कुडुख़ भाषा की लिपि “तोलोड सिकि” में कुडुख़ प्रवेशिका पुस्तक “अयंग कोंयछा” के
तृतीय संस्करण के प्रकाशन पर मुझे एक विशिष्ट उर्जा की अनुभूति हो रही है। मैं अपने छात्र जीवन
के समय में वर्ष 1989 में कुडुख़ समाज की स्थिति के बारे विचार करते हुए कुडुख़ भाषा एवं संस्कृति
के संरक्षण तथा संवर्द्धन हेतु कार्य करने का निर्णय लिया। पर यह कार्य किस प्रकार हो यह स्पष्ट
नहीं था। परन्तु कार्य आगे बढ़ते ही स्पष्ट होने लगा कि आदिवासी पहचान का मापदण्ड उनकी
भाषा और संस्कृति है। पूरी पुस्तक नीचे पीडीएफ में पढ़ सकते हैं।
कुडुख़ भाषा की लिपि “तोलोड सिकि” में कुडुख़ प्रवेशिका पुस्तक “अयंग कोंयछा” प्रकाशित

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