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  • कुँड़ुख़ (उराँव) परम्परा में अध्यात्मिक मान्यताएँ

    साधरणतया, लोग कहा करते हैं – आदिवासियों का कोर्इ धर्म नहीं है। इनका कोर्इ   आध्यात्मिक चिंतन नहीं है। इनका विश्‍वास एवं धर्म अपरिभाशित है। ये पेड़-पोधों की पूजा करते हैं …. आदि, आदि। इस तरह के प्रश्‍नों एवं शंकाओं को प्रोत्साहित करने वालों से अगर पूछा जाय – क्या, वे अपने विश्‍वास, धर्म आदि

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  • लरका आंदोलन का अमर शहीद वीर बुधू भगत और अंगरेजी बंदूक

    लरका आंदोलन का अमर शहीद वीर बुधू भगत और अंगरेजी बंदूक

    भारत की आजादी की लड़ाई में सन् 1857 या उसके बाद, देश के लिए प्राणों की आहुति देने वाले वीर शहीदों में कुछ के नाम भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखे गए हैं। किन्तु 1857 ई. से पहले और बाद भी आदिवासी     समुदायों के वीरों के अधिकांश नाम गुमनामी के ढेर में छिपा

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  • करम परब गही ख़ीरी (करम त्योहार की कहानी)

    करम परब गही ख़ीरी (करम त्योहार की कहानी)

    बअ़नर – हुल्लो परिया नु ओरोत कुँड़ुख़ बे:लस ही रा:जी नु ओंगओल अनभनियाँ रा:जी कीड़ा मंज्जा। चेंप-झड़ी मल पुर्इंका ती खितीपुती मल मना लगिया। तूसा-झरिया, खाड़-ख़ोसरा, कूबी-पोखारी उरमी ख़ाया लगिया। मन्न-मास ही खं़जपा हूँ नठारआ हेल्लरा। ओना-मोख़ा गे मल ख़खरना ती टोड़ंग-परता ता अड़ख़ा-चे:खे़ल अरा बोकला गुट्ठीन मो:ख़र, आलर एकअम बेसे उल्ला खेपआ लगियर। चान-चान,

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  • गुरूभक्त एकलव्य और गुरू द्रोणाचार्य

    गुरूभक्त एकलव्य और गुरू द्रोणाचार्य

    (माननीय सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मार्कंडेय काटजू और जस्टिस ज्ञानसुधा मिश्रा की खंडपीठ द्वारा माह जनवरी 2011 में दिये गए एक अभूतपूर्व फैसले के पश्चा1त् महान आदिवासी जननायक,  गुरूभक्त एकलव्य के स्मृति में गुरूभक्त एकलव्य जयंती सप्ताह के अवसर पर समर्पित) : एक कहावत है – ‘‘ईश्वर के घर देर है, अंधेर नहीं।’’ यह कहावत ‘‘एकलव्य’’

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  • धरमुस बिट्ठी केरस (एक इतिहास) 

    धरमुस बिट्ठी केरस (एक इतिहास) 

    देवनाथ सायस गही समधियान कुकड़ो पद्दा रहचा। तंगदन ओन्दर’आ गे गोल्लस धरमुसिन बिट्ठी धरचस। र्इ चान पर्इयाँ उरूख़कन्ती आस तंगदा गने पुरी सहर तिरिथ काला गे मनमनरस। धरमुस मून्द गोटंग अउर कुँड़खा़रिन बिद्दयस। देवनाथ गोल्लस गहि तिरिथ उरूखना उल्ला पतरा ए:रर की टिपिरकी रहचा। अँवती धरमुस तड़तड़ाय के कुकड़ो पद्दा केरस। पालकी नुं बिजोली बींड़िन

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  • 22 पड़हा ग्रामसभा बिसुसेन्दरा 2020 का घोषणा पत्र

    22 पड़हा ग्रामसभा बिसुसेन्दरा 2020 का घोषणा पत्र

    जैसा कि हम सभी जानते हैं – भारतीय संविधान के निर्माण से पूर्व, भारत में बहुत से राष्ट्र, प्रदेश एवं कबिलार्इ समूह स्वतंत्र रूप से गुजर-बसर कर रहे थे। देश की आजादी के पश्‍चात् नये जीवन की तरह भारतीय संविधान का निर्माण हुआ और वे सभी पुराने दल एक झण्डे के नीचे आ गये। इस

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  • क्या है सरना धर्म ?

    क्या है सरना धर्म ?

    सरना धर्म क्या है ? यह दूसरे धर्मों से किन मायनों में जुदा है ? इसका केन्द्रीय आर्दा और र्दान क्या है? अक्सर इस तरह के सवाल पूछे जाते हैं। कर्इ सवाल सचमुच जिज्ञााा के पुट लिए होते हैं और कर्इ बार इसे दृारारती अंदाज में भी पूछा जाता है, कि गोया तुम्हारा तो कोर्इ

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  • धरमुस बिट्ठी केरस (एक इतिहास)  

    देवनाथ सायस गही समधियान कुकड़ो पद्दा रहचा। तंगदन ओन्दर’आ गे गोल्लस धरमुसिन बिट्ठी धरचस। र्इ चान पर्इयाँ उरूख़कन्ती आस तंगदा गने पुरी सहर तिरिथ काला गे मनमनरस। धरमुस मून्द गोटंग अउर कुँड़खा़रिन बिद्दयस। देवनाथ गोल्लस गहि तिरिथ उरूखना उल्ला पतरा ए:रर की टिपिरकी रहचा। अँवती धरमुस तड़तड़ाय के कुकड़ो पद्दा केरस। पालकी नुं बिजोली बींड़िन

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  • कुंड़ुख की लिपि तोलोंग सिकि के उदय की दास्‍तां

    कुंड़ुख की लिपि तोलोंग सिकि के उदय की दास्‍तां

    भारत के उरावं आदिवासियों की भाषा कुंड़ुख इन दिनों खूब चर्चा में है। झारखंड की हेमंत सरकार ने सरकारी स्‍कूलों में कुंड़ुख भाषा की पढ़ाई का बीड़ा उठाया है। एक समय था जब कुंड़ुख एक संपूर्ण भाषा नहीं महज एक बोली थी। इसकी अपनी लिपि नहीं थी। कई दशकों से संबंधित विद्वान लोग इस बोली

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