शिक्षा का अलख : बांस और घास की शुरूआत से फर्स्ट डिविजनर्स तक!

यह विडियो, बुदो उरांव मॉडर्न पब्लिक स्कूल,  महुगांव मोड़- हहरी, थाना-  घाघरा, जिला- गुमला का है।  इस स्‍कूल का संचालन गांव के लोगों द्वारा किया जाता है। इस स्कूल का आरंभ वर्ष 2,014 में हुआ था।   यह एक इंग्लिश मीडियम स्कूल है। यहां हिन्दी तथा अंग्रेजी के साथ तीसरी भाषा विषय के रूप में Kurukh भाषा, तोलोंग सिकि लिपि में पढ़ाई करायी जाती है। इस स्कूल से मैट्रिक परीक्षा 2,022 में पहली बार 8 छात्र शामिल हुए, और सभी 8 छात्र प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुए। इस तरह यहां के छात्र हिन्दी, अंग्रेजी एवं  Kurukh, तीनों विषय में पारंगत होकर निकले। इस स्कूल के डायरेक्टर, रामवृक्ष किण्डो जी हैं। उनके द्वारा कम संसाधन में ही आदिवासी बहुल क्षेत्र में शिक्षा का अलख जगाने का कार्य किया जा रहा है। 

आपको पता ही है कि तोलोंग सिकि लिपि का निर्माण, डॉक्‍टर नारायण उरांव ने किया था। अपने डॉक्‍टरी के पेशे को ईमानदारी से निभाते हुए वह कई दशकों में इस लिपि को अपने समाज यानी, Kurukh समाज को समर्पित किया। डॉक्‍टर उरांव ने पिछले दिनों इस स्‍कूल का भ्रमण किया। वह स्‍कूल के संरक्षक और संचालकों की लगन से अभिभूत हैं। डॉक्‍टर नारायण उरांव क्‍या कहते हैं वहां से लौटकर.. 
मैं दिनांक 22 अक्‍टूबर 2,022 को, शनिवार के दिन मॉडर्न पब्लिक स्‍कूल का भ्रमण किया। यह विद्यालय, टाटा स्टील फाउंडेशन, जमशेदपुर के जनजातीय भाषा लिपि शिक्षण-प्रशिक्षण योजना से जुड़ा है।  इसी योजना के क्रियान्वयन तथा निरिक्षण के तहत हम दोनों, यानी मैं डॉक्‍टर नारायण उरांव एवं डॉक्‍टर नारायण भगत, विभागाध्यक्ष, Kurukh, डोरण्डा कालेज रांची,  निरिक्षण कार्य में शामिल हुए। हमें आशा है कि आदिवासी समाज के बीच हो रहे इन कार्यो को राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार मदद करेगी।
 

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