मन्दर बिरो- झारखंड राज्य की पारंपरिक चिकित्सा

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झारखंड प्रदेश खनिज व वन संपदाओं और जैव विविधता से परिपूर्ण है। उपलब्‍ध डेटा के अनुसार भारत के भौगोलिक क्षेत्र में प्रदेश का कुल वन क्षेत्र 29.61 प्रतिशत है। यहां के छोटानागपुर में शुष्क पर्णपाती वन औषधीय पौधों की खेती के लिए वातावरण सबसे उपयुक्त है। जंगलों में ऐसे मूल्यवान औषधीय पौधों को लगाने एवं संरक्षण करने पर ज़ोर दिया जा रहा है जिससे सेवा के साथ-साथ आमदनी भी बढ़ाई जा सके।

एंगागे मन्दर खेंन्दना र’ई। एन्देर मन्दर? अर्थात मेरे लिए दवा या औषधि खरीदना है। कौन सी दवा? प्रकृति ही हमारी पीड़ा का इलाज है। ‘मन्दर-पादा बेछना’ का अर्थ है औषधीय पौधे और जड़ या जड़ी- बूटी  खोजना। बीमार व्यक्ति (मन्दा) को स्वस्थ करने के लिए औषधि यानी मन्दर देकर चिकित्सा यानी बिरो किया जाता है। वहीं , ‘मन्दर कमना’ का मतलब जड़ी-बूटी से दवाई बनाना है।

जल, जंगल, जमीन से जुड़े होने के कारण आदिवासी समुदाय की जीवनी यानी दिनचर्या, वन पर ही निर्भर होती है। परिवार की रोज़ी- रोटी और अन्य बुनियादी जरूरतों के लिए लघु वनोपज जैसे जलावन, महुआ, डोरी, बीड़ी पत्ता, दतुवन, लाह, गोंद, मौसमी फल-फूल, साग आदि जमा करके हाट में बेचा जाता है। आधुनिक दौर में इको-फ्रेंडली संग्रहण, सुखाकर भंडारण, प्रोसेसिंग प्लांट और हाट से तालमेल की व्यवस्था होने पर रोजगार से जुड़ सकेंगे। भारत के मूल फलों में आम, नींबू, बेल, आंवला, कनोद यानी करौंदा, कटहल, बेर, तारा फल या कहें करमबोल, जामुन, इत्यादि हैं जो विदेश में भी भेजे जाते हैं। हमारे पूर्वजों से मिली प्राकृतिक धरोहरें अगली आने वाली पीढियों को संरक्षित और संवर्धित रुप में मिलेंगी। 

झारखंड में वैज्ञानिकों की प्राचीन और दुर्लभ प्रजातियां  की खोज जारी है। सारंडा जंगल के हाटगम्हरिया में वैज्ञानिक मीठे स्वाद, उत्तम गुणवत्ता वाले शरीफा वन देखकर आश्चर्यचकित हुए । शायद आपको पता होगा शरीफा के बीज को अंकुरित होने में एक साल का समय लगता है। इतंगाली 2021 में सर्दी -खांसी, बदन दर्द और बुखार के इलाज के लिए चरइगोड़ की पत्तियों एवं छाल से बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी कि वैज्ञानिक कौशल कुमार, द्वारा निर्मित फार्मुलेशन ‘बिरसिन BAU’ का पेटेंट अधिकार इंडियन पेटेंट ऑफिस, कलकत्ता ने दे दिया है।

कई उत्पादों से बीमारियां और साइड इफेक्ट होने के कारण लोग प्राकृतिक उत्पाद की ओर रुख कर रहे हैं। कुछ शैंपू उत्पादों में खतरनाक केमिकल ‘बेंजीन’ पाया गया है जिसके लगातार संपर्क में आने से कैंसर हो सकता है। हाल ही में कॉस्मेटिक कंपनी Dove, Tresemme, Suave, Nexxus और Tigi ने अक्टूबर 2021 से पहले बने अपने उत्पाद अमेरिकी बाजार से वापस मंगवा लिए है।

एक रोचक तथ्य है कि जंगल में ‘भुला घास’ है, जिसे पकड़ते ही आप अपना रास्ता खुद भुल जाएंगे। जी हां, ऐसी ही जादुई शक्तियां हैं हमारे वनोपजों व जड़ी बूटियों में। तो आइए ऐसे ही  दस पेड़- पौधों जिनमें धवइ, कोइनार, कुदरुम, सनइ, अनन्तमुल, अर्जुन, जरुल, अगस्त, बनआदि और चरइगोड़ शामिल हैं, के बारे में जानते हैं। यहां इनके औषधीय गुणों, पारंपरिक उपयोग तथा कुछ उनसे जुड़ी सावधानियों के बारे में जानकारी दिये जा रहे हैं। इसके लिये यहां उपलब्‍ध पीडीएफ पेज को खोल कर पढि़ये.. 

Neetu Sakshi

आलेख –
सुश्री नीतू साक्षी टोप्पो
एम.एससी (बायोटेक्नोलॉजी)
डिबडीह, रॉंची।

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