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Brief note on ST Inclusion/Exclusion/ modification in Scheduled Tribe List

(According to report of Standing Committee on Social Justice and Empowerment 2012-13) Article 366(25) of the Constitution, defines Scheduled Tribes as follows:- “Scheduled Tribes means such tribes or tribal communities or parts of or groups within such tribes or tribal communities as are deemed under article 342 to be Scheduled Tribes for the purposes of
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रूढ़ी-प्रथा के अन्तर्गत ग्रामसभा एवं पड़हा के कार्यकारिणी सदस्य – कौन और कैसे ?

ज्ञात हो कि रूढ़ीप्रथा ग्रामसभा पड़हा बिसुसेन्दरा, सिसई-भरनो, गुमला (झारखण्ड) द्वारा विगत 13 वर्षों से रूढ़ीप्रथा में प्रचलित सामाजिक मान्यताओं को लिखित रूप में संकलित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अग्रेतर क्रियान्वयन में परम्परागत ग्रामसभा पड़हा बिसुसेन्दरा 2020 के लिखित प्रतिवेदन के कंडिका – 9, 10, 11 को सामाजिक आधार मानकर
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ग्राम सभा पड़हा न्यायपंच नियमावली 2025

ग्राम सभा पड़हा न्यायपंच नियमावली 2025 : पद्दा पड़हा नेवईपंच्चा
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कुंडुख़ भाषा संस्कृति परम्परा ग्रामसभा विषयक तीन दिवसीय कार्यशाला संपन्न

दिनांक – 21.02.2025 से 23.02.2025 को (कुंडुख़ उरॉंव) समाज के लोगों के बीच में कुड़ुख़ भाषा संस्कृति परंपरा, ग्राम सभा विषयक कार्यशाला सम्पन्न हुआ। यह कार्यशाला टाटा स्टील फाउण्डेशन के सौजन्य से आयोजित हुआ। इस कार्यशाला का आयोजन, कुड़ुख़ भाषा सांस्कृतिक पुनरुत्थान केन्द्र बम्हनी, गुमला तथा अददी कुड़ुख़ चाला धुमकुड़िया पड़हा अखड़ा, रॉंची के संयुक्त
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The Historical Significance of Rohtasgarh and Oraons

Rohtasgarh is a historical place of significant value for the Oraon tribe. The Oraon, or Kurukh, are one of the largest tribal groups in Eastern India. There is some geographical situation in this mountain towards Son River where several descending roots descend down from up. These roots called as Ruih in Kurukh/Oraon language. So the mountain become famous as
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ताेलाेंङ सिकि कुंड़ुख़ व्याकरण संबंधी आवश्यक जानकारी

देवनागरी लिपि से कुंड़ुख भाषा की सभी ध्वनियों को ज्यों का त्यों लिखने में कठिनाई होती है । अतः देवनागरी लिपि के मूल सिद्धांत ‘एक ध्वनि एक संकेत’ के अनुसार तथा पुनरूक्ति दोष से बचने हेतु प्रचलित ध्वनि चिह्न के नीचे या उपर भाषा विज्ञान एवं तकनीकि सम्मत, पूरक चिह्न देकर पढ़ने एव लिखने के तरीके को तोलोंग सिकि में अपनाया गया है,
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परंपरागत ग्रामसभा पड़हा बिसुसेन्दरा गुमला मंडल के सम्मेलन के अनुसार दिशा निर्देश

भारतीय संसद द्वारा पारित पेसा कानून 1996 की धारा 4(d) के तहत दिनांक 18 एवं 19 मई 2024 को 22 गांवों के सदस्यों द्वारा ‘परम्परागत ग्रामसभा पड़हा बिसुसेन्दरा, गुमला मण्डल’ का दो दिवसीय सम्मेलन पड़हा पिण्डा ग्राम सैन्दा, थाना सिसई जिला गुमला (झारखंड) में संपन्न हुआ और सम्मेलन की उपलब्धि को आम लोगों के अनुपालन
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मान्दर के संबंध में कुड़ुख़ (उरांव) भाषा में लोकगीत

