रांची: झारखंड की राजधानी रांची स्थित मोरहाबादी मैदान में आयोजित भव्य ‘आदिवासी एकता महाजुटान’ में राज्य के जनजातीय समाज के संवैधानिक अधिकारों, जल-जंगल-जमीन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर केंद्र सरकार तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ हुंकार भरी गई। कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और आदिवासी कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य में प्रस्तावित परिसीमन (Delimitation) के नाम पर आदिवासियों की राजनीतिक हिस्सेदारी को किसी भी कीमत पर कम नहीं होने दिया जाएगा।
राहुल गांधी तक पहुंचेगी परिसीमन पर तैयार रिपोर्ट: बंधु तिर्की
महाजुटान को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक और वरिष्ठ कांग्रेस नेता बंधु तिर्की ने परिसीमन को केवल सीटों का फेरबदल न बताकर आदिवासियों के अस्तित्व और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा करार दिया। उन्होंने हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुशीष सोरेन द्वारा तैयार एक विस्तृत रिपोर्ट मंच से ग्रहण की। बंधु तिर्की ने घोषणा की कि इस रिपोर्ट को झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू के माध्यम से सीधे कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं सांसद राहुल गांधी तक पहुंचाया जाएगा, ताकि इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती के साथ उठाया जा सके।
बंधु तिर्की ने कहा, “झारखंड बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू और वीर बुधु भगत की पावन भूमि है। यदि केवल जनसंख्या को आधार बनाकर अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों में कटौती का प्रयास किया गया, तो उलगुलान की तर्ज पर गांव-गांव तक आंदोलन खड़ा किया जाएगा।” उन्होंने केंद्र सरकार पर राज्य के बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपये न देने और खान-खनिज संशोधन विधेयक 2026 के जरिए स्थानीय अधिकारों को कमजोर करने का आरोप भी लगाया।
संवैधानिक संरक्षण पर भाजपा का प्रहार: केशव महतो कमलेश
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि आजादी के बाद बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर, जयपाल सिंह मुंडा और देवेन्द्र नाथ समद जैसे महापुरुषों ने आदिवासियों को संवैधानिक सुरक्षा कवच दिया था। आज भाजपा उस संरक्षण को खत्म करने पर तुली है। कांग्रेस पार्टी किसी भी परिसीमन प्रक्रिया के नाम पर जनजातीय आबादी के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की हकमारी बर्दाश्त नहीं करेगी।
आरक्षण और एकता ही सबसे बड़ी ताकत: विक्रांत भूरिया
मध्य प्रदेश से आए आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया ने अपने ओजस्वी संबोधन में एकजुटता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा आदिवासियों को ‘वनवासी’ कहकर उनकी मूल पहचान और अधिकारों को छीनना चाहती है। भूरिया ने कहा, “हमारे बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर और राजनेता बनाने का काम संविधान द्वारा दिए गए आरक्षण ने किया है। परिसीमन के माध्यम से हमारी सीटें कम कर राजनीतिक ताकत छीनने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी इस अधिकार की लड़ाई आखिरी दम तक लड़ेगी।”
महाजुटान से उठी प्रमुख मांगें:
आरक्षित सीटों की सुरक्षा: लोकसभा और विधानसभा में वर्तमान ST आरक्षित सीटों में किसी भी प्रकार की कमी न की जाए।
अनुपातिक बढ़ोतरी: कुल सीटों की संख्या बढ़ने पर ST आरक्षित सीटें भी उसी अनुपात में बढ़ाई जाएं।
विशेष भौगोलिक आधार: परिसीमन में केवल जनसंख्या ही नहीं, बल्कि पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों, विस्थापन, पलायन और सामाजिक-सांस्कृतिक परिस्थितियों को मुख्य आधार माना जाए।
सामाजिक कार्यकर्ता ग्लैडसन डुंगडुंग ने भी झारखंड की खनिज संपदा पर कॉर्पोरेट गिद्ध दृष्टि का आरोप लगाते हुए कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में एकतरफा परिसीमन को कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा। महाजुटान में उमड़ी भीड़ ने एक स्वर में अपनी सांस्कृतिक पहचान, जमीन और अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया।

Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.