बताया भेडि़यों ने..

अगर आपको ये समझना है कि एको सिस्टम यानि हमारी प्रकृति का पारिस्थितिकी तंत्र कैसे काम करता है तो आपको अमेरिका के येलोस्टोन नेशनल पार्क के उदाहरण से इसे समझना चाहिए.. चूँकि हमारा एको सिस्टम एक जटिल कार्यप्रणाली है जिसे आप अपनी आखों से देखकर कभी समझ नहीं सकते हैं.. आप ये कभी नहीं समझ पायेंगे कि
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टाटा स्टील फाउण्डेशन, जमशेदपुर द्वारा संचालित कुँड़ुख़ भाषा तोलोंग सिकि प्रशिक्षण का 5 दिवसीय आवासीय कार्यशाला सम्पन्न

दिनांक 13 सितम्बर 2022 से 17 सितम्बर 2022 तक, टाटा स्टील फाउण्डेशन द्वारा सहयोगी संस्था, उरांव सरना समिति, चक्रधरपुर (प०सिंहभूम) एवं अद्दी कुँड़ुख़ चाःला धुमकुड़िया पड़हा अखड़ा, राँची के सहयोग से कुँड़ुख़ भाषा तोलोंग सिकि प्रशिक्षण, का 5 दिवसीय आवासीय कार्यशाला, टी०सी०एस० सोनारी, जमशेदपुर में सम्पन्न हुआ। इस आवासीय कार्यशाला में प०सिंहभूम से 28 सेन्टर
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मन्दर बिरो- झारखंड राज्य की पारंपरिक चिकित्सा

‘मन्दर बिरो’ कुड़ुख शब्द है, जिसका अर्थ है – औषधि द्वारा उपचार करना। पारंपरिक चिकित्सा शैली जिसमें वैद्य ( मन्दर-अख़ ‘उस ) द्वारा बीमारी को दूर करने या कम करने के लिए रोगी ( मन्दा ) को जड़ी-बूटी, चूरन या दवा के रूप में औषधि ( मन्दर ) दी जाती है। उपयोग में लाए गए
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करम परब (2022) की शुभकानाएं!!

देश के जनजातीय / आदिवासी इलाकों में 06 सितंबर 2022 को ‘करम परब’ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर आप सबको ढ़ेर सारी बधाई और शुभकामनाएं !!!
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कुंड़ुख टाइम्स पत्रिका / अंक 03 अप्रैल से जून 2022

कुंड़ुख टाइम्स पत्रिका का 3रा अंक (अप्रैल से जून 2022) यहां पीडीएफ में उपलब्ध है। पढें.. जरूरत है तो डाउनलोड भी कर सकते हैं।
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कुड़ुख़ लिपि दर्शन

भूमिका : कुड़ुख़ लिपि को तोलोंग सिकि के नाम से जाना जाता है, क्योंकि यह लिपि कुड़ुख़ बोलने वालों की तोलोंग (परम्परागत वस्त्र) पहनने की कला तथा उनके घुमने-फिरने व काम करने के तरीकों के अनुसार बनायी गयी है। कहने का तात्पर्य यह कि तोलोंग-लिपि, कुड़ुख़ संस्कृति की विशेषताओं को उजागर करते हुए गढ़ी गयी है।
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- ओर- करम करम करले बहीन..आईज तारीख 08 मार्च 2026 दिन एतवार के कुड़ुख़ टाइम्स डॉट कॉम कर पुनह परकाशन कर बेरा में टी आर एल ब्लॉग ले उरांव अखरा से तीन गो गावल गीत के नागपुरी भखा में बताल हय। इके धेयान देवब और गुनगुनाब अपने मन सउब – 1 ओर छोट-मोटे तेतईर गे आयो,भिंजल छांहईर गे आयो ।2।घुराल… Read more: ओर- करम करम करले बहीन..
- झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?राँची के कोर्नेलियस मिंज को लोग करन कहते हैं. उनका परिवार सरना आदिवासी था लेकिन बाद में ईसाई बन गया. हालाँकि कोर्नेलियस के घर में अब भी कई लोग सरना हैं. यह परिवार साथ में सरहुल भी मनाता है और क्रिसमस भी. आपस में शादियाँ भी होती हैं. करन कहते हैं कि जब सरना और… Read more: झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?
- झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानितरांची: आज दिनांक 21.02.2026 दिन शनिवार को प्रेस क्लब रांची में अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर अखिल झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार सम्मान 2026 झारखंड के 9 साहित्यकारों के रचनाकारों के साथ ओल चिकि लिपि के रचयिता श्रद्धेय पं रघुनाथ मुर्मू तथा वरांग चिति के रचयिता श्रद्धेय कोल लाको बोदरा को मरणोपरांत उनके वंशजों को… Read more: झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानित
- औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?आजादी के पचहत्तर साल बाद भी भारत अंग्रेज और अंग्रेजियत (औपनिवेशिक गुलामी) से मुक्त नहीं हुआ है”—इस उक्ति को यदि गहराई से समझें, तो यह किसी भौतिक गुलामी की नहीं बल्कि मानसिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक और वैचारिक गुलामी की ओर संकेत करती है। भारत ने 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता तो प्राप्त की, परंतु औपनिवेशिक सत्ता द्वारा… Read more: औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?
- हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते यह जानकर बहुत प्रेरणा मिलती है कि गुमला, रांची, लातेहार और लोहरदगा के युवा गणित (Maths) जैसे कठिन विषय को भी कुँड़ुख में ढाल रहे हैं। प्रसिद्ध अफ्रीकी लेखक चिंतक न्गुगी वा थ्योंगो ने हमेशा यही कहा कि – “भाषा केवल साहित्य के लिए नहीं, बल्कि विज्ञान और तर्क के लिए भी होनी चाहिए” ।… Read more: हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते
