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  • शिक्षाविद् डॉ करमा उरांव नहीं रहे

    शिक्षाविद् डॉ करमा उरांव नहीं रहे

    रांची: झारखंड के जाने माने शिक्षाविद डॉ करमा उरांव नहीं रहे। रविवार (14 मई 2023) सुबह उनका निधन हो गया। डॉ करमा कुछ समय से बीमार चल रहे थे। हफ्ते में दो बार डायलिसिस चलता था। वे डायबिटीज और हाइपरटेंशन से पीडि़त थे। गत वर्ष कोरोना काल में उनके बड़े बेटे का देहांत हो गया

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  • आदिवासी शोध एवं सामाजिक सशक्तिकरण अभियान के तहत व्याख्यान एवं परिचर्चा श्रृंखला

    आदिवासी शोध एवं सामाजिक सशक्तिकरण अभियान के तहत व्याख्यान एवं परिचर्चा श्रृंखला

    उराँव समाज में पारंपरिक विवाह (बेंज्जा) एवं विवाह विच्छेद (बेंज्जा बिहोड़) और न्यायालय व्यवस्था में वर्तमान चुनौतियाँ” विषयक श्रृंखला परिचर्चा का द्वितीय बैठक आदिवासी कॉलेज छात्रावास के पुस्तकालय कक्ष में आयोजन किया गया। जिसमें निम्न गणमान्य लोगों की अहम उपस्थिति रही :- डॉ नारायण भगत (अध्यक्ष, कुँड़ुख साहित्य अकादमी, राँची), श्रीमती महामनी कुमारी उराँव, (सहायक प्राध्यापक,

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  • बीस वर्ष की काली रात (संक्षिप्‍त) : कार्तिक उरांव

    बीस वर्ष की काली रात (संक्षिप्‍त) : कार्तिक उरांव

    इस पुस्तिका का लेखन एवं प्रकाशन पंखराज साहेब बाबा कार्तिक उरांव द्वारा कराया गया था। इस पुस्तिका में कार्तिक बाबा द्वारा देश की आजादी के बाद, वर्ष 1950 से 1970 (लगभग 20 वर्ष) के मध्‍य जंगलों एवं पहाड़ों के बीच रह रहे परम्‍परागत आदिवासियों के बारे में भारत देश की जनता एवं सरकार के समक्ष,

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  • धनबाद में महिलाओं का ‘चिपको’ आन्‍दोलन, कोयला खदान का विस्‍तार रोका

    धनबाद में महिलाओं का ‘चिपको’ आन्‍दोलन, कोयला खदान का विस्‍तार रोका

    धनबाद:धनबाद में बीसीसीएल के पुटकी-बलिहारी एरिया में कोयला खदान विस्तार के लिए डेढ़ हजार से ज्यादा पेड़ काटने पहुंची कंपनी की टीम को ग्रामीणों का जबरदस्त विरोध झेलना पड़ा। इलाके की सैकड़ों महिलाएं पेड़ों से चिपक गईं। उन्होंने साफ कह दिया कि एक भी पेड़ कटने नहीं दिया जाएगा। नतीजा यह कि कंपनी की टीम

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  • आदिवासी शोध व सामाजिक सशक्तिकरण अभि यान

    आदिवासी शोध व सामाजिक सशक्तिकरण अभि यान

    आदिवासी शोध एवं सामाजिक सशक्तिकरण अभियान के तहत “उराँव समाज में पारंपरिक विवाह (बेंज्जा) एवं विवाह विच्छेद (बेंज्जा बिहोड़) और न्यायालय व्यवस्था में वर्तमान चुनौतियाँ” विषयक परिचर्चा का आयोजन किया गया। व्याख्यान एवं परिचर्चा श्रृंखला : 01/2023 दिनांक 02.04.2023 है़। इस व्याख्यान एवं परिचर्चा श्रृंखला के प्रेक्षक पड़हा न्याय पंच के रूप में उपस्थित थे। 

