वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उराँव से औपचारिक मुलाकात: कुँड़ुख शिक्षक पद सृजन में अनियमितता का मामला

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कुँडुख़ समाज के  विभिन्न  संगठनों  ने  कुँडुख़ (उराँव) भाषा संरक्षण समन्वय समिति झारखंड प्रदेश के बैनर तले दिनांक  18/07/2024 को  कुटमु, नगर भवन  लोहरदगा में कुँडुख़ भाषा  शिक्षक पद  सृजन  के स्थान पर  गलत तरीके से नागपुरी शिक्षक का पद सृजित किए जाने पर एकसाथ नजर आए। जिसे  लेकर  वित मंत्री डाॅ  रामेश्वर  उराँव  से  भेंट कर औपचारिक बातचीत  की गई । डाॅ उराँव  ने  कहा कि आप  लोगों का परिचय  से पता चला कि सब कुँडुख संगठन से  जुड़े हैं। आप सब पड़हा बेल, देवान  के  लोग  हैं पड़हा व्यवस्था को राजनीति से बचाना है। आगे कहा  कि  मैं  विभाग, शिक्षा मंत्री एवं  मुख्यमंत्री को  इसे सुधार  हेतु  चिट्ठी लिखूँगा।  डाॅ उराँव  ने पुनः सर्वे कराने का आश्वासन दिया । साथ  ही  इस विषय को लेकर  उपस्थित प्रतिनिधियों को अपने साथ आवास (कार्यालय) रांची  में मिलने का सलाह दिया। मंत्री डाॅ उराँव  के साथ बैठक करने के बाद कुँडुख़ (उराँव) समुदाय के  सामाजिक संगठन – प्रार्थना  सभा, बुधुवीर सेना, आदिवासी छात्र संघ एवं  कुँडुख़ (उराँव) भाषा संरक्षण समन्वय समिति झारखंड प्रदेश  के सदस्य  एवं पदधारीगण  ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए अपने विचार साझा किए । पड़हा संयोजक संजीव भगत  ने कहा कि  कुँडुख़ के स्थान पर सादरी  बोली  को आधार बनाकर नागपुरी का पद सृजित करना एक गंभीर मामला है।

बैठक  में उपस्थित कुँडुख़र  ने  इस विषय को गंभीरता से लेते हुए यह  निर्णय लिया कि  यदि सरकार हमारी बातों को नहीं सुनेगी तो आंदोलन करने के लिए बाध्य हो जाएंगे।  सभा  में  उपस्थित विभिन्न कुँड़ख़ संगठन के पदधारियों ने कहा कि आदिवासी सरकार, आदिवासी  मुख्यमंत्री और आदिवासी विधायक – सांसद के बावजूद  कुँडुख़ भाषा पद सृजन में इतनी बड़ी गड़बड़ी हूई है। यदि इस पर सुधार नहीं हुआ तो अपना ही आदिवासी सरकार के खिलाफ  सड़क पर उतर जाएंगे। कुँडुख़ समाज  को अब  एहसास  हो गया है कि अपनी भाषा  विलुप्त  हो जाने के  बाद  स्वतः सामाज, संस्कृति, रीति-रिवाज मिट जाएगी। श्री संतोष उराँव  बुधुवीर सेना के  प्रवक्ता ने कहा  कि पूर्व में  कुँडुख़ भाषा की लिपि  न होने के कारण भाषा संरक्षण नहीं हो सका। अब हमारे  बीच कुँडुख़ भाषा की अपनी  लिपि  तोलोंग सिकि है। झारखंड सरकार से हमलोगों का मांग है कि सरकारी स्कूलों में कक्षा  KG से PG तक  तोलोंग सिकि से कुँडुख़ भाषा विषय की पढ़ाई-लिखाई अनिवार्य हो।  

मौके पर लोहरदगा के पड़हा बेल विजय उराँव, पड़हा संयोजक विनोद भगत, उपदिवान जतरू उराँव, आदिवासी छात्र संघ  लोहरदगा के जिला अध्यक्ष  अवधेश उराँव ,सरना प्रार्थना सभा भारत के महासचिव-जलेश्वर उराँव,  सरना प्रार्थना सभा लोहरदगा के जिला- अध्यक्ष सोमदेव उराँव, सचिव सुलेन्दर उराँव, केन्द्रीय सरना समिति लोहरदगा के अध्यक्ष रन्थु उराँव, सेवानिवृत शिक्षक  करमा उराँव, देवठान उराँव वीर बुधु भगत सेना (अध्यक्ष) संजय कच्छप, सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद उराँव, कुँडुख़ (उराँव) भाषा संरक्षण समन्वय समिति झारखंड प्रदेश के अध्यक्ष अरविंद उराँव, सचिव संजीव भगत, सदस्य पंकज उराँव, रतिया उराँव, शिवप्रकाश उराँव, नरवा उराँव, पड़हा बेल  सुका उराँव, कुँडुख़ भाषा प्रेमी  ज्ञानचंद उराँव, सोमे उराँव तथा लातेहार, गुमला, लोहरदगा और रांची जिला के विभिन्न  कुँडुख़र  इस बैठक में शामिल होकर  सर्वे निरस्त कर  पुनः सर्वे कराने  की मांग सरकार से कर रहें है।

रिपोर्टर 
अरविंद उराँव 
अध्यक्ष – कुँडुख (उराँव) भाषा संरक्षण समन्वय समिति झारखंड प्रदेश

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