उरांव समाज में सम्‍बन्‍ध विच्‍छेद की प्रक्रिया : एक लोकगीत में

यह विडियो 17 मई 2023  को शूट किया गया है। इस विडियो में गायिका श्री मती सुशीला टोप्पो, पति श्री रन्थु उरांव द्वारा अपने गीत में परम्परागत उरांव समाज में प्रचलित वैयक्तिक प्रेम के चलते अपने वैवाहिक संबंध तोड़ने के लिए एक बहन अपने भाई से निवेदन करती है। भाई कहता है – जाओ बहन जाओ, दामाद बाबू ले जाने के लिए आये हैं। इसपर बहन कहती है – नहीं भैया नहीं, मैं ससुराल नहीं जाउंगी,  मेरा हमउम्र साथी, मुझसे अत्यधिक प्रेम करता है। इसलिए हे भैया – आप मेरा डली ढिबा वापस कर दीजिए। मैं ससुराल नहीं जाउंगी। परम्परागत उरांव आदिवासी समाज में विवाह विच्छेद के लिए डली ढिबा (विवाह रस्म के शगून का प्रतीक धनराशि जिसे वर्तमान में सवा रूपया, ढाई रुपया से बढ़ाकर ग्यारह रुपया के करीब किया गया है) को लौटाना पड़ता है। डली ढिबा लौटाने से पहले शिकायत मिलने पर पंच बैठता है और बिहउड़ी जुर्माना लगाया जाता है। उसके बाद ही विवाह विच्छेद को सामाजिक मान्यता मिलती है ।
तो आइये देखते हैं और सुनते हैं गायिका सुशीला टोप्‍पो का यह लोक गीत.. 

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