झारखण्ड में नई शिक्षा नीति और कुंड़ुख़ भाषा-लिपि की सार्थकता विषयक गोष्ठी

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दिनांक 21.11.2021 दिन रविवार को अद्दी कुंड़ुख़ चाला धुमकुड़िया पड़हा अखड़ा (अद्दी अखड़ा), रांची (झारखण्ड) के अध्यक्ष जिता उरांव एवं सचिव  राजेन्द्र भगत की मुलाकात राजी पड़हा प्रार्थना सभा ट्रस्ट, मुड़मा, रांची के अध्यक्ष  बंधन तिग्गा से हुई। इस अवसर पर राउरकेला (ओड़िशा) से  मनीलाल केरकेट्टा एवं जामताड़ा (झारखण्ड) से  संजय पहान एवं उनके साथी भी उपस्थित थे।

अद्दी अखड़ा के अध्यक्ष  जिता उरांव ने अपने मुलाकात के विषय-वस्तु को स्पष्ट करते हुए कहा कि – केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति 2020 को लागू कर दिया गया है। इसके आलोक में झारखण्ड सरकार‚ 2022 से राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत विद्यालयों में मातृभाषा शिक्षा लगाने जा रही है। ऐसी स्थिति में समाज के लोगों को भी तैयारी करनी चाहिए और सरकार के इस नये पहल का स्वागत करना चाहिए। इसके लिए कुंड़ुख़ समाज के प्रबुद्ध लोगों के साथ बैठक कर विचार-विमर्श करना चाहिए। इस विषय पर पूर्व बैंक अधिकारी एवं अद्दी अखड़ा के सचिव  राजेन्द्र भगत ने कहा कि – कुंड़ुख़ भाषा-संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्द्धन हेतु मैं स्वयं एक स्कूल खड़ा किया हूं जहां गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के लिए अंगरेजी तथा हिन्दी के साथ कुंड़ुख भाषा विषय भी पढ़ाया जाता है और इसे समाज में अच्छा समर्थन मिल रहा है। इस दिशा में सरना प्रार्थना सभा का समर्थन मिलने से लोगों में और अधिक उत्साह बढ़ेगा। 

उक्त विषय पर  मनीलाल केरकेट्टा एवं  संजय पहान भी सहमत हुए और आगे की योजना पर अपना समर्थन करने का विचार दिया। इन सभी बातों पर विस्तार पूर्वक परिचर्चा के बाद राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा ट्रस्ट  के अध्यिक्ष   बंधन तिग्गा ने कहा – कि विगत कई वर्षों से इन बातों पर चर्चा हो रही है। मेरी बातें कुंड़ुख़ भाषा की लिपि, तोलोंग सिकि के जनक डा. नारायण उरांव से होते रहती है। हमलोग इन विन्दुओं पर कार्य योजना पहले से ही बना रहे हैं, परन्तु बिमारी और महामारी के चलते कार्य में अवरोध हुआ हैं। अब शीघ्र ही इस पर कार्य करना है। दिनांक 6-7 दिसम्बर को सरना कोड की मांग पर दिल्ली में धरना है। उसके बाद दिसम्बर में किसी एक दिन‚ बैठक के लिए तिथि तय कर लिया जाएगा। यह बैठक मुड़मा में होगा और देश के सभी कोने से कुड़ुख़ भाषी एवं प्रतिनिधियों को बुलाकर राज्य की शिक्षा नीति और कुंड़ुख़ भाषा–लिपि तथा धुमकुडिया शिक्षा विषय पर ’’मुड़मा फैसला’’ लिया जाएगा। अंत में अध्यक्ष  बंधन तिग्गा ने सभी उपस्थित सदस्यों को धन्यवाद दिया और गोष्ठी समाप्त हुई।

Dr Narayan Oraon

रिपोर्टर – 
डा. नारायण उरांव
 

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