Interview
Interview of special persons
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मुझे प्रसार भारती, नई दिल्ली द्वारा हवाई जहाज का टिकट भेजा गया : अरविंद उरांव

रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा कुँडुख स्कूल, मंगलो, सिसई, गुमला के प्रधानाचार्य श्री अरविंद उराँव एवं उनकी पत्नी श्रीमती शांति उराँव को गणतंत्र दिवस समारोह 2025 में स्पेशल गेस्ट के रूप में आमंत्रित किया गया। गणतंत्र दिवस समारोह 2025 में रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा स्पेशल गेस्ट के रूप में आमंत्रित किए जाने पर समारोह…
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धुमकुड़िया को जीवित करने के लिए मौसम अनुसार रागों में गीतों का अभ्यास जरूरी : डॉ नारायण उरांव “सैन्दा”

धुम-ताअ़+कुड़ियां = धमकुड़िया शब्द बना है। धुमकुड़िया उरांव आदिवासी गांव में एक पारंपरिक सामाजिक पाठशाला सह कौशल विकास केंद्र है। दादा-दादी या नाना-नानी अपने पोते-पोतियों, नाती को बुलाकर उन्हें गायन-नृत्य-वादन सीखने देते हैं। दूसरे शब्दों में, हम कह सकते हैं कि वह प्रणाली या वातावरण जहाँ बच्चे गाना-नाचना और खेल-खेल में पारंपरिक अभ्यास करना सीखते…
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पिन्की लिन्डा vs बागा तिर्की : आखिर क्यों, छुटा-छुटी (तलाक) से पहले हो गया केस डिसमिस?..

यह वीडियो हमारे पिछले वीडियो https://youtu.be/gxus_PSq_yg का हिस्सा (Excerpt) है, जिसका शीर्षक था- ‘कोई प्रथा कैसे बनती है कस्टमरी लॉ?.. | How does a custom become a Customary Law?’ वीडियो में मुख्य वक्ता हैं कानून के प्राध्यापक श्री रामचन्द्र उरांव। सवाल कर रहे हैं, पत्रकार किसलय। वह पूरा वीडियो यहां देख – सुन सकते हैं।…
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कोई प्रथा कैसे बनती है कस्टमरी लॉ?

भारत में आदिवासियों के कई मामलों में अलग कानून चलता है, जिसे कस्टमरी लॉ या प्रथागत कानून कहते हैं। इस प्रसंग में हम पिछले अंक में चर्चा कर चुके हैं। आप उस वीडियो को यहां ऊपर, दाहिनी तरफ आ रहे लिंक पर देख और सुन सकते हैं। उस वीडियो में हमने कस्टमरी लॉ के अर्थ,…
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आदिवासियों का कस्टमरी लॉ अलग क्यों है?

आपको पता है, भारत में दो तरह के कानून चलते हैं: पहला ‘जेनरल लॉ’ और दूसरा ‘कस्टमरी लॉ’। जेनरल लॉ यानी सामान्य कानून पूरे देश में लागू होता है, जबकि ‘कस्टमरी लॉ’ केवल आदिवासियों के प्रसंग में चलता है। आये दिन इसपर कई विवाद भी हुए हैं। मामला उच्च न्यायालयों तक पहुंचता है। और ऐन…
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तोलोंग सिकि में पठन-पाठन की मांग

यह विडियो, दिनांक 20 अक्टुबर 2022 दिन वृहस्पतिवार को अद्दी कुंड़ुख़ चाला धुमकुड़िया पड़हा अखड़ा (अद्दी अखड़ा), रांची के अध्यक्ष श्री जिता उरांव द्वारा जारी किया गया है। इस साक्षात्कार में श्री जिता जी के साथ श्री बिपता उरांव कोषाध्यक्ष, अद्दी अखड़ा उपस्थित थे।
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गलती सुधारने का वक्त आ गया है: डॉ निर्मल मिंज (संदर्भ: झारखंड)

यह वीडियो स्वर्गीय डॉ निर्मल मिंज को श्रद्धांजलि है। डॉ मिंज का यह वीडियो 19 मई 2017 को रिकॉर्ड किया गया था। साक्षात्कारकर्ता हैं पत्रकार किसलय।
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सरना धर्मकोड पर केंद्र और राज्य दोनों आदिवासियों को धोखा रहे हैं : सालखन मुर्मू

– अब वक्त आ गया है कि राज्य की हेमन्त सरकार आदिवासी हित में आगे आये और केंद्र सरकार समय रहते देश भर के 15 करोड़ आदिवासियों की भावना को ध्यान में रखते हुए आदिवासी संगठनों से धर्म कोड पर वार्ता शुरू करे वरना.. – 31 जनवरी 2021 को राष्ट्रव्यापी रेल-रोड चक्का जाम होगा जोरदार
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उपेक्षित आदिवासी भाषाएं : 58 साल की शांति खलखो के संघर्ष की कहानी

27 साल पहले NET, JRF की पात्रता पानेवाली डॉ शांति खलखो के संघर्ष की कहानी, खुद उनकी जुबानी। रांची के जनजातीय भाषा विभाग में 12 साल तक बतौर प्रोफेसर पढ़ाती रही, लेकिन कभी बदले में उन्हें एक पैसा मेहनताना नहीं मिला। अब, एक बार फिर 18 जनवरी 2021 को 58 साल की उम्र में डॉ…
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