आदिवासी महासम्‍मेलन 2020 : संविधान में आदिवासियों के लिए बने कानून को अमल में लाए सरकार

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वाराणसी, जेएनएन :  आदिवासी महासम्‍मेलन उत्‍तर प्रदेश 2020 का आयोजन रविवार को वाराणसी में किया गया। इस दौरान अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. नंद कुमार सायं ने कहा कि आदिवासियों को संविधान में जो सुविधाएं दी गई है उसे प्रदेश सरकार अमल में नहीं ला रही है। कई जिलों और प्रदेशों में आदिवासियों को आदिवासी जाति का प्रमाणपत्र नहीं मिल रहा है जिससे उनकी गणना नहीं हो पा रही है। कई जिलों में आदिवासी की जगह उन्हें अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र दिया जा रहा है जो गलत है जिससे आदिवासी समाज विकास करने की बजाय और पीछे चला जा रहा है। सरकारें आदिवासियों की मांगों को गंभीरता से ले। वे रविवार को नदेसर स्थित कटिंग मेमोरियल इंटर कालेज परिसर में ‘प्रथम आदिवासी महासम्मेलन-2020’ में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। 

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उन्होंने कहा कि आदिवासी प्रमाणपत्र के लिए कार्यालयों में आवेदन करने पर कर्मचारी बाधा पहुंचा रहे हैं। वे नियम-कानून का हवाला देते हैं हुए आदिवासी समाज के लोगों का उत्पीडऩ करते हैं। सरकारी नौकरी में आदिवासी समाज को आरक्षण नहीं मिल रहा है जिससे वे अपने अधिकार से वंचित हो रहे हैं। शिक्षा समेत अन्य सुविधाएं आदिवासी समाज को प्रमुखता से दी जाए जिससे वे विकास कर सकें। कहा कि समाज को जागरूक करने के लिए बनारस में प्रथम आदिवासी महासम्मेलन आयोजित किया गया है। महासम्मेलन के माध्यम से अपनी मांगों को रखा गया है। शासन-प्रशासन आदिवासी समाज की मांगों पर विचार नहीं करता है तो यह जन जागरूकता सम्मेलन जिले संग कई प्रदेशों में होंगे। 

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