mAnwar ke saMbaMW me kuzux (urAEv) lokgiqo:r – xe:l niXhay xoterA ju:zi,be:cA barLoy kA malA, re HH2HHPe:r – barA huE barLon, malA huE barLon.xe:r ciE:xo bA:ri barLon, re HH2HHo:r – xe:l xenwA kA:way wawA,u:xA-mA:xA nu kA:way, re HH2HHPe:r – mukkA xenwA kA:way wawA,caNwwo billi nu kA:way, re HH2HHo:r – Cote nu xe:l xenwoy wawA,parawoy hole
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Kurukh Times मैगजिन का vol. 12 प्रकाशित
Kurukh Times vol. 12 प्रकाशित हो रहा है। इसका पी.डी.एफ.आप सभी डाउनलोड करें और कूड़ुख़ भाषा एवं तोलोंग सिकि के विकास की कथा जानें। अंक 12 में माह जुलाई-सितंबर 2024 का सामयिक लेख एवं विचार है। आइए देखें – कुड़ुख़ टाइम्स,अंक 12.
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Kurukh Times मैगजिन vol. 11 प्रकाशित
Kurukh Times vol. 11 प्रकाशित हो रहा है। इसका पी.डी.एफ.आप सभी डाउनलोड करें और कूड़ुख़ भाषा एवं तोलोंग सिकि के विकास की कथा जानें। अंक 11 में माह अप्रैल-जून 2024 का सामयिक लेख एवं विचार है। आइए देखें – कुड़ुख़ टाइम्स,अंक 11.
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- ओर- करम करम करले बहीन..आईज तारीख 08 मार्च 2026 दिन एतवार के कुड़ुख़ टाइम्स डॉट कॉम कर पुनह परकाशन कर बेरा में टी आर एल ब्लॉग ले उरांव अखरा से तीन गो गावल गीत के नागपुरी भखा में बताल हय। इके धेयान देवब और गुनगुनाब अपने मन सउब – 1 ओर छोट-मोटे तेतईर गे आयो,भिंजल छांहईर गे आयो ।2।घुराल… Read more: ओर- करम करम करले बहीन..
- झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?राँची के कोर्नेलियस मिंज को लोग करन कहते हैं. उनका परिवार सरना आदिवासी था लेकिन बाद में ईसाई बन गया. हालाँकि कोर्नेलियस के घर में अब भी कई लोग सरना हैं. यह परिवार साथ में सरहुल भी मनाता है और क्रिसमस भी. आपस में शादियाँ भी होती हैं. करन कहते हैं कि जब सरना और… Read more: झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?
- झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानितरांची: आज दिनांक 21.02.2026 दिन शनिवार को प्रेस क्लब रांची में अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर अखिल झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार सम्मान 2026 झारखंड के 9 साहित्यकारों के रचनाकारों के साथ ओल चिकि लिपि के रचयिता श्रद्धेय पं रघुनाथ मुर्मू तथा वरांग चिति के रचयिता श्रद्धेय कोल लाको बोदरा को मरणोपरांत उनके वंशजों को… Read more: झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानित
- औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?आजादी के पचहत्तर साल बाद भी भारत अंग्रेज और अंग्रेजियत (औपनिवेशिक गुलामी) से मुक्त नहीं हुआ है”—इस उक्ति को यदि गहराई से समझें, तो यह किसी भौतिक गुलामी की नहीं बल्कि मानसिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक और वैचारिक गुलामी की ओर संकेत करती है। भारत ने 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता तो प्राप्त की, परंतु औपनिवेशिक सत्ता द्वारा… Read more: औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?
- हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते यह जानकर बहुत प्रेरणा मिलती है कि गुमला, रांची, लातेहार और लोहरदगा के युवा गणित (Maths) जैसे कठिन विषय को भी कुँड़ुख में ढाल रहे हैं। प्रसिद्ध अफ्रीकी लेखक चिंतक न्गुगी वा थ्योंगो ने हमेशा यही कहा कि – “भाषा केवल साहित्य के लिए नहीं, बल्कि विज्ञान और तर्क के लिए भी होनी चाहिए” ।… Read more: हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते