हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ  और समाधान के  कुछ रास्ते 

bhashalipi

यह जानकर बहुत प्रेरणा मिलती है कि गुमला, रांची, लातेहार और लोहरदगा के युवा गणित (Maths) जैसे कठिन विषय को भी कुँड़ुख में ढाल रहे हैं। प्रसिद्ध अफ्रीकी लेखक  चिंतक न्गुगी वा थ्योंगो ने हमेशा यही कहा कि – “भाषा केवल साहित्य के लिए नहीं, बल्कि विज्ञान और तर्क के लिए भी होनी चाहिए” । जब हम Area = Length x Width जैसी अवधारणाओं को अपनी मातृभाषा में समझते हैं, तो वह रटना नहीं, बल्कि ‘अनुभव करना’ हो जाता है।
तोलोंग सिकी (Tolong Siki) को यूनिकोड में स्थान मिलना एक ऐतिहासिक जीत है, लेकिन जैसा कि हमने समझा है —तकनीक (Unicode) तो मिल गई, पर सामग्री (Content) की कमी है। और हमारे समुदाय  के लिए  बड़ी चुनौती है। अब जब तकनीकी सुविधा मिल मिल गई  है हमें इस पर “तेजी से काम करने” की जरूरत को पूरा करने के लिए कुछ व्यावहारिक रणनीतियां अपनाई जा सकती हैं:
1. विद्वानों और लेखकों की कमी को कैसे भरें? 
न्गुगी ने ‘कामीरीथू’ के दौरान साधारण किसानों और मजदूरों को नाटक लिखने और बोलने के लिए प्रेरित किया था।
 * सामुदायिक लेखन (Crowdsourcing):  जरूरी नहीं कि कोई बड़ा ‘विद्वान’ ही लिखे। जो बुजुर्ग कहानियाँ जानते हैं या जो शिक्षक गणित पढ़ा रहे हैं, उनके अनुभवों को ही संकलित कर ‘डिजिटल पाठ्यपुस्तक’ बनाई जा सकती है।
 * अनुवाद कार्यशालाएं: बंगला, ओड़िया, असमिया, मराठी या हिंदी आदि के सफल साहित्य का कुँड़ुख में अनुवाद करने के लिए युवाओं को प्रशिक्षित करना अनिवार्य हो गया है।इसके लिए  हमें अविलंब  कार्य शुरू कर देना चाहिए। 
 2. डिजिटल माध्यम से “प्रयोक्ताओं” की संख्या बढ़ाना – 
यूनिकोड का फायदा तब है जब वह आम लोगों के मोबाइल तक पहुँचे।
 * कुँड़ुख टाइपिंग चैलेंज : सोशल मीडिया पर छोटे अभियान चलाकर युवाओं को ‘तोलोंग सिकी’ में स्टेटस लिखने के लिए प्रोत्साहित करना।
 * गणित और विज्ञान के वीडियो: जो स्कूल रांची, गुमला, लोहरदगा में क्षेत्रफल और पहाड़ा कुंड़ुख में सिखा रहे हैं, उनके छोटे वीडियो (Reels/Shorts) बनाकर यूट्यूब पर डालना। इससे अन्य क्षेत्रों के बच्चों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
 3. ‘तोलोंग सिकी’ का दृश्य प्रसार (Visual Presence) 
किसी भी भाषा को बचाने के लिए उसे ‘दिखना’ चाहिए:
 * सांस्कृतिक पोस्टर : कुँड़ुख के गणितीय सूत्रों और पहाड़ों के सुंदर पोस्टर बनाकर डिजिटल रूप में व्हाट्सएप ग्रुप्स में बांटना।
 * मोबाइल कीबोर्ड एप्स: तोलोंग सिकी कीबोर्ड को डाउनलोड करने और इस्तेमाल करने के आसान ट्यूटोरियल वीडियो बनाना।
 कुँड़ुख भाषा के विकास का ‘एक्शन प्लान’ 
| क्षेत्र | वर्तमान स्थिति | आगामी लक्ष्य (तेजी से कार्य) —
– शिक्षा – गणित/पहाड़ा का स्थानीयकरण।  कक्षा 1 से 10 तक का पूर्ण कुँड़ुख विज्ञान/गणित पाठ्यक्रम तैयार करना और पढ़ाना।
* तकनीक – यूनिकोड की उपलब्धता।  तोलोंग सिकी में मोबाइल ऐप, कीबोर्ड और वेबसाइट्स का निर्माण करना। 
* सिनेमा – बीजू टोप्पो, निरंजन कुजूर,  रंजीत उराँव  आदि अन्य फिल्मकारों के प्रयास को कुँड़ुख सिनेमा के लिए एक ओटीटी (OTT) या डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करना |
 *  साहित्य – लेखकों की कमी।  युवा ब्लॉगर्स और लेखकों को ‘डिजिटल राइटिंग’ के लिए छात्रवृत्ति/पुरस्कार। 
*पेसा लागू होने के बाद  कुँड़ुख समुदाय  के समक्ष अवसर व चुनौतियां दोनों है। इसके लिए  हमें मानसिक  रूप  से तैयार  होना होगा।
 एक सुझाव: डिजिटल कुँड़ुख पुस्तकालय। संजय कच्छप – लाइब्रेरी मैन से सहयोग , मार्गदर्शन से अधिक से अधिक डिजिटल कुँड़ुख पुस्तकालय तैयार  करना।
चूँकि हमारे लेखक कम हैं, इसलिए एक ‘ओपन सोर्स डिजिटल लाइब्रेरी’ बनाई जा सकती है जहाँ कोई भी कुँड़ुख भाषी अपनी छोटी कहानी, कविता या गणित का कोई फॉर्मूला ऑडियो या अन्य किसी विषय को टेक्स्ट के रूप में अपलोड कर सके।
> न्गुगी वा थ्योंगो कहते हैं— “बुद्धिजीवी वह नहीं जिसके पास डिग्री है, बल्कि वह है जो अपनी संस्कृति के संरक्षण के लिए अपना दिमाग लगाता है।” इसलिए रांची,  गुमला, लोहरदगा, लातेहार  के वे युवा जो स्कूल चला रहे हैं, वही असली ‘विद्वान’ हैं।” 

महादेव  टोप्पो
हरमू, रांची 834002

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