कुडुख़ (उरांव) समुदाय भारत की एक ऐसी आदिम नष्वंषविज्ञान पहचान है, जिसका इतिहास गौरव, संघर्श और निरंतर प्रवास का मिश्रण रहा है। इस समुदाय की ऐतिहासिक जड़ों और दक्षिण से उत्तर भारत की ओर उनके विस्थापन का प्रमाणिक विवरण श्री योगेश्वर उरांव (असम राज्य वित्त सलाहकार) की शोधपरक पुस्तक “उरांवों के दक्षिण से उत्तर भारत की यात्रा” में विस्तार से मिलता है। इस यात्रा क्रम में “रोहतासगढ़” मात्र एक भौगोलिक स्थान या किला नहीं है, बल्कि यह उरांव समुदाय की सामाजिक-राजनीतिक चेतना का उपरिकेंद्र (Epicenter) और उनकी अटूट वीरता का प्रतीक है। ऐतिहासिक षोध ऐों के अनुसार, रोहतासगढ़ उरांवों की प्राचीन व्यवस्था और उनके गौरवषाली अतीत का वह आधार स्तंभ है, जहाँ से उनकी सांस्कृतिक अस्मिता को एक निश्चित आकार मिला।
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