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  • उरांव समाज में रूढि़गत विवाह व विच्‍छेद और न्‍यायिक चुनौतियां पर प्रो रामचंद्र उरांव का व्‍याख्‍यान 02 अप्रैल को रांची में

    उरांव समाज में रूढि़गत विवाह व विच्‍छेद और न्‍यायिक चुनौतियां पर प्रो रामचंद्र उरांव का व्‍याख्‍यान 02 अप्रैल को रांची में

    रांची: आदिवासी शोध एवं सामाजिक सशक्तिकरण अभियान श्रृंखला के तहत 02 अप्रैल 2023 को रांची (करमटोली) स्थित आदिवासी छात्रावास पुस्‍तकालय में विधिक व्‍याख्‍यान का आयोजन किया जा रहा है। श्रृंखला की इस कड़ी में उरांव समाज के रूढि़गत विवाह अर्थात बेंज्‍जा एवं विवाह विच्‍छेद अर्थात बेंज्‍जा बिहोड़ पर जानेमाने विधि विशेषज्ञ प्रोफेसर रामचंद्र उरांव व्‍याख्‍यान

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  • सरना धर्मगुरू प्रवीण उरांव का हृदयगति रूकने से निधन

    सरना धर्मगुरू प्रवीण उरांव का हृदयगति रूकने से निधन

    सरना धर्म के जुझारू राष्‍ट्रीय धर्म गुरू व व्‍याख्‍याता डॉ प्रवीण उरांव का हृदयगति रूकने से निधन हो गया है। डॉ प्रवीण झारखंड आंदोलन के दौरान उभरे आजसू के संस्‍थापकों में से एक थे। उस वक्‍त युवाओं के आदर्श मानेजाने वाले प्रवीण एक संघर्षशील योद्धा के रूप में पहचाने जाते थे। मृत्‍यु के वक्‍त डॉ

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  • पिन्‍की लिन्‍डा vs बागा तिर्की : आखिर क्‍यों, छुटा-छुटी (तलाक) से पहले हो गया केस डिसमिस?..

    पिन्‍की लिन्‍डा vs बागा तिर्की :  आखिर क्‍यों, छुटा-छुटी (तलाक) से पहले हो गया केस डिसमिस?..

    यह वीडियो हमारे पिछले वीडियो https://youtu.be/gxus_PSq_yg का हिस्‍सा (Excerpt) है, जिसका शीर्षक था- ‘कोई प्रथा कैसे बनती है कस्‍टमरी लॉ?.. | How does a custom become a Customary Law?’ वीडियो में मुख्‍य वक्‍ता हैं कानून के प्राध्‍यापक श्री रामचन्‍द्र उरांव। सवाल कर रहे हैं, पत्रकार किसलय। वह पूरा वीडियो यहां देख – सुन सकते हैं।

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  • कोई प्रथा कैसे बनती है कस्‍टमरी लॉ?

    कोई प्रथा कैसे बनती है कस्‍टमरी लॉ?

    भारत में आदिवासियों के कई मामलों में अलग कानून चलता है, जिसे कस्‍टमरी लॉ या प्रथागत कानून कहते हैं। इस प्रसंग में हम पिछले अंक में चर्चा कर चुके हैं। आप उस वीडियो को यहां ऊपर, दाहिनी तरफ आ रहे लिंक पर देख और सुन सकते हैं। उस वीडियो में हमने कस्‍टमरी लॉ के अर्थ,

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  • आदिवासियों का कस्‍टमरी लॉ अलग क्‍यों है?

    आदिवासियों का कस्‍टमरी लॉ अलग क्‍यों है?

    आपको पता है, भारत में दो तरह के कानून चलते हैं: पहला ‘जेनरल लॉ’ और दूसरा ‘कस्‍टमरी लॉ’। जेनरल लॉ यानी सामान्‍य कानून पूरे देश में लागू होता है, जबकि ‘कस्‍टमरी लॉ’ केवल आदिवासियों के प्रसंग में चलता है। आये दिन इसपर कई विवाद भी हुए हैं। मामला उच्‍च न्‍यायालयों तक पहुंचता है। और ऐन

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