यहां गाकर सिखाते हैं कुड़ुख (आदिवासी भाषा) मातृभाषा!

यह विडियो, कार्तिक उरांव आदिवासी कुड़ुख् विद्यालय, मंगलो, सिसई, गुमला में चल रहे कुंड़ुख्‍ हिन्दीआ विद्यालय की कक्षा का है. इस कक्षा में कुंड़ुख्‍ गीत एवं कविताओं को मौसमी राग में गाकर पढ़ाया जाता है. पढ़ाई के इस तरीके से गांव स्तकर में गीत नृत्य़ को फिर से जागृत करने में मदद मिलेगी. साधारणतया ऐसा पाया गया है कि स्कूगल जाने वाले बच्चे  अपने मातृभाषा में रूचि नहीं ले रहे हैं. उपरोक्तन तरीके से स्कू्ल के बच्चेे अपनी पढ़ाई के साथ मौसमी गीत एवं राग भी सीख्‍ सकेंगे. यह आने वाले समय में भाषा संरक्षण का एक मार्गदर्शन का कार्य होगा.
    कुंड़ुख्‍ भाषा शिक्षक श्री एतवा उरांव अपनी लगन से छात्रों में जोश जगाने एवं भाषा के संरक्षण के प्रति होश लाने का प्रयास कर रहे हैं. प्रस्तुनत गीत सिसई भरनो क्षेत्र में गाया जाने वाला सरहुल धुड़िया मौसमी राग में है. 
    रिपोर्टर/वीडियो – अरविन्द  उरांव, मंगलो, सिसई, गुमला.
 

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