सियांग और सैन्दा गांव में धुमकुड़िया सवंगिया विदाई कार्यक्रम सम्पन्न

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दिनांक 12 मई 2024,  दिन रविवार को,  झारखंड के गुमला जिला के अन्तर्गत,  सिसई थाना क्षेत्र के सियांग एवं सैन्दा गांव में धुमकुड़िया सवंगिया विदाई कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। ग्राम सियांग की सयनी फगनी उरांव, पिता श्री जयमंगल उरांव, बीए Kurukh आनर्स तक की पढ़ाई पूरी की और उनके माता पिता इस वर्ष शादी करने वाले हैं, का धुमकुड़िया सवंगिया विदाई कार्यक्रम, धुमकुड़िया के संगी साथी लोगों द्वारा पारम्परिक तरीके से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसी तरह ग्राम सैन्दा के सय बोलवा उरांव, पिता श्री मुंशी उरांव, आईए करके पिता के साथ खेतीबारी के कार्य में जुड़े हैं तथा सय अच्युत उरांव, पिता डॉक्‍टर नारायण उरांव, बीटेक करके बैंक सेवा में कार्यरत हैं, का धुमकुड़िया सवंगिया विदाई कार्यक्रम सैन्दा धुमकुड़िया के सदस्यों द्वारा आयोजित किया गया। ज्ञात हो कि पूर्व में इस तरह का आयोजन प्रति वर्ष नवयुवक नवयुवती के शादी से पूर्व किया जाता था, जो समय के थपेड़े ने इस तरह के आयोजन को प्राकृतिक मौत की ओर धकेल दिया।
इस बार सियांग गांव के स्कूल के बच्चे बच्चियां अपने पुस्तैनी विरासत को संयोजने को लेकर खुश हैं। अपनी पढ़ाई के साथ अपनी पुस्तैनी धरोहर को बनाए रखने के लिए तैयार हो गए हैं। इस अवसर पर सयनी फगनी उरांव ने अपनी विदाई के अवसर पर सभी कनीय साथी एवं अपने वरीय अभिभावकों को कापी और कलम देकर अभिवादन किया। उन्होंने अपने कनीय साथियों से अपील की  कि वे Kurukh  तोलोंग सिकि में पढ़ाई-लिखाई भी करें और 12 महीने का 13 राग परम्परा को भी सम्हालने के लिए आगे आएं। इसी क्रम में बीटेक इंजीनियरिंग ग्रेजुएट अच्युत उरांव ने गांव स्तर पर धुमकुड़िया सवंगिया विदाई समारोह आयोजन को अवर्णननीय कहा। उन्होंने अपने कनीय साथियों से कहा कि अब गांव के बच्चों को भी हिंदी एवं Kurukh के साथ अंग्रेजी, गणित एवं कम्प्यूटर विषय पर जोर देना होगा ।
वर्तमान समय में कम्प्यूटर शिक्षा के बिना आगे आना कठिन होता जा रहा है। अद्दी अखड़ा संस्था, रांची की ओर से धुमकुड़िया सवंगिया पेल्लो को विदाई में एक पड़िया साड़ी देकर सम्मानित किया गया तथा धुमकुड़िया सवंगिया जोंख़ लोगों को धोती का पगड़ी बांधकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर तोलोंग सिकि लिपि के संस्थापक डॉक्‍टर नारायण उरांव सैन्दा द्वारा गांव के पहान महतो पुजार आदि की उपस्थिति में थुमकुड़िया परम्परा की आवश्यकता एवं उपयोगिता पर विस्तृत जानकारी दी। इस आयोजन का संयोजन पड़हा कोटवार सय गजेन्द्र उरांव द्वारा किया गया।  आइये , इस कार्यक्रम का वीडियो देखते हैं। और हां, इस विषय पर अपना विचार हमें जरूर लिख भेजें । 

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 रिपोर्ट –

बिरैन्द्र उरांव,
तोलोंग सिकि शिक्षक,
धुमकुड़िया सियांग, सिसई, गुमला, झारखंड
 

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