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क्या हेमन्त सरकार आदिवासी भाषाओं के साथ भेदभाव पूर्ण रवैया रखती है?

रांची: झारखंड के आदिवासी चाहते हैं कि उनके बच्चों को अंग्रेजी, हिन्दी के अलावा अपनी मातृभाषा (आदिवासी) भी पढ़ना अनिवार्य किया जाए। जबकि झारखंड सरकार के शिक्षा विभाग ने एक अधिसूचना जारी करके आदिवासी समाज में उबाल जा दिया है। इस बाबत आदिवासियों की चर्चित स्वयंसेवी संस्था ‘अद्दी अखड़ा (अद्दी कुंड़ुख चा:ला धुमकुडि़या पड़हा अखड़ा)’
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डॉ नारायण उरावं की मां सामाजिक कार्यकर्त्ता फूलमणि उरावं नहीं रहीं, 85 वर्ष में निधन

सिसई (गुमला) की बहुप्रतिष्ठित कार्यकर्ता श्री मती फूलमणि उरांव नहीं रहीं। 85 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपने सैन्दा स्थित आवास में 12 नवंबर 2023 रात्रि साढ़े ग्यारह बजे अंतिम सांस ली । मौके पर उनके पुत्र डॉ नारायण उरांव व दो पौत्र मौजूद थे। स्व. फूलमणि अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गई हैं।
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धुमकुडि़या पेल्लो महबा उल्ला

यह लेख आदिवासी उरांव समाज का पारम्परिक सामाजिक पाठशाला धुमकुड़िया एवं किशोरियों का पेल्लो एड़पा में प्रवेश के विषय में शोध संकलन लेख है। इस शीर्षक लेख के माध्यम से पौराणिक आस्था विश्वास तथा आधुनिक जगत की अवधारणा के संदर्भ में समीक्षात्मक व्याख्यान पर चर्चा किया गया है। विशिष्ठ जानकारी के लिए पढ़ें एवं पी
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करम पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं

झारखंड और आसपास के आदिवासी बहुल इलाकों में मनाया जानेवाला प्रकृति पर्व – करम पूजा – इस वर्ष भी धूम-धाम से मनाया जा रहा है। आप सबको भी कुंड़ुख टाइम्स परिवार की ओर से ढ़ेर सारी बधाई और शुभकामनाएं..!
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‘एजेरना बेड़ा’ (सिंहभूम) में तोलोंग सिकि प्रशिक्षण कार्यक्रम का संगीतमय कार्यक्रम
यह विडियो दिनांक 19 सितम्बर 2023 दिन मंगलवार को सूट किया गया है। यह टाटा स्टील फाउंडेशन जमशेदपुर के सहयोग से संचालित तथा उरांव सरना समिति, चक्रधरपुर, पश्चिम सिंहभूम के माध्यम से ‘एजेरना बेड़ा’ कार्यक्रम के अंतर्गत दिनांक 16 सितम्बर से 19 सितम्बर 2023 तक सम्पन्न कुंड़ुख़ भाषा तोलोंग सिकि प्रशिक्षण कार्यशाला के समापन कार्यक्रम
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रामवृक्ष किण्डो को विनम्र श्रद्धांजलि

यह दुखद समाचार है कि ‘‘बुदो उराँव पब्लिक स्कूल, हहरी (कुँड़ुख़ इंग्लिस मिडियम स्कूल)’’ के संस्थापक सह निदेशक स्व० रामवृक्ष किण्डो, हम सबों के बीच नहीं रहे। उनका निधन दिनांक 03.09.2023, दिन रविवार को रात्रि में हुआ और दिनांक 04.09.2023 को उनका अंतिम संस्कार उनके पैत्रिक गांव ईचा बेती, घाघरा (गुमला) में हुआ। वे 44
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परम्पारिक ग्रामसभा पड़हा-पचोरा सामाजिक न्याय पंच नियमावली

