डॉ निर्मल मिंज नहीं रहे!.. एवं अन्‍य खबर..

अलग झारखंड राज्य आंदोलन को बौद्धिक मोर्चे पर दिशा देनेवाले डॉ निर्मल मिंज नहीं रहे।  अलग राज्‍य आंदोलन में उनका योगदान भुलाया नहीं जा सकता है।  डॉ मिंज गोस्‍सनर चर्च के बिशप रहे हैं। डॉ निर्मल मिंज को साहित्य अकादमी का भाषा सम्मान से नवाजा जा चुका है। कुड़ुख भाषा में लेखन और उसके लिए व्यापक काम के लिए डॉ निर्मल मिंज को यह सम्मान दिया गया है. डॉ निर्मल मिंज पहले व्यक्ति हैं, जिन्होंने अपने कार्यकाल में गोस्सनर कॉलेज में जनजातीय भाषाओं की पढ़ाई शुरू करायी थी। कुड़ंख के लिए अपनी लिपि विकसित करने में भी डॉ मिंज एक मार्गदर्शक की भूमिका में जिसकी बदौलत डॉ नारायण उरावं की टीम ने ‘तोलोंग सिकि’ विकसित किया था।.. 

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