भारतीय संसद द्वारा पारित पेसा कानून 1996 (PESA 1996) की धारा 4(d) के तहत, दिनांक 18 से 20 अगस्त 2023 तक, 36 गांव की परम्परागत ग्राम सभा (पद्दा सबहा) के प्रतिनिधि सदस्यों की ‘‘पद्दा पड़हा-पचोरा पारम्परिक स्वशासन व्यवस्था न्याय पंच कार्यशाला’’ ट्राईबल कल्चर सेन्टर, सोनारी, जमशेदपुर में सम्पन्न हुई। इस ग्रामसभा पड़हा-पचोरा सामाजिक न्याय पंच
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सिसई/गुमला/झारखंड में विश्व आदिवासी दिवस (9 अगस्त 2023) आयोजन
यह विडियो दिनांक 9 अगस्त 2023 को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर कार्तिक उरांव आदिवासी कुंड़ुख़ विद्यालय मंगलो सिसई गुमला शूट किया गया विडियो है । इस विद्यालय में कुंड़ुख़ भाषा की पढ़ाई कुंड़ुख़ की अपनी लिपि तोलोंग सिकि में होती है। इस विद्यालय में पारम्परिक गीत, मौसमी राग में सिखलाया जाता है। यह
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कुंडुख़ भाषा स्कूल, मंगलो, सिसई, गुमला नू विश्व आदिवासी दिवस रिझिरनुम मंज्जा

नेड्डा – 09.08.2023 उल्ला बुध गे को रोपा डण्डी घी सा-हे तली कार्तिक उरांव आदिवासी कुंडुख़ लूरकुड़िया मंगलो,थाना सिसई, जिला गुमला, झारखण्ड नू विश्व आदिवासी दिवस मनाबातारा। सिसई पहटा ता कुंडुख़ पचगी नैगर अरा माहतोर तेंगनर का कुंडुखर पुरखर घी तिंग्का बेसे बेड़ा सिरे पाड़ना- बें:नचा नना लगियर। धुमकुड़िया नू पचगी लूरगरियर बारजाचका रहचर का
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- ओर- करम करम करले बहीन..आईज तारीख 08 मार्च 2026 दिन एतवार के कुड़ुख़ टाइम्स डॉट कॉम कर पुनह परकाशन कर बेरा में टी आर एल ब्लॉग ले उरांव अखरा से तीन गो गावल गीत के नागपुरी भखा में बताल हय। इके धेयान देवब और गुनगुनाब अपने मन सउब – 1 ओर छोट-मोटे तेतईर गे आयो,भिंजल छांहईर गे आयो ।2।घुराल… Read more: ओर- करम करम करले बहीन..
- झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?राँची के कोर्नेलियस मिंज को लोग करन कहते हैं. उनका परिवार सरना आदिवासी था लेकिन बाद में ईसाई बन गया. हालाँकि कोर्नेलियस के घर में अब भी कई लोग सरना हैं. यह परिवार साथ में सरहुल भी मनाता है और क्रिसमस भी. आपस में शादियाँ भी होती हैं. करन कहते हैं कि जब सरना और… Read more: झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?
- झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानितरांची: आज दिनांक 21.02.2026 दिन शनिवार को प्रेस क्लब रांची में अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर अखिल झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार सम्मान 2026 झारखंड के 9 साहित्यकारों के रचनाकारों के साथ ओल चिकि लिपि के रचयिता श्रद्धेय पं रघुनाथ मुर्मू तथा वरांग चिति के रचयिता श्रद्धेय कोल लाको बोदरा को मरणोपरांत उनके वंशजों को… Read more: झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानित
- औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?आजादी के पचहत्तर साल बाद भी भारत अंग्रेज और अंग्रेजियत (औपनिवेशिक गुलामी) से मुक्त नहीं हुआ है”—इस उक्ति को यदि गहराई से समझें, तो यह किसी भौतिक गुलामी की नहीं बल्कि मानसिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक और वैचारिक गुलामी की ओर संकेत करती है। भारत ने 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता तो प्राप्त की, परंतु औपनिवेशिक सत्ता द्वारा… Read more: औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?
- हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते यह जानकर बहुत प्रेरणा मिलती है कि गुमला, रांची, लातेहार और लोहरदगा के युवा गणित (Maths) जैसे कठिन विषय को भी कुँड़ुख में ढाल रहे हैं। प्रसिद्ध अफ्रीकी लेखक चिंतक न्गुगी वा थ्योंगो ने हमेशा यही कहा कि – “भाषा केवल साहित्य के लिए नहीं, बल्कि विज्ञान और तर्क के लिए भी होनी चाहिए” ।… Read more: